MP के सरकारी स्कूलों में एआई शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला CM डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक में अहम निर्देश
MP सरकार ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। CM डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय और निर्देश जारी किए। बैठक का मुख्य फोकस सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख कौशल से जोड़ने पर रहा।
CM ने स्पष्ट किया कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक का है, इसलिए बच्चों को शुरू से ही इसके लिए तैयार करना जरूरी है।
कक्षा 8वीं से 12वीं तक एआई शिक्षा की तैयारी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि कक्षा 8वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कौशल को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की नौकरियों और अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
शिक्षा घर योजना” को मिली सैद्धांतिक सहमति
CM ने “शिक्षा घर योजना” को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस योजना के तहत ऐसे विद्यार्थी जो किसी कारणवश अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाए हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देने और हाई स्कूल तथा हायर सेकेंडरी स्तर तक शिक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा।
इस योजना का संचालन मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, जिससे शिक्षा से वंचित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं पर जोर
CM ने सभी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं, उनकी तत्काल मरम्मत की जाए।
इसके साथ ही सभी स्कूलों में बाउंड्रीवाल निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शैक्षणिक सत्र से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश
CM ने कहा कि 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी स्कूलों में आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसमें कक्षाओं की व्यवस्था, शिक्षक नियुक्ति और भवनों की मरम्मत शामिल है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए, ताकि पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
परीक्षा परिणाम और स्कूलों का प्रदर्शन
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में 26 स्कूल ऐसे हैं जिनका परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल इन्हीं नहीं, बल्कि 90 से 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाले स्कूलों को भी सम्मानित किया जाना चाहिए।
इससे अन्य स्कूलों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति और इतिहास शामिल करने पर जोर
CM ने निर्देश दिया कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। साथ ही गुरु सांदीपनि के जीवन पर एक पुस्तक तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़ना है।
व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास
CM ने कहा कि स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इसके लिए स्व-सहायता समूहों को भी स्कूलों से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि छात्रों को 12वीं के बाद उनके करियर की ट्रैकिंग की जाए—जैसे उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि या पारंपरिक व्यवसाय।
स्कूलों का अपग्रेडेशन और नई पहल
CM ने निर्देश दिया कि जिन हाई स्कूलों के आसपास हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं हैं, उन्हें अपग्रेड करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
इसके अलावा, प्रदेश की सभी शालाओं को बेहतर समन्वय के साथ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
नई संस्कृत शालाओं की शुरुआत
बैठक में जानकारी दी गई कि राजगढ़ जिले के भैंसवा माता और नरसिंहपुर जिले के गाडरवाड़ा में संस्कृत विद्यालय शुरू किए गए हैं। इससे पारंपरिक और वैदिक शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार ने इस बैठक के माध्यम से स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को तकनीक, कौशल विकास और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ा जाएगा। एआई शिक्षा से लेकर व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्कूल सुधार तक, यह निर्णय राज्य के छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं।
