भोपाल DIG Extortion Case: ग्वालियर में जबरन वसूली और धमकी के मामले में DIG समेत 4 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज
मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें गंभीर आरोपों के आधार पर न्यायालय के आदेश के बाद कार्रवाई की गई है। मामला Gwalior से जुड़ा हुआ है, जहां कथित तौर पर जबरन वसूली, धमकी और झूठे केस में फंसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में Rajesh Singh Chandel (तत्कालीन एसपी, ग्वालियर और वर्तमान में भोपाल ग्रामीण में DIG पदस्थ) समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट और डकैती का केस दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई ग्वालियर जिला न्यायालय के आदेश के बाद की गई है। एडीजे सुनील दंडोतिया ने सोमवार को दायर परिवाद को स्वीकार करते हुए संबंधित धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
2023-24 का है पूरा मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2023-24 का बताया जा रहा है, जो ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, सब-इंस्पेक्टर अजय सिंह सिकरवार और साइबर सेल के कॉन्स्टेबल संतोष वर्मा ने मिलकर कथित रूप से एक व्यक्ति से लाखों रुपये की वसूली की और उसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी।
परिवादी अनूप राणा के वकील अशोक प्रजापति के अनुसार, पीड़ित से पहले एक मामले में समझौता कराने के नाम पर 5.80 लाख रुपये लिए गए थे। इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को उसे थाने बुलाकर और 25 लाख रुपये की मांग की गई। आरोप है कि जब उसने पूरी रकम दी, तब भी पुलिसकर्मियों ने और पैसे की मांग जारी रखी।
धमकी और झूठे केस में फंसाने का आरोप
परिवादी का आरोप है कि पैसे न देने की स्थिति में उसे 18 जनवरी 2024 को एक ऐसे मामले में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया, जिसमें उसका नाम पहले से मौजूद नहीं था। आरोप यह भी है कि उसे साजिशकर्ता बताकर गलत तरीके से फंसाया गया और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया।
बाद में 8 फरवरी 2024 को अनूप राणा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। इसके बाद उसने इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती दी और विस्तृत परिवाद दायर किया।
CCTV फुटेज से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप
परिवाद में एक और गंभीर आरोप सामने आया है कि थाने के सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की गई। बताया गया है कि थाटीपुर थाने की हार्ड डिस्क से 3 जनवरी 2024 से पहले की रिकॉर्डिंग या तो डिलीट कर दी गई या फॉर्मेट कर दी गई, जिससे सबूत नष्ट हो सके।
यह भी दावा किया गया है कि इतनी बड़ी वसूली और घटनाक्रम तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी और मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। इसी आधार पर कोर्ट ने पूरे मामले में आपराधिक साजिश की धाराएं जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद केस दर्ज
ग्वालियर जिला न्यायालय में एडीजे सुनील दंडोतिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवाद स्वीकार किया और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ेगी।
इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला सीधे वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
इस केस में उच्च स्तर के अधिकारी का नाम आने से पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोपों में लूट, डकैती, धमकी, वसूली और सबूत मिटाने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, जो मामले को और संवेदनशील बना देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
आगे की जांच पर नजर
अब इस पूरे मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी। पुलिस और न्यायिक जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी स्तर पर शक्ति का दुरुपयोग किया गया था।
फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुए इस केस ने पूरे राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। मामले पर सभी की नजरें अब आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
