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स्कूलों के बाद मदरसों में भी लागू हुआ ‘Vande Mataram’ नियम, सरकार ने देशभक्ति को बढ़ावा देने का दावा किया

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Published On: 21 May 2026
पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘Vande Mataram’ अनिवार्य: सरकार के फैसले पर बढ़ी बहस

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पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘Vande Mataram’ अनिवार्य: सरकार के फैसले पर बढ़ी बहस

पश्चिम बंगाल सरकार ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े फैसले के तहत राज्य के सभी मदरसों में कक्षा शुरू होने से पहले ‘Vande Mataram’ गाना अनिवार्य कर दिया है। इससे पहले 14 मई 2026 को यह नियम सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया गया था। अब इसी नीति का विस्तार मदरसा शिक्षा संस्थानों तक कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है, जबकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं।

सभी मदरसों में लागू होगा नया आदेश

मदरसा शिक्षा विभाग और माइनॉरिटी अफेयर्स विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह नियम राज्य के सभी प्रकार के मदरसों पर लागू होगा। इसमें सरकारी मॉडल मदरसे, सहायता प्राप्त मदरसे, मान्यता प्राप्त MSKS, SSKS और गैर-सहायता प्राप्त मदरसे भी शामिल हैं।

आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि अब हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा। सभी संस्थानों को इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पहले स्कूलों में लागू हो चुका है नियम

इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 14 मई 2026 को एक आदेश जारी कर सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किया था। उस समय सरकार ने इसे विद्यार्थियों में राष्ट्रभावना और एकता को बढ़ाने वाला कदम बताया था।

अब इसी निर्णय को आगे बढ़ाते हुए मदरसों को भी इस व्यवस्था के अंतर्गत लाया गया है। इससे राज्य की पूरी शिक्षा प्रणाली में एक समान प्रार्थना व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया गया है।

सरकार का उद्देश्य: राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति

सरकार की ओर से कहा गया है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देशभक्ति की भावना को विकसित करना है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि ‘वंदे मातरम’ एक राष्ट्रीय गीत के रूप में देश की आज़ादी और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है। इसे स्कूल और मदरसों में शामिल करने से विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति सम्मान और जुड़ाव की भावना मजबूत होगी।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह कदम शिक्षा व्यवस्था में समानता और एकरूपता लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मदरसों पर सख्त अनुपालन के निर्देश

आदेश में सभी मदरसा प्रशासकों और संस्था प्रमुखों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी संस्थानों में नियम का पालन हो रहा है या नहीं।

प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि इस आदेश के क्रियान्वयन के लिए एक निगरानी तंत्र तैयार किया जाएगा। जिला स्तर पर शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे नियमित रूप से मदरसों का निरीक्षण करें और रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजें।

इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी संस्थानों में प्रार्थना सभा का समय निर्धारित तरीके से आयोजित हो।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस

इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षा संस्थानों में किसी विशेष गीत को अनिवार्य करना छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है।

वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि यह निर्णय किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।

सामाजिक संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस आदेश पर सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग रही है। कुछ संगठनों ने इसे देशभक्ति और एकता को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है, जबकि कुछ ने इसे संवेदनशील विषय मानते हुए सावधानी बरतने की बात कही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नीति को लागू करते समय स्थानीय परंपराओं और संस्थागत ढांचे का ध्यान रखना जरूरी होता है, ताकि किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न हो।

शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता का प्रयास

सरकार इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने के प्रयास के रूप में देख रही है। उनका मानना है कि यदि सभी स्कूलों और मदरसों में एक समान प्रार्थना प्रणाली लागू होती है, तो इससे छात्रों में समान नागरिक भावना विकसित होगी।

इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे छात्रों में अनुशासन और सामूहिकता की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

‘Vande Mataram’ का ऐतिहासिक संदर्भ

‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत रहा है। यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक माना जाता है।

सरकार का कहना है कि इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे शिक्षा संस्थानों में शामिल किया गया है, ताकि नई पीढ़ी इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ सके।

भविष्य में विस्तार की संभावना

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, यदि यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू होती है तो इसे अन्य शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है।

इसके साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस नीति की समीक्षा की जाएगी और इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल सरकार का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देने वाला कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर बहस भी तेज हो गई है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह निर्णय जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और शिक्षा संस्थानों में इसे किस तरह से लागू किया जाता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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