Indore मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सज्जनसिंह वर्मा और गोपाल भार्गव की मुलाकात के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों में खेला होने की चर्चाएं बढ़ गई हैं। जानिए पूरा राजनीतिक गणित और अंदर की रणनीति।
Indore मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में बढ़ी हलचल
मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के भीतर रणनीतिक बैठकों और मेल-मुलाकातों का दौर शुरू हो चुका है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा तथा भाजपा के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
इंदौर और भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे राज्यसभा चुनाव के बड़े समीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।
सज्जनसिंह वर्मा और गोपाल भार्गव की मुलाकात क्यों खास
प्रदेश की राजनीति में सज्जनसिंह वर्मा और गोपाल भार्गव दोनों ही बड़े और अनुभवी चेहरे माने जाते हैं। ऐसे समय में जब राज्यसभा चुनाव सिर पर हो, दोनों नेताओं की मुलाकात ने कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों की चिंता बढ़ा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य मुलाकात नहीं हो सकती। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में क्रॉस वोटिंग, असंतोष और अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। ऐसे में यह मुलाकात कई संकेत दे रही है।
कांग्रेस और भाजपा का राजनीतिक गणित
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर अगले महीने 18 जून को चुनाव होना है। वर्तमान स्थिति में एक सीट कांग्रेस और दो सीटों पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा चाहती है कि इस बार तीसरी सीट पर भी उसका उम्मीदवार जीत दर्ज करे।
राज्यसभा चुनाव के लिए 58 विधायकों के वोट जरूरी हैं। कांग्रेस के पास करीब 62 वोट बताए जा रहे हैं। यानी कांग्रेस के पास केवल मामूली बढ़त है। यदि कुछ विधायक टूटते हैं या क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।वहीं भाजपा इस राजनीतिक समीकरण को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश में जुटी हुई दिखाई दे रही है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष का फायदा उठाकर तीसरी सीट भी जीत ली जाए।
कमलनाथ और दिग्विजयसिंह की भूमिका
राजनीतिक चर्चाओं में यह बात भी सामने आ रही है कि कांग्रेस की ओर से कमलनाथ को राज्यसभा भेजा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन जाएगा।वर्तमान में कांग्रेस की ओर से दिग्विजयसिंह राज्यसभा सदस्य हैं और पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती।इसी वजह से कांग्रेस फिलहाल बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार की टूट-फूट या नाराजगी से उसका राज्यसभा गणित बिगड़ जाए।
क्या मध्यप्रदेश में भी हो सकता है खेला?
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में पहले भी राज्यसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक खेला देखने को मिला है। अब मध्यप्रदेश में भी ऐसी संभावना की चर्चा तेज हो गई है।भाजपा के पास मजबूत संख्या बल है, लेकिन कांग्रेस के भीतर यदि असंतोष बढ़ा तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा के कुछ असंतुष्ट विधायकों पर नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का राज्यसभा चुनाव सामान्य नहीं रहने वाला। भाजपा और कांग्रेस दोनों पर्दे के पीछे पूरी ताकत से सक्रिय हैं।
18 जून पर टिकी सबकी नजर
18 जून को होने वाले मतदान पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है। इसी दिन साफ हो जाएगा कि मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में किस दल का राजनीतिक गणित सफल हुआ और किसके साथ खेला हो गया।फिलहाल दोनों दल अपने-अपने विधायकों को साधने में जुटे हैं। भोपाल में लगातार बैठकों और संपर्क अभियान का दौर जारी है। इंदौर से लेकर दिल्ली तक नेताओं की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है तो उसकी सीट सुरक्षित रह सकती है। लेकिन यदि थोड़ी भी टूट-फूट हुई तो भाजपा को बड़ा फायदा मिल सकता है।वहीं भाजपा के अंदर भी कुछ असंतुष्ट विधायकों की चर्चा हो रही है। ऐसे में चुनाव का परिणाम पूरी तरह एकतरफा होगा, यह कहना फिलहाल मुश्किल है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 अब केवल एक औपचारिक चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। सज्जनसिंह वर्मा और गोपाल भार्गव की मुलाकात ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।अब सबकी नजर 18 जून पर टिकी है, जब यह तय होगा कि खेला कांग्रेस के साथ हुआ या भाजपा के साथ।
