Gold-Silver महंगे: केंद्र सरकार ने बढ़ाई इम्पोर्ट ड्यूटी, आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर
Gold-Silver की कीमतों पर एक बार फिर बड़ा असर पड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) में बढ़ोतरी कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद लिया गया यह फैसला 13 मई 2026 से लागू हो गया है।
इस फैसले के तहत अब विदेशों से सोना-चांदी और प्लेटिनम आयात करना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गोल्ड पर ड्यूटी और सेस दोनों में भारी बढ़ोतरी
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही एडिशनल इम्पोर्ट ड्यूटी (AIDC) यानी सेस को भी 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस बढ़ोतरी के बाद सोने के आयात पर कुल टैक्स बोझ पहले की तुलना में काफी अधिक हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना मंगवाने की लागत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार में कीमतों पर दिखाई देगा।
जुलाई 2024 में घटाई गई थी ड्यूटी
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2024 के बजट में सोने पर लगने वाली कुल इम्पोर्ट ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था। उस समय BCD को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत और AIDC को 5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया गया था।
सरकार के उस फैसले के बाद सोने-चांदी के आयात में तेजी देखी गई थी। भारत में सोने की मांग बढ़ने के कारण आयात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। अब लगभग डेढ़ साल बाद एक बार फिर सरकार ने उल्टा कदम उठाते हुए ड्यूटी बढ़ा दी है।
किन चीजों पर लागू होगी नई दरें?
नई इम्पोर्ट ड्यूटी केवल सोने-चांदी के बड़े आयात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा काफी व्यापक रखा गया है।
सरकार के अनुसार यह बढ़ी हुई दरें निम्नलिखित पर लागू होंगी:
- गोल्ड और सिल्वर बिस्कुट
- ज्वेलरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले छोटे पुर्जे जैसे हुक, पिन और स्क्रू
- गोल्ड-सिल्वर रीसाइक्लिंग में निकलने वाला कचरा (scrap metal)
- प्लेटिनम और अन्य कीमती धातुएं
इससे ज्वेलरी उद्योग और रिफाइनिंग सेक्टर दोनों की लागत बढ़ने की संभावना है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री पर असर
इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सबसे बड़ा असर आभूषण उद्योग पर पड़ने की संभावना है। सुनारों और ज्वेलरी व्यापारियों को अब विदेशों से कच्चा सोना मंगवाने के लिए अधिक खर्च करना होगा।
लागत बढ़ने के कारण:
- Gold-Silver के गहने महंगे हो सकते हैं
- छोटे और मध्यम ज्वेलरी कारोबारियों पर दबाव बढ़ेगा
- शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन में मांग प्रभावित हो सकती है
- ग्राहकों की खरीद क्षमता पर असर पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें बढ़ने से सोने की मांग थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन भारत में सोने की सांस्कृतिक और निवेश संबंधी मांग के कारण यह पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
आम जनता पर सीधा असर
इस फैसले का सबसे सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सोना पहले से ही महंगा चल रहा है और अब इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद कीमतों में और इजाफा संभव है।
आम लोगों पर असर:
- गहनों की खरीद महंगी होगी
- निवेश के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ेगा
- छोटे बजट वाले परिवारों के लिए शादी की खरीदारी पर दबाव बढ़ेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता होने के बावजूद घरेलू टैक्स बढ़ने से भारत में सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है।
भारत क्यों बढ़ाता-घटाता है सोने पर टैक्स?
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। देश में हर साल भारी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है।
सरकार समय-समय पर:
- व्यापार घाटा नियंत्रित करने
- आयात को संतुलित रखने
- घरेलू रिफाइनिंग और उत्पादन को बढ़ावा देने
जैसे उद्देश्यों के तहत इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव करती रहती है।
2025 में रिकॉर्ड सोना आयात
आंकड़ों के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में लगभग 58 से 60 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया था, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है। पिछले बजट में ड्यूटी कम किए जाने के बाद आयात में तेजी आई थी।
अब सरकार के नए फैसले से उम्मीद की जा रही है कि आयात में कुछ कमी आ सकती है और घरेलू रिफाइनिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार का यह फैसला आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर आम जनता और ज्वेलरी बाजार पर पड़ेगा। Gold-Silver की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना के साथ ही बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग के बीच यह नई नीति किस तरह संतुलन बनाती है।
