Jabalpur बरगी क्रूज हादसा: बची पर्यटक अनामिका ने सुनाई दर्दनाक आपबीती, ड्राइवर-हेल्पर पर लगाए गंभीर आरोप
Jabalpur बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे की जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन जांच समिति के चारों सदस्यों की अनुपस्थिति में ही कार्रवाई आगे बढ़ने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित पर्यटकों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि जांच समिति के पूर्ण रूप से मौजूद न रहने को लेकर पारदर्शिता पर भी चर्चा तेज हो गई है।
कलेक्ट्रेट के मीटिंग हॉल में गुरुवार को हादसे से बचे सभी पर्यटकों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया। इस दौरान कलेक्टर और एसडीएम की मौजूदगी में एक-एक कर यात्रियों के बयान लिए गए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
पर्यटकों ने सुनाई हादसे की भयावह कहानी
Jabalpur हादसे में बची पर्यटक अनामिका सोनी ने मीडिया के सामने अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि हादसे के समय क्रूज पर मौजूद ड्राइवर और एक हेल्पर ने यात्रियों को बचाने की बजाय खुद पानी में छलांग लगा दी। इस घटना ने सभी यात्रियों को सदमे में डाल दिया।
अनामिका ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ क्रूज में सवार थीं और शुरुआत में ऊपरी डेक पर मौजूद थीं। मौसम बिगड़ने और तेज हवाएं चलने पर उन्हें नीचे आना पड़ा। नीचे आने के बाद उन्होंने कर्मचारियों से लाइफ जैकेट मांगी, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
उनके अनुसार, स्थिति बेहद तेजी से बिगड़ी और यात्रियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। इसी दौरान क्रूज असंतुलित होने लगा और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ड्राइवर-हेल्पर पर लापरवाही के आरोप
पर्यटकों के बयान में सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया है कि क्रूज स्टाफ ने यात्रियों की सुरक्षा की बजाय अपनी जान बचाना ज्यादा जरूरी समझा। अनामिका सहित अन्य यात्रियों ने बताया कि ड्राइवर और हेल्पर ने बिना किसी सहायता के खुद को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी, जिससे यात्रियों में डर और घबराहट और बढ़ गई।
कई यात्रियों ने यह भी कहा कि अगर समय पर लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई जाती और उचित मदद मिलती, तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
प्रशासन ने दर्ज किए बयान, लेकिन समिति की अनुपस्थिति पर सवाल
जांच प्रक्रिया के तहत प्रशासन ने सभी पीड़ित पर्यटकों के बयान दर्ज किए हैं। इस दौरान पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि भविष्य में जांच के दौरान इसका उपयोग किया जा सके।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जांच कमेटी के चारों सदस्य मौजूद नहीं थे, फिर भी बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस स्थिति ने जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
15 दिन की जांच अवधि में आधा समय बीता
जांच के लिए निर्धारित 15 दिन की समय सीमा में से लगभग 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच केवल बयान दर्ज करने तक ही सीमित दिखाई दे रही है। अभी तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई या तकनीकी जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।
इस धीमी गति से जांच प्रक्रिया को लेकर प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों में भी असंतोष देखा जा रहा है।
पर्यटकों में डर और आक्रोश
हादसे से प्रभावित पर्यटकों में अभी भी डर और आक्रोश दोनों मौजूद हैं। कई यात्रियों का कहना है कि यह घटना उनके जीवन की सबसे भयावह अनुभवों में से एक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरी जांच पारदर्शी तरीके से हो और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अनामिका सोनी ने कहा कि इस घटना ने उन्हें और उनके बच्चों को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी लापरवाही किसी भी पर्यटन स्थल पर दोबारा नहीं होनी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रूज संचालन में सुरक्षा मानकों का सही पालन किया जाता, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जांच को निष्पक्ष और तेज गति से पूरा किया जाए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
निष्कर्ष
Jabalpur बरगी क्रूज हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। जहां एक तरफ पर्यटक अभी भी उस भयावह अनुभव से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जांच प्रक्रिया की धीमी गति और सवालों से घिरी स्थिति प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।
