Iran को लेकर अमेरिका में सैन्य कार्रवाई की आशंका तेज, ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति पर वैश्विक नजर
चीन दौरे से लौटते ही ट्रंप के सामने बड़ा कूटनीतिक संकट
वॉशिंगटन, 16 मई 2026।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे से वापसी के बाद अब Iran को लेकर एक बड़ा और गंभीर कूटनीतिक तथा सैन्य संकट सामने खड़ा हो गया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका एक बार फिर ईरान पर सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर सकता है।
व्हाइट हाउस और पेंटागन दोनों स्तरों पर इस मुद्दे को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा जारी है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
अमेरिकी प्रतिष्ठित अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की नई योजना तैयार कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह विफल हो जाते हैं, तो अमेरिका ईरान पर एक बार फिर सैन्य हमले शुरू कर सकता है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पेंटागन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी में हैं। यह वही ऑपरेशन है जिसे पिछले महीने युद्धविराम की घोषणा के बाद रोक दिया गया था। अब इसे नए रणनीतिक ढांचे के साथ फिर से शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
ट्रंप ने Iran के शांति प्रस्ताव को ठुकराया
चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रस्ताव को तभी आगे पढ़ते हैं जब उसकी शुरुआती लाइनें उन्हें उचित लगें।
ट्रंप के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है।
शी जिनपिंग के साथ बैठक में भी उठा ईरान का मुद्दा
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में ईरान का मुद्दा भी शामिल था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन से ईरान पर कोई विशेष दबाव बनाने का अनुरोध नहीं किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चर्चा का संबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जो वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर वैश्विक चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके माध्यम से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और चीन सहित कई देश इस मार्ग पर निर्भर हैं।
इसी कारण इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई देश इस संकट को कम करने और समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं।
पेंटागन की नई रणनीति और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए एक नई रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को पुनः सक्रिय करने पर विचार किया जा रहा है।
यह ऑपरेशन पहले युद्धविराम के बाद रोक दिया गया था, लेकिन अब इसे नए सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों के साथ फिर से शुरू करने की तैयारी है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह योजना ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है।
अमेरिका की दोहरी रणनीति: कूटनीति और दबाव
अमेरिकी प्रशासन इस समय दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर जहां कूटनीतिक समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्पों को भी सक्रिय रखा गया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस में दिए बयान में कहा कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है, तो अमेरिका के पास संघर्ष बढ़ाने की पूरी तैयारी है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका मध्य पूर्व में तैनात अपने 50,000 से अधिक सैनिकों की उपस्थिति को चरणबद्ध तरीके से कम करने और उन्हें वापस बुलाने की योजना पर भी विचार कर रहा है।
कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी
हालांकि तनाव बढ़ने के बावजूद कई देश इस कोशिश में लगे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार का समझौता हो सके। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक कूटनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य न केवल क्षेत्रीय शांति बनाए रखना है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को किसी बड़े संकट से बचाना भी है।
इजरायल और अमेरिका की संयुक्त रणनीति
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिकी और इजरायली अधिकारी अगले सप्ताह ईरान पर संभावित नए हमलों की योजना पर चर्चा कर सकते हैं। मध्य पूर्व के दो अधिकारियों के अनुसार, यह तैयारी युद्धविराम के बाद की सबसे बड़ी सैन्य गतिविधि मानी जा रही है।
यह संकेत देता है कि क्षेत्र में स्थिति तेजी से अस्थिर हो सकती है, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ रही है।
वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिससे वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक ओर कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की संभावनाएं भी मजबूत होती दिख रही हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आने वाला निर्णय न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की स्थिरता पर भी गहरा असर डालेगा।
