MP Politics: Scindia बनाम केपी यादव विवाद पर बढ़ा सियासी तनाव,
गुना-शिवपुरी में भाजपा के भीतर खींचतान तेज
भोपाल। MP की राजनीति में एक बार फिर गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र सुर्खियों में है, जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व सांसद डॉ. केपी यादव के बीच चल रही अंदरूनी सियासी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। मामला इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई बयानबाजी के बाद भारतीय जनता पार्टी संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
डॉ. केपी यादव को मध्यप्रदेश राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी ने विवाद को और बढ़ा दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब केपी यादव समर्थक और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कृष्णपाल यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि “कोई माने या न माने, दो साल तो केपी यादव मंत्री हैं। पहले भी दबदबा था और आगे भी रहेगा। ये इतिहास ही लिखते हैं, जैसा 2019 में लिखा था।”
इस पोस्ट को भाजपा संगठन ने पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए गंभीरता से लिया। संगठन का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी से पार्टी की छवि प्रभावित होती है और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तीन दिन में जवाब तलब, संगठन सख्त
भाजपा जिला संगठन ने मामले पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित नेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला महामंत्री संतोष धाकड़ द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब देना होगा, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। संगठन का कहना है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।
सिंधिया समर्थकों का पलटवार भी सामने आया
इस पूरे विवाद में केवल एक पक्ष ही नहीं, बल्कि सिंधिया समर्थकों की ओर से भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। सिंधिया समर्थक नेता कृष्णा घाडगे ने एक पोस्ट में केपी यादव पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि “आज तो नहीं दिखे बालक बुद्धि नेता।”
इस टिप्पणी के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया। भाजपा संगठन ने इस पोस्ट को भी अनुशासनहीनता मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
भोपाल भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र यती ने कृष्णा घाडगे को भी नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।
संगठन ने संभाली कमान, अनुशासन पर जोर
भाजपा नेतृत्व अब इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी या गुटबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन का मानना है कि ऐसे विवादों से न केवल पार्टी की छवि खराब होती है, बल्कि कार्यकर्ताओं में गलत संदेश भी जाता है। इसी कारण दोनों खेमों से जुड़े नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
2019 चुनाव से जुड़ा है पूरा राजनीतिक समीकरण
यह पूरा विवाद 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जब भाजपा के डॉ. केपी यादव ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर राजनीतिक हलचल मचा दी थी।
इसके बाद जब सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा, तो राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। सिंधिया को उनकी पारंपरिक सीट गुना-शिवपुरी से चुनाव लड़ाने की तैयारी थी, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में डॉ. केपी यादव को संगठन ने ‘सम्मान’ स्वरूप मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाया।
अंदरूनी गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती
गुना-शिवपुरी क्षेत्र में लंबे समय से सिंधिया और केपी यादव समर्थकों के बीच राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है। दोनों गुटों के बीच शक्ति प्रदर्शन कई बार सार्वजनिक रूप से भी सामने आ चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है।
सोशल मीडिया बना नया राजनीतिक अखाड़ा
मध्यप्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया अब एक बड़ा मंच बन चुका है, जहां नेता और उनके समर्थक खुलकर अपनी बात रखते हैं। लेकिन यही मंच कई बार विवादों का कारण भी बन जाता है।
इस मामले में भी सोशल मीडिया पोस्ट ने ही विवाद को जन्म दिया, जिसने धीरे-धीरे संगठन तक हस्तक्षेप की स्थिति पैदा कर दी।
पार्टी की सख्त नजर, आगे हो सकती है कार्रवाई
भाजपा संगठन ने संकेत दिए हैं कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की गुटबाजी पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जाए।
निष्कर्ष
सिंधिया और केपी यादव समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह विवाद अब भाजपा संगठन के लिए चुनौती बन गया है। पार्टी ने समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तीन दिन के भीतर आने वाले जवाब के बाद संगठन क्या अगला कदम उठाता है।
