साधु सुरक्षा को लेकर हार्दिक हुंडिया ने देशभर के संघों से ठोस कदम उठाने की अपील की। हाईवे पर संतों के विहार और बढ़ते हादसों पर जताई चिंता।
साधु सुरक्षा : करोड़ों रुपया वैयावच्च के नाम पर पड़े हैं, फिर भी साधुओं की सुरक्षा के लिए क्या?
जैन समाज में साधु-साध्वियों को पंच महाव्रत धारी महात्मा माना जाता है, जो स्वयं की आत्मा के कल्याण के साथ-साथ समाज की आत्मा का भी कल्याण करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं। लेकिन आज वही संत समाज राष्ट्रीय धोरी मार्गों और हाईवे पर असुरक्षित होता जा रहा है। लगातार हो रहे हादसों और संतों की अकस्मात मृत्यु ने पूरे जैन समाज को झकझोर कर रख दिया है।
समाजसेवी हार्दिक हुंडिया ने इस गंभीर विषय को लेकर देशभर के संघों और समाजजनों से बड़ा सवाल पूछा है कि करोड़ों रुपया वैयावच्च के नाम पर जमा होने के बावजूद आखिर साधु सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं बन पा रही है?
साधु सुरक्षा पर हार्दिक हुंडिया की चिंता
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जिन पंच महाव्रत धारी महात्माओं ने संसार का त्याग कर आत्मकल्याण और लोककल्याण का मार्ग चुना है, उनकी सुरक्षा के लिए समाज को गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब कोई मुमुक्षु आत्मा दीक्षा लेती है और जब देव लोक होते हैं, तब संघों को लाखों रुपये की आय बोली और वैयावच्च के माध्यम से प्राप्त होती है। ऐसे में यदि यह राशि संतों की सुरक्षा के काम नहीं आती, तो फिर उसका उद्देश्य क्या रह जाता है?
हार्दिक हुंडिया ने स्पष्ट कहा कि आज जरूरत केवल श्रद्धा दिखाने की नहीं, बल्कि साधु सुरक्षा के लिए व्यवहारिक और ठोस कदम उठाने की है।
हाईवे पर बढ़ते हादसों ने बढ़ाई चिंता
हार्दिक हुंडिया ने राष्ट्रीय धोरी मार्गों और हाईवे पर संतों के विहार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज हाईवे पर ट्रकों और भारी वाहनों की तेज रफ्तार किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सुबह के समय ट्रक ड्राइवर अक्सर तेज गति में वाहन चलाते हैं। कई बार दो लेन में पहले से ट्रक तेज रफ्तार में चलते रहते हैं और पीछे से आने वाला तीसरा ट्रक ओवरटेक करने के लिए तीसरी लेन में तेजी से प्रवेश करता है। यदि उसी समय तीसरी लेन पर संत विहार कर रहे हों, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि यह केवल आशंका नहीं बल्कि लगातार सामने आ रही वास्तविकता है, जिसे समाज को गंभीरता से समझना होगा।
वैयावच्च की राशि का उपयोग कहां हो?
साधु सुरक्षा को लेकर हार्दिक हुंडिया का सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की वैयावच्च राशि आखिर किस उद्देश्य के लिए है?उन्होंने कहा कि यदि समाज संतों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, तो वैयावच्च की भावना अधूरी रह जाती है। समाज को अब संतों की सुरक्षा के लिए विशेष फंड, सुरक्षा वाहन, विहार सेवक टीम, मेडिकल सहायता और ट्रैफिक समन्वय जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने कहा कि संतों का विहार केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि समाज की आध्यात्मिक धरोहर है, जिसकी रक्षा पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
संतों के विहार में बढ़ता खतरा
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि पहले संत छोटे-छोटे गांवों से होकर विहार करते थे, जहां ट्रैफिक कम होता था और वातावरण अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। बड़े शहरों और हाईवे मार्गों पर विहार बढ़ने से जोखिम भी बढ़ गया है।उन्होंने कहा कि आज हाईवे पर भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सुबह और रात के समय कई ड्राइवर नींद की अवस्था में वाहन चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि जहां संभव हो, राष्ट्रीय धोरी मार्गों पर विहार कम करें और सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।
व्हील चेयर उपयोग और बदलती परिस्थितियां
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि वर्तमान समय में साधु-साध्वियों के बीच व्हील चेयर का उपयोग भी बढ़ा है। ऐसे में हाईवे मार्गों पर विहार और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाता है।उन्होंने कहा कि विहार जैन शास्त्रों में बताई गई विधि और समय के अनुसार होना चाहिए। बदलते समय में सुरक्षा के आधुनिक उपायों को भी अपनाने की आवश्यकता है ताकि संत समाज सुरक्षित रह सके।
संघों और समाज की जिम्मेदारी
हार्दिक हुंडिया ने देशभर के सभी संघों से विनती करते हुए कहा कि जब कोई पंच महाव्रत धारी महात्मा एक नगर से दूसरे नगर की ओर विहार करें, तब संघों को पूरी जिम्मेदारी के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि केवल स्वागत और सम्मान तक सीमित रहने के बजाय संघों को सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग समन्वय और विहार सेवकों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा।
विहार सेवकों को हार्दिक नमन
हार्दिक हुंडिया ने उन सभी विहार सेवकों को नमन किया जो सुबह की मीठी नींद और अपनी जान की परवाह किए बिना संतों की सुरक्षा में लगे रहते हैं।उन्होंने कहा कि ये सेवक समाज के सच्चे प्रहरी हैं, जो हाईवे और कठिन रास्तों पर संतों को सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
साधु सुरक्षा के लिए क्या हो सकते हैं उपाय
साधु सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
- हाईवे विहार के लिए विशेष सुरक्षा टीम
- विहार मार्ग का पूर्व निरीक्षण
- ट्रैफिक पुलिस से समन्वय
- विहार सेवकों का प्रशिक्षण
- मेडिकल सहायता वाहन
- संतों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग
- संघ स्तर पर सुरक्षा फंड
- जागरूकता अभियान
समाज को क्या करना चाहिए
- संत सुरक्षा को प्राथमिकता देना
- वैयावच्च राशि का उपयोग सुरक्षा में करना
- विहार सेवकों को संसाधन उपलब्ध कराना
- युवा वर्ग को सुरक्षा सेवा से जोड़ना

