हार्दिक हुंडिया लेख में धर्म के नाम पर हो रहे पाखंड, कुसाधुओं की गतिविधियों और जैन समाज को जागृत करने वाला बड़ा संदेश पढ़ें।
हार्दिक हुंडिया लेख : धर्मप्रेमियों को जागृत करने वाला संदेश
हार्दिक हुंडिया लेख इन दिनों जैन समाज सहित धर्मप्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार हार्दिक हुंडिया ने अपने लेख में धर्म के नाम पर बढ़ रहे पाखंड, कुसाधुओं की गतिविधियों और समाज की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया है।उन्होंने अपने लेख के माध्यम से समाज को यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर भगवान महावीर के बताए मोक्ष मार्ग से लोग दूर क्यों होते जा रहे हैं।
भगवान महावीर के आदर्श और वर्तमान स्थिति
हार्दिक हुंडिया लेख में कहा गया कि राजा वर्धमान कुमार ने सब कुछ त्याग कर भगवान महावीर का स्वरूप धारण किया था, लेकिन आज परिस्थितियां उलट दिखाई दे रही हैं।जहां भगवान महावीर ने त्याग, तप और मोक्ष का मार्ग दिखाया था, वहीं आज कुछ लोग धर्म के नाम पर धन संग्रह में लगे हुए हैं।लेख में सवाल उठाया गया कि क्या धर्म का उद्देश्य आत्मकल्याण है या फिर केवल आर्थिक लाभ कमाना?
धर्म के नाम पर धंधा करने वालों पर सवाल
वरिष्ठ पत्रकार हार्दिक हुंडिया ने अपने लेख में स्पष्ट कहा कि कुछ कुसाधु धर्म को धंधा बनाकर समाज को गुमराह कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक मूर्ति पर्याप्त होती है, वहां अधिक मूर्तियां स्थापित कर केवल अधिक धन संग्रह करने का प्रयास किया जाता है।
प्राइवेट ट्रस्ट और धर्म व्यापार पर टिप्पणी
हार्दिक हुंडिया लेख में यह भी कहा गया कि कुछ लोग संघ की महिमा को भूलकर निजी ट्रस्ट बनाकर केवल आर्थिक स्वार्थ साधने में लगे हैं।उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य मोक्ष मार्ग दिखाना है, लेकिन कुछ लोग उसी धर्म को व्यापार का माध्यम बना रहे हैं।
शिथिलाचारी कुसाधुओं पर तीखा हमला
लेख में हार्दिक हुंडिया ने उन मामलों का भी उल्लेख किया जिनमें कुछ साधु-साध्वियों से जुड़े विवाद सामने आए।उन्होंने कहा कि यदि किसी साधु पर गंभीर आरोप और सबूत सामने आते हैं तो उसे साधु वेश में बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
संघ और समाज की चुप्पी पर सवाल
हार्दिक हुंडिया लेख में यह भी कहा गया कि पहले किसी एक संप्रदाय में शिथिलाचार की घटना सामने आती थी तो दूसरे संप्रदाय प्रतिक्रिया देते थे, लेकिन अब सभी समुदाय चुप नजर आते हैं।उन्होंने समाज से प्रश्न पूछा कि आखिर यह मौन क्यों है?
जैन समाज से जागरण की अपील
हार्दिक हुंडिया ने देशभर के जैन संघों और समाजजनों से हाथ जोड़कर अपील की कि अंगुलियों पर गिने जाने वाले कुसाधुओं के कारण हजारों साधु-साध्वियों की छवि खराब नहीं होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि धर्म और संघ की रक्षा के लिए अब समाज को जागृत होना पड़ेगा।
“अब नहीं चले कुसाधु”
लेख में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिथिलाचार और व्यभिचार में लिप्त लोगों को साधु वेश में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को वापस संसारिक जीवन में भेजा जाना चाहिए ताकि धर्म की पवित्रता बनी रहे।
संघटन बनाने की बात
हार्दिक हुंडिया लेख में कहा गया कि जिस तरह कुछ कुसाधु एक-दूसरे को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, उसी तरह अब शासनप्रेमियों का संगठन भी तैयार हो रहा है।उन्होंने कहा कि यह संगठन कानून का सहारा लेकर धर्म और संघ की रक्षा करेगा।
साधु भगवंतों के सम्मान की बात
हार्दिक हुंडिया ने अपने लेख में उन साधु भगवंतों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जो पंच महाव्रत का पालन करते हुए आत्मकल्याण और समाज कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कारण पूरे साधु समाज को बदनाम नहीं होने देना चाहिए।
निष्कर्ष
हार्दिक हुंडिया लेख केवल एक लेख नहीं बल्कि धर्मप्रेमियों को जागृत करने का संदेश है।इस लेख में धर्म के नाम पर पाखंड, आर्थिक स्वार्थ और शिथिलाचार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही समाज को यह संदेश भी दिया गया है कि धर्म की रक्षा और पवित्रता बनाए रखने के लिए जागरूकता आवश्यक है।
