MP डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने लौटाया पायलट और फॉलो वाहन, सीमित काफिले में सादगी का संदेश
MP में सरकारी खर्च और पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर चल रही मुहिम के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य के डिप्टी CM, राजेंद्र शुक्ल ने अपने पायलट और फॉलो वाहन सहित अतिरिक्त सुरक्षा काफिले को वापस कर दिया है। उन्होंने इस संबंध में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आधिकारिक पत्र लिखकर यह सुविधा समाप्त करने का अनुरोध किया है।
डिप्टी CM का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी आह्वान और मुख्यमंत्री मोहन यादव की सादगीपूर्ण कार्यशैली के अनुरूप माना जा रहा है।
डिप्टी CM ने खुद छोड़ी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था
जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने अपने काफिले में शामिल पायलट वाहन और फॉलो वाहन को पूरी तरह से वापस करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने साथ चलने वाले अतिरिक्त पुलिस स्टाफ की भी आवश्यकता को समाप्त कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब वे अनावश्यक वाहनों और अतिरिक्त सुरक्षा के बिना ही सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उनका यह निर्णय सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और सादगी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CM मोहन यादव की पहल का असर
डिप्टी CM का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने काफिले को सीमित करने का निर्णय लिया था। भोपाल में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कम वाहनों के काफिले के साथ नजर आए थे।
मुख्यमंत्री के काफिले में सामान्यतः 13 वाहन शामिल रहते हैं, जो उनकी जेड प्लस सुरक्षा के तहत आवश्यक माने जाते हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने गैर-जरूरी पांच वाहनों को हटाकर अपने काफिले को केवल 8 वाहनों तक सीमित कर दिया है।
CM के इस फैसले के बाद राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी सादगी अपनाने का दबाव बढ़ गया था।
प्रधानमंत्री के आह्वान का असर
डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान के बाद देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशभर में गैर-जरूरी खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की बात कही थी।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल की बचत, सरकारी खर्च में कटौती और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया था। इसके बाद कई राज्यों में सरकारी स्तर पर इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
DGP को लिखा गया आधिकारिक पत्र
सूत्रों के अनुसार, डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उन्हें अब पायलट और फॉलो वाहन की आवश्यकता नहीं है। पत्र में उन्होंने इन सभी सुविधाओं को वापस लेने का अनुरोध किया है।
इस निर्णय के बाद पुलिस विभाग भी अपनी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करेगा और अतिरिक्त सुरक्षा संसाधनों को अन्य आवश्यक कार्यों में उपयोग किया जाएगा।
सादगी और बचत की दिशा में सरकार का रुख
मध्य प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से सरकारी खर्चों को कम करने और प्रशासनिक सादगी को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री और अब डिप्टी सीएम के फैसलों को इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि अनावश्यक वाहनों और संसाधनों की कमी से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी दक्षता बढ़ेगी।
जनता के बीच सकारात्मक संदेश
डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल के इस फैसले को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि उच्च पदों पर बैठे नेता भी सादगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में गंभीर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे फैसलों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए तो सरकारी खर्च में काफी कमी लाई जा सकती है।
मंत्रियों और अधिकारियों पर भी असर
मुख्यमंत्री और डिप्टी CM के इन फैसलों के बाद राज्य के अन्य मंत्रियों और निगम-मंडल अध्यक्षों पर भी दबाव बढ़ गया है कि वे अपने काफिले और सरकारी उपयोग को सीमित करें।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी तरह की समीक्षा की जा सकती है ताकि सरकारी संसाधनों का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल का पायलट और फॉलो वाहन वापस करने का फैसला सादगी और बचत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल के बाद यह निर्णय सरकार की नई कार्यशैली को दर्शाता है, जिसमें कम संसाधनों में बेहतर प्रशासन पर जोर दिया जा रहा है।
यह कदम न केवल ईंधन बचत की दिशा में अहम है, बल्कि यह जनता को भी सादगी और जिम्मेदारी का संदेश देता है।
