नूतन धर्मशाला “राजेंद्र भवन” का भव्य खनन मुहूर्त सम्पन्न
मेहता परिवार ने चांदी की गेती लगाकर किया निर्माण कार्य का शुभारंभ
Jhabua: स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय एवं दादावाड़ी के मध्य, जगमोहन दास मार्ग स्थित नूतन धर्मशाला राजेंद्र भवन का खनन मुहूर्त बुधवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह पावन अवसर पूज्य आचार्य भगवंत श्री सुयश सुरीश्वर जी महाराज साहेब एवं पूज्य साध्वी जी भगवंत श्री रत्नरेखा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा की पावन निश्रा में सम्पन्न हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन ज्योतिषविद विश्व भाई वोरा (अहमदाबाद) द्वारा प्रदत्त शुभ मुहूर्त में किया गया।
धार्मिक वातावरण में प्रारंभ हुआ संपूर्ण आयोजन
श्री संघ के रिंकु रुनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि नूतन धर्मशाला के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने हेतु बुधवार प्रातः 7 बजे से ही धार्मिक कार्यक्रमों की विधिवत शुरुआत की गई। वातावरण पूरी तरह मंत्रोच्चार, भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत इंदौर से पधारे विधिकारक श्री शैलेश जी शाह द्वारा कराई गई श्री स्नात्र पूजन से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। स्नात्र पूजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का विशेष वातावरण देखा गया।
इसके पश्चात उल्लास एवं उमंग जैन परिवार द्वारा नवग्रह पाटला पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूरे भाव और भक्ति के साथ भाग लिया। इसके बाद श्री संघ के तपस्वी श्रावक निखिल भंडारी, मनोज नाकोडा, रचित कटारिया, सुनील संघवी, दीपक मुथा, इंद्रसेन संघवी एवं अमित मेहता द्वारा दस दिगपाल पूजन सम्पन्न की गई।
अष्ट मंगल पाटला पूजन में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
इसके बाद श्री संघ के वरिष्ठ सदस्य यशवंत भंडारी, हस्तीमल संघवी, अशोक कोठारी, मधुकर शाह, राजेंद्र भंडारी, हेमेंद्र संघवी, निशान शाह, जयेश संघवी एवं प्रतीक मुथा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने अष्ट मंगल पाटला पूजन में भाग लेकर धार्मिक लाभ प्राप्त किया।
लगभग चार घंटे तक चले इस विस्तृत और विधिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा वातावरण मंत्रोच्चार और भक्तिमय ऊर्जा से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह और आनंद देखा गया।

मेहता परिवार द्वारा किया गया भूमि पूजन एवं खनन मुहूर्त
संपूर्ण विधि-विधान के उपरांत लाभार्थी श्रावकरत्न धर्मचंदजी ज्ञानचंदजी मेहता परिवार द्वारा भूमि का अष्ट द्रव्यों से विशेष पूजन किया गया। यह पूजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें भूमि की शुद्धि और शुभता का आह्वान किया जाता है।
इसके साथ ही भूमि के क्षेत्रपाल देवता की विधिवत पूजा कर उनकी स्थापना भी की गई, जिससे निर्माण कार्य की आध्यात्मिक आधारशिला और अधिक मजबूत बनी।
इसके पश्चात पूज्य आचार्य भगवंत एवं पूज्य साध्वी जी भगवंत द्वारा भूमि पर वाक्षेप कर आशीर्वाद प्रदान किया गया। यह क्षण अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
चांदी की गेती से हुआ निर्माण कार्य का शुभारंभ
कार्यक्रम का सबसे प्रमुख एवं ऐतिहासिक क्षण वह रहा जब लाभार्थी मेहता परिवार के धर्मचंद मेहता, संजय मेहता, संस्कार मेहता, राजेश मेहता एवं सार्थक मेहता द्वारा चांदी की गेती लगाकर नूतन धर्मशाला के निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया।
जैसे ही चांदी की गेती भूमि में स्थापित की गई, पूरा परिसर जयकारों और मंगल ध्वनियों से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस क्षण को अत्यंत सौभाग्यशाली और ऐतिहासिक बताया। यह अवसर मेहता परिवार के लिए भी अत्यंत गौरवपूर्ण रहा, जिन्होंने इस पुण्य कार्य में अपनी सहभागिता प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान भगवान की आरती रत्नदीप सकलेचा एवं अंकित कटारिया परिवार द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न की गई।
पूज्य आचार्य भगवंत का प्रेरणादायी प्रवचन
इस पावन अवसर पर पूज्य आचार्य भगवंत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म, तप और पुण्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि तप करना स्वयं में पुण्य का मार्ग है, तप की आराधना करवाना उससे भी अधिक लाभकारी है, लेकिन उससे भी श्रेष्ठ पुण्य का बंध तब होता है जब व्यक्ति शुभ कार्यों की अनुमोदना और प्रशंसा करता है।
आचार्य भगवंत ने कहा कि वर्तमान समय में अच्छे कार्यों की अनुमोदना करना अत्यंत कठिन हो गया है, फिर भी यही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में पुण्य के नौ प्रकार बताए गए हैं, जिन्हें नवदा भक्ति कहा जाता है। यदि व्यक्ति इन भावों के साथ कार्य करे तो जीवन में पुण्य का विशेष संचार होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि नूतन धर्मशाला “राजेंद्र भवन” आने वाले समय में नवदा भक्ति और पुण्य का एक महत्वपूर्ण सेतु बनेगा, जहां समाज के लोग धर्म, सेवा और संस्कारों से जुड़ सकेंगे।

कांबली अर्पण और समाज का भावपूर्ण सहयोग
कार्यक्रम के दौरान श्री संघ के सोहनलाल कोठारी, अशोक कटारिया, प्रकाश कटारिया, भारत बाबेल, अनिल राठौर, मुकेश लोढ़ा, नरेंद्र संघवी, अनिल रुनवाल, पारस गांधी, सुरेंद्र सकलेचा एवं मनोज मनोकामना सहित अनेक श्रद्धालुओं द्वारा पूज्य आचार्य भगवंत एवं पूज्य साध्वी जी भगवंत को बहुमानपूर्वक कांबली अर्पण की गई।
इस अवसर पर पूज्य श्री ने श्री संघ के कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की और सभी समाजजनों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए मांगलिक श्रवण करवाई। उन्होंने समाज को एकता, सेवा, संस्कार और धर्म के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी।
केसरिया मोदक प्रभावना के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच केसरिया मोदक की प्रभावना वितरित की गई, जिससे पूरे वातावरण में प्रसन्नता और भक्ति का भाव और अधिक गहरा हो गया।
संपूर्ण आयोजन के दौरान झाबुआ का यह धार्मिक स्थल भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना रहा। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अत्यंत पुण्यदायी और ऐतिहासिक बताया।

निष्कर्ष
नूतन धर्मशाला “राजेंद्र भवन” का यह खनन मुहूर्त केवल एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन गया है। आने वाले समय में यह धर्मशाला समाज के लिए सेवा, साधना, संस्कार और सत्कार्यों का एक महत्वपूर्ण केंद्र सिद्ध होगी।
