Iran–US War Update: ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान, CRS रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Iran–US के बीच जारी संघर्ष को दो महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी तक युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस बीच एक नई अमेरिकी रिपोर्ट ने इस युद्ध को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं, जिनसे अमेरिका को हुए भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान का दावा किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका जहां ईरान पर दबाव बनाकर सत्ता परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रहा था, वहीं ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई करते हुए इस संघर्ष में मजबूती से डटा हुआ है।
CRS रिपोर्ट में सामने आया बड़ा दावा
अमेरिकी संसद की आधिकारिक रिसर्च विंग ‘कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS)’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान में अमेरिका को गंभीर नुकसान उठाना पड़ा है।
इस ऑपरेशन को रिपोर्ट में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से संदर्भित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान में अमेरिकी सेना के कम से कम 42 आधुनिक सैन्य विमान, ड्रोन और अन्य उपकरण या तो पूरी तरह नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
आधुनिक अमेरिकी सैन्य उपकरणों को बड़ा झटका
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नुकसान अमेरिका के सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। वियतनाम युद्ध और इराक युद्ध के बाद यह पहली बार माना जा रहा है जब अमेरिका को इतने बड़े पैमाने पर आधुनिक तकनीक से लैस हथियारों का नुकसान हुआ है।
यह आंकड़े अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, सेंट्रल कमांड और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं।
24 रीपर ड्रोन गिराए जाने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सबसे आधुनिक और खतरनाक माने जाने वाले ‘रीपर ड्रोन’ को बड़ी संख्या में निशाना बनाया है।
दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान अमेरिका के लगभग 24 रीपर ड्रोन ईरान द्वारा मार गिराए गए हैं। इन ड्रोन को अमेरिकी सैन्य निगरानी और हमलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
फाइटर जेट और स्टील्थ विमान भी क्षतिग्रस्त
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका के कई एडवांस फाइटर जेट्स को भी नुकसान पहुंचा है।
- 4 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट क्षतिग्रस्त हुए
- एक स्टील्थ फाइटर जेट को भी नुकसान हुआ
- अन्य कई एयरक्राफ्ट गंभीर रूप से प्रभावित हुए
इन नुकसान को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है।
रिफ्यूलर विमान और जासूसी ड्रोन भी निशाने पर
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने केवल लड़ाकू विमानों को ही नहीं बल्कि सपोर्ट सिस्टम को भी निशाना बनाया।
- 7 बड़े एयर-टू-एयर रिफ्यूलर विमान क्षतिग्रस्त
- 1 E-3 सेंट्री AWACS विमान को नुकसान
- 2 स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट प्रभावित
- 1 रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी नष्ट या क्षतिग्रस्त
- 1 MQ-4C Triton हाई-टेक जासूसी ड्रोन को भी नुकसान
इन सभी उपकरणों का नुकसान अमेरिकी वायु शक्ति के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
Read Also :Iran–US Tension Update: ईरान में बिल की तैयारी, ट्रंप और नेतन्याहू पर बयान से बढ़ा विवाद
इस युद्ध का असर सिर्फ सैन्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।
12 मई को अमेरिकी संसद की हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी की सुनवाई के दौरान पेंटागन के कार्यवाहक कंट्रोलर जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट तृतीय ने बताया कि ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों का खर्च तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह खर्च अब लगभग 29 अरब डॉलर यानी करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
भारी खर्च का कारण क्या बताया गया
पेंटागन के अनुसार, यह बढ़ा हुआ खर्च कई कारणों से हुआ है:
- नष्ट हुए विमानों और ड्रोन की जगह नए उपकरण खरीदना
- क्षतिग्रस्त सैन्य उपकरणों की मरम्मत
- लगातार सैन्य ऑपरेशंस और तैनाती
- लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से भी लंबी चुनौती बन सकता है।
युद्ध खत्म होने के संकेत नहीं
दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं और सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी हुई है।
अमेरिका जहां ईरान को रणनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश में है, वहीं ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
निष्कर्ष
CRS रिपोर्ट में सामने आए इन दावों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। भारी सैन्य नुकसान और बढ़ते आर्थिक खर्च के बीच यह संघर्ष अब एक लंबे और जटिल युद्ध की ओर इशारा कर रहा है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह तनाव किसी कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या यह टकराव और ज्यादा गहरा होगा।
