MP में जल संकट पर सख्ती, नगरीय निकाय और PHE कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश
MP में लगातार बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां आगामी एक महीने के लिए रद्द कर दी गई हैं। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब पेयजल व्यवस्था और उससे जुड़ी शिकायतों के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह निर्णय मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा 24 मई 2026, रविवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान लिया गया। इस बैठक में प्रदेश के सभी संभाग आयुक्त, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, पीएचई विभाग के अधिकारी और नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में उत्पन्न पेयजल संकट की स्थिति की समीक्षा करना और तत्काल प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना था।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में
बैठक के दौरान बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को “युद्धस्तर पर” काम करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में अब प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ा दी गई है और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट कहा कि जल संकट से जुड़ी हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और उसका समाधान तय समय सीमा में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में शिकायतों के निपटारे में देरी नहीं होनी चाहिए।
CM हेल्पलाइन के माध्यम से 24 घंटे में समाधान का लक्ष्य
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रदेश में पेयजल से जुड़ी सभी शिकायतों का समाधान CM हेल्पलाइन के माध्यम से 24 घंटे के भीतर किया जाए। इसके लिए सभी जिलों में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं, जहां से रोजाना पेयजल आपूर्ति और संकट की स्थिति की निगरानी की जाएगी।
कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रतिदिन संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करें और पेयजल वितरण व्यवस्था की समीक्षा करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी क्षेत्र में पानी की किल्लत की स्थिति उत्पन्न न हो।
छुट्टियां रद्द, सभी अधिकारी-कर्मचारी रहेंगे ऑन ड्यूटी
राज्य सरकार ने पेयजल संकट की गंभीरता को देखते हुए नगरीय निकायों और PHE विभाग के सभी कर्मचारियों की छुट्टियों को एक महीने के लिए निरस्त कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अब पूरी तरह फील्ड में सक्रिय रहेंगे और जल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।
जिला स्तर पर बनेगा कंट्रोल रूम, रोज होगी मॉनिटरिंग
निर्देशों के अनुसार, राज्य के प्रत्येक जिले में एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। इस कंट्रोल रूम का काम होगा जिले में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की नियमित निगरानी करना और किसी भी समस्या की तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना।
कलेक्टरों को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे रोजाना विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करें और जल वितरण की समीक्षा करें। इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर लगातार फीडबैक लिया जाएगा।
पंचायतों को 10,000 रुपये तक के कार्यों की त्वरित अनुमति
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि ग्राम पंचायतों को अब 10,000 रुपये तक के छोटे कार्य तुरंत कराने की अनुमति दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे स्तर की जल संबंधी समस्याओं का समाधान बिना किसी देरी के किया जा सके।
इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन मरम्मत, हैंडपंप सुधार और अन्य छोटे कार्य तेजी से पूरे किए जा सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पेयजल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों और मीडिया फीडबैक पर भी सख्त नजर
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों और मीडिया से प्राप्त फीडबैक को गंभीरता से लिया जाए। यदि किसी क्षेत्र में पेयजल समस्या की शिकायत मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लापरवाही या देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के हर नागरिक को समय पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो और किसी भी क्षेत्र में पानी की किल्लत न रहे।
राज्य सरकार की प्राथमिकता में पेयजल संकट का समाधान
MP सरकार ने साफ कर दिया है कि पेयजल संकट का समाधान उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गर्मी के मौसम और जल स्तर में गिरावट को देखते हुए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि वे फील्ड में रहकर स्थिति का आकलन करें और जहां जरूरत हो वहां तत्काल टैंकर, पाइपलाइन मरम्मत और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करें।
निष्कर्ष
MP में बढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। छुट्टियों की समाप्ति, कंट्रोल रूम की स्थापना, CM हेल्पलाइन की 24 घंटे मॉनिटरिंग और पंचायतों को त्वरित कार्य अनुमति जैसे कदमों से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जल आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। आने वाले दिनों में इन उपायों के प्रभाव से प्रदेश में पेयजल स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
