जावरा में संतों का भव्य आगमन 11 मई 2026 को होगा। कस्तुर पावन धाम लोकार्पण एवं भूमि पूजन समारोह हेतु जैन संतों, महासतियों और श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक संगम जावरा नगर में देखने को मिलेगा।
जावरा में संतों का भव्य आगमन
जावरा (निप्र) संतों का आगमन नगर में नई रोशनी के साथ जन-जन के लिए उत्साह लेकर आता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक अवसर जावरा नगर में देखने को मिलने जा रहा है। नगर में 17 मई रविवार को आयोजित होने वाले कस्तुर पावन धाम के लोकार्पण एवं भूमि पूजन समारोह को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण निर्मित हो चुका है।
ज्ञात रहे कि इस भव्य धार्मिक आयोजन के पूर्व 11 मई को जैन दिवाकरीय उपाध्याय श्री गौतम मुनि जी म सा एवं आगम ज्ञाता श्री वैभव मुनि जी म सा सागर वेयरहाउस से विहार करते हुए जावरा स्वाध्याय भवन पर पधारेंगे।इसी प्रकार प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म सा एवं उपप्रवर्तक श्री चंद्रेश मुनि जी म सा ढोढर से विहार करते हुए 11 मई को अरिहंत कोल्ड स्टोरेज पहुंचेंगे तथा 12 मई को जावरा नगर में मंगल प्रवेश करेंगे।
जावरा नगर की बेटी महासती डॉ. कुमुदलता जी म सा, डॉ. महाप्रज्ञा जी म सा, डॉ. पदमकिर्ती जी म सा एवं डॉ. राजकिर्ती जी म सा भी 11 मई को रोजाना से विहार करते हुए 12 मई को जावरा पधारेंगी।
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना, समाज एकता और संस्कृति संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। पूरे नगर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
कस्तुर पावन धाम लोकार्पण समारोह का महत्व
कस्तुर पावन धाम का लोकार्पण समारोह जावरा नगर के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह धाम आने वाले समय में धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
समाजजनों का मानना है कि संतों के चरण पड़ने से नगर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संतों का विहार केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, सद्भावना और संस्कारों का संदेश भी देता है।
17 मई को आयोजित होने वाला भूमि पूजन एवं लोकार्पण समारोह हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न होगा। आयोजन समिति द्वारा व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।
जैन संतों का नगर प्रवेश बना आकर्षण का केंद्र
जावरा में संतों का भव्य आगमन समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। नगर में संतों के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी गुरु संदीप रांका एवं जावरा सुभाष टुकडियां ने बताया कि गुरु भगवंतों के आगमन पर सभी श्रावक-श्राविकाओं से विहार में उपस्थित होकर सेवा, समर्पण एवं गुरुभक्ति का परिचय देने की अपील की गई है।उन्होंने कहा कि संतों के चरणों से नगर पवित्र होता है तथा समाज में आध्यात्मिक जागृति का वातावरण निर्मित होता है।
महासतियों के आगमन से बढ़ी श्रद्धा
जावरा नगर की बेटी महासती डॉ. कुमुदलता जी म सा, डॉ. महाप्रज्ञा जी म सा, डॉ. पदमकिर्ती जी म सा एवं डॉ. राजकिर्ती जी म सा का नगर आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
महासतियों का तप, त्याग एवं साधना समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके मंगल प्रवेश को लेकर महिलाओं एवं युवतियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
श्रद्धालुओं में दिखाई दे रहा उत्साह
नगर में संतों के आगमन को लेकर हर वर्ग में उत्साह का वातावरण है। समाजजन स्वागत द्वार, बैनर, धार्मिक ध्वज एवं विभिन्न व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में विहार में शामिल होकर गुरुभक्ति का परिचय देने की तैयारी कर रहे हैं।
आयोजन समिति ने की अधिकाधिक उपस्थिति की अपील
पूर्वाध्यक्ष द्वय दीपचंद डांगी, बसंतीलाल चपडोद, पारसमल बरडिया, सुशील चपडोद, पुखराजमल कोच्चटा के साथ कस्तुर पावन धाम के अध्यक्ष राकेश मेहता, सचिव सुजानमल कोच्चटा, नगर पालिका उपाध्यक्ष सुशील कोच्चटा सहित समाज के अनेक वरिष्ठजनों ने अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की है।
सभी प्रमुख समाजजनों के नाम
इस आयोजन में समाज के अनेक वरिष्ठजन एवं कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से —
श्रीपाल कोचट्टा, चन्द्रप्रकाश ओस्तवाल, पारस गादिया, अजीत रांका, सुरेश मेहता, शांतिलाल दुग्गड, आकाश जैन, विनोद लूनिया, दिलीप चत्तर, अभय सुराणा, प्रकाश बोथरा, बसंत बोथरा, राजमल खारीवाल, अभय चोपडा, अतुल मेहता, सुरेन्द्र मेहता, विशाल चत्तर, कनकमल चोरडिया, समरथमल ओस्तवाल, शांतिलाल डांगी, शेखर नाहर, रमेश जैन वकील सा, आयुष चोरडिया, सुजानमल औरा, अनिल दुग्गड, जतिन कोच्चटा, संजय भंडारी, फतेहलाल जैन, यश जैन, रुपेश दुग्गड, उज्जवल भंडारी, राहुल रांका, अशोक झामर, विजय नाहर, राकेश एम कोच्चटा, राकेश पी कोच्चटा, सुरेन्द्र कोच्चटा, पारसमल औरा, मनोज डांगी, नितिन कोलन, संदीप श्री माल, संदीप जैन, मनीष पोखरना, अंकुर जैन आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सभी समाजजनों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
समाज में आध्यात्मिक चेतना का संदेश
जावरा में संतों का भव्य आगमन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को एकसूत्र में बांधने वाला आध्यात्मिक पर्व बन गया है।संतों के प्रवचन, विहार और आशीर्वाद से समाज में संयम, संस्कार, सेवा और सद्भावना की भावना मजबूत होती है।यह आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं जैन धर्म की महान परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।
