MPPSC Mains 2025: क्या जून में होगी मुख्य परीक्षा?
इंदौर |
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 को लेकर अभ्यर्थियों का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। यह परीक्षा पिछले साल जून 2025 में प्रस्तावित थी, लेकिन अब मई 2026 तक भी इसका आयोजन नहीं हो सका है। लगातार हो रही देरी और कानूनी अड़चनों के कारण हजारों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक परीक्षाओं में से एक MPPSC परीक्षा का यह चरण करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है, लेकिन फिलहाल यह पूरा मामला न्यायालय की प्रक्रिया में फंसा हुआ है।
प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम पहले ही घोषित
MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2025 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम मार्च 2025 में जारी किया गया था। इस परिणाम में लगभग 4700 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया गया था।
प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों में उत्साह था कि जल्द ही मेंस परीक्षा आयोजित होगी, लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति उलझती चली गई।
आज स्थिति यह है कि चयनित अभ्यर्थी महीनों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तारीख घोषित नहीं हो पा रही है।
158 पदों पर भर्ती प्रक्रिया अटकी
यह पूरी भर्ती प्रक्रिया लगभग 158 पदों के लिए संचालित की जा रही है। इन पदों में प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, वित्त सेवा और अन्य महत्वपूर्ण विभागों के पद शामिल हैं।
लेकिन मुख्य परीक्षा न हो पाने के कारण यह पूरी चयन प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी हुई है। इसका सीधा असर राज्य प्रशासनिक ढांचे में नए अधिकारियों की नियुक्ति पर भी पड़ रहा है।
कानूनी विवाद की वजह से रुकी परीक्षा
इस पूरी समस्या की जड़ एक कानूनी विवाद है, जो जबलपुर उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें परीक्षा नियम 2015 को चुनौती दी गई है। इस मामले के चलते आयोग ने मुख्य परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की है।
परीक्षा नियम 2015 बना विवाद का केंद्र
विवाद का मुख्य कारण MPPSC परीक्षा नियम 2015 है।
इस नियम के अनुसार:
- यदि किसी उम्मीदवार ने आरक्षण या आयु में छूट का लाभ लिया है
- और वह सामान्य श्रेणी के कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है
- तब भी उसे अनारक्षित (General) श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा
उसे केवल उसकी मूल आरक्षित श्रेणी में ही माना जाएगा।
इसी नियम को लेकर कई अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है और इसे न्यायालय में चुनौती दी गई है।
याचिकाओं का असर और कोर्ट में मामला
इस मुद्दे पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि यह नियम समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है।
वहीं आयोग का पक्ष है कि नियम पहले से लागू है और भर्ती प्रक्रिया उसी के अनुसार की जा रही है।
जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक मुख्य परीक्षा पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है।
MPPSC का आधिकारिक पक्ष
आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
- वह लगातार न्यायालय में अपना पक्ष रख रहा है
- परीक्षा की नई तारीख कोर्ट के आदेश के बाद ही तय की जाएगी
- अन्य भर्ती प्रक्रियाएं सामान्य रूप से जारी हैं
आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचा जा रहा है ताकि भविष्य में कानूनी विवाद और न बढ़ें।
अन्य परीक्षाएं जारी, लेकिन मेंस रुकी
जहां एक ओर राज्य सेवा मुख्य परीक्षा रुकी हुई है, वहीं MPPSC अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।
- प्राचार्य तकनीकी शिक्षा परीक्षा संपन्न हो चुकी है
- सहायक प्राध्यापक 2024 के इंटरव्यू चल रहे हैं
- फूड सेफ्टी ऑफिसर और अन्य परिणाम भी जल्द जारी होने की संभावना है
इससे यह साफ है कि आयोग पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है, लेकिन सबसे अहम परीक्षा फिलहाल अटकी हुई है।
हजारों उम्मीदवारों पर असर
मुख्य परीक्षा में चयनित करीब 4700 अभ्यर्थी लगातार इंतजार कर रहे हैं।
इस देरी का सबसे बड़ा प्रभाव:
- तैयारी की रणनीति पर
- मानसिक तनाव पर
- करियर प्लानिंग पर
- उम्र सीमा (age factor) पर
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता से उनकी तैयारी का संतुलन बिगड़ रहा है।
आर्थिक और मानसिक दबाव
लंबे समय तक परीक्षा न होने का असर केवल तैयारी तक सीमित नहीं है।
कई उम्मीदवार कोचिंग, हॉस्टल और रहने-खाने के खर्च को लेकर भी दबाव में हैं। वहीं मानसिक रूप से अनिश्चितता का असर बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में समय पर आयोजन बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी सीधे उम्मीदवारों के प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
क्या जून 2026 में हो पाएगी परीक्षा?
अभ्यर्थियों में यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि क्या MPPSC Mains परीक्षा जून 2026 में हो सकती है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए:
- मामला कोर्ट में लंबित है
- कोई अंतिम आदेश नहीं आया है
- आयोग तारीख घोषित करने की स्थिति में नहीं है
इसलिए संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी का असर केवल उम्मीदवारों पर ही नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
नए अधिकारियों की नियुक्ति में देरी से कई विभागों में कार्यभार संतुलन प्रभावित हो सकता है।
उम्मीदवारों की मांग
अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि:
- कोर्ट जल्द फैसला दे
- आयोग परीक्षा की नई तारीख स्पष्ट करे
- भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है।
निष्कर्ष
MPPSC Mains 2025 परीक्षा इस समय कानूनी विवादों के कारण पूरी तरह अटकी हुई है। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।
पूरा मामला अब जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में बना रहेगा।
उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले पर स्पष्टता आएगी और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, ताकि उम्मीदवारों को उनका उचित अवसर मिल सके।

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