Gold-Silver बाजार में गिरावट: मिडिल ईस्ट तनाव, ट्रंप की धमकी और वैश्विक अस्थिरता का असर
18 मई को भारतीय सर्राफा बाजार में Gold-Silver की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं में दबाव देखने को मिल रहा है। घरेलू वायदा बाजार (MCX) में आज सोना और चांदी दोनों ही लाल निशान में खुले। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) में सोना 1 प्रतिशत से अधिक और चांदी लगभग 2.7 प्रतिशत तक टूट गई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर देखने को मिला है।
हालांकि सामान्य परिस्थितियों में युद्ध या तनाव की स्थिति में सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं, क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और वैश्विक निवेश धारणा में बदलाव ने बाजार को प्रभावित किया है।
वैश्विक तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान के पास अब समय बहुत कम है और उसे जल्द निर्णय लेना चाहिए। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल और तेज हो गई।
ईरान की प्रतिक्रिया और बढ़ता तनाव
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तरह के दबाव में झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला किया गया या दबाव बनाया गया, तो वह मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना सकता है।
इस बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
तेल आपूर्ति पर संकट की आशंका
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति क्षेत्रों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव सीधे वैश्विक कच्चे तेल बाजार को प्रभावित करता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति पर भी दबाव बढ़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की गिरावट
वैश्विक बाजार (Comex) में आज सोने की कीमतों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी करीब 2.7 प्रतिशत तक टूट गई। इसका कारण निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अस्थायी रूप से जोखिम उठाने की प्रवृत्ति में कमी माना जा रहा है।
निवेशक आमतौर पर युद्ध और संकट की स्थिति में सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन जब बाजार में अचानक तरलता और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने पर दबाव बन जाता है।
भारतीय बाजार पर सीधा असर
भारतीय सर्राफा बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय गिरावट का सीधा असर देखने को मिला है। देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें निम्नलिखित रहीं—
- दिल्ली: 24 कैरेट – ₹1,57,070 प्रति 10 ग्राम
- मुंबई: 24 कैरेट – ₹1,56,920 प्रति 10 ग्राम
- कोलकाता: 24 कैरेट – ₹1,56,920 प्रति 10 ग्राम
- बेंगलुरु: 24 कैरेट – ₹1,56,920 प्रति 10 ग्राम
- चेन्नई: 24 कैरेट – ₹1,60,900 प्रति 10 ग्राम
चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार (MCX) की स्थिति
घरेलू वायदा बाजार यानी MCX (Multi Commodity Exchange) में भी आज गिरावट देखी गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक संकेतों और कमजोर मांग के चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।
MCX पर ट्रेडिंग के दौरान निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं और बड़े सौदों से बच रहे हैं, जिससे बाजार में वॉल्यूम भी प्रभावित हुआ है।
निवेशकों के लिए बदलता रुख
सोने-चांदी में निवेश को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक परिस्थितियां काफी अस्थिर हैं। ऐसे में निवेशक अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय “वेट एंड वॉच” रणनीति अपनाने का है, क्योंकि आने वाले दिनों में कीमतों में बड़ी तेजी या गिरावट दोनों संभव हैं।
डॉलर और वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रभाव
सोने की कीमतें अक्सर अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी से प्रभावित होती हैं। वर्तमान में डॉलर में मजबूती के कारण सोने पर दबाव देखा जा रहा है।
इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों की दिशा और केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी इस बाजार को प्रभावित कर रही हैं।
क्या आगे और गिर सकती हैं कीमतें?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और डॉलर और मजबूत होता है, तो सोने-चांदी की कीमतों में और गिरावट संभव है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ता है, तो इसके उलट तेज उछाल भी देखने को मिल सकता है।
भारत पर व्यापक असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है। यहां शादी-ब्याह और त्योहारों में सोने की मांग बहुत अधिक रहती है। ऐसे में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू मांग पर पड़ता है।
अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची या अस्थिर रहती हैं, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं और ज्वैलरी बाजार दोनों पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
मौजूदा समय में सोना और चांदी दोनों ही वैश्विक घटनाओं के प्रभाव में हैं। मिडिल ईस्ट तनाव, ट्रंप की धमकी, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की रणनीति बदलने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और सतर्कता बरतने का है, क्योंकि बाजार किसी भी दिशा में तेज़ी से बदल सकता है।
