बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन 5 से 9 मई तक, जानिए 1021 वर्ष प्राचीन आदिनाथ प्रभु की दिव्यता, इतिहास और कार्यक्रम की पूरी जानकारी।
बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026
बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 बड़ावदा नगरी में भक्ति, श्रद्धा और धर्म आराधना का एक अनुपम और ऐतिहासिक संगम बनने जा रहा है। 1021 वर्ष प्राचीन श्री आदिनाथ प्रभु के दिव्य बिंबों की प्रतिष्ठा के साथ यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।आज 5 मई से प्रारंभ होकर 9 मई तक चलने वाला यह महोत्सव जैन समाज के लिए गौरव और उत्साह का केंद्र बना हुआ है।
महोत्सव का परिचय
बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 का आयोजन जैन त्रिस्तुतिक समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस आयोजन के अंतर्गत जीर्णोद्धारित एवं नवनिर्मित शिखरबद्ध जिनालय में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ प्रभु सहित अन्य जिनबिंबों एवं गुरु बिंबों की प्रतिष्ठा की जाएगी।यह आयोजन श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ, बड़ावदा के सान्निध्य में आयोजित हो रहा है।
ऐतिहासिक महत्व और 1021 वर्ष पुरानी प्रतिमा
इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता है भगवान श्री आदिनाथ प्रभु की 1021 वर्ष प्राचीन प्रतिमा।प्रतिमा पर अंकित संवत् 1062 की अंजनशलाका इस बात का प्रमाण है कि यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन और दिव्य है।बताया जाता है कि यह प्रतिमा मंदिर परिसर के एक प्राचीन कुएं से प्राप्त हुई थी, जो इसे और अधिक चमत्कारिक एवं श्रद्धा का केंद्र बनाती है।
आयोजन की प्रमुख तिथियां
- 📍 5 मई 2026 – महोत्सव का शुभारंभ
- 📍 8 मई 2026 (शुक्रवार) – मुख्य प्रतिष्ठा दिवस
- 📍 9 मई 2026 – द्वार उद्घाटन समारोह
आचार्य एवं साधु-साध्वी मंडल का सान्निध्य
यह आयोजन पुण्यसम्राट युगप्रभावक श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. के मंगलमयी सान्निध्य में संपन्न होगा।साथ ही साधु-साध्वी मंडल की पावन निश्रा इस आयोजन को और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेगी।
मंदिर का इतिहास और जीर्णोद्धार
बड़ावदा स्थित श्री आदिनाथ जिन मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है।लगभग 200 वर्षों से अधिक पुराने इस मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया गया है।पूज्य आचार्य श्री राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराजा एवं श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के आशीर्वाद से मंदिर का विकास निरंतर होता रहा है।
छाजेड़ परिवार का विशेष योगदान
साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी म.सा. की प्रेरणा से छाजेड़ परिवार, पारा-झाबुआ (मध्यप्रदेश) ने इस भव्य जिनालय के निर्माण का संकल्प लिया।संघवी श्रीमती वालीबाई सागरमलजी छाजेड़ परिवार द्वारा इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
प्रमुख कार्यक्रम और लोकार्पण
आज 5 मई को निम्न प्रमुख कार्यक्रम आयोजित होंगे:
- श्री महावीर मंगल भवन का लोकार्पण
- श्री राजजयंत आराधना भवन का उद्घाटन
- आचार्य श्री एवं साधु-साध्वी मंडल का मंगल प्रवेश
श्रीसंघ का भावपूर्ण आमंत्रण
श्रीसंघ बड़ावदा की शुभाज्ञा से समस्त भारतवर्ष के जैन समाज को इस आयोजन में आमंत्रित किया गया है।स्व. समरथमलजी-लीलाबाई सकलेचा परिवार द्वारा भी समाजजनों को स्नेह निमंत्रण प्रेषित किया गया है।
धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक संदेश
बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, और धर्म की ओर लौटने का संदेश देता है।यह महोत्सव हमें सिखाता है कि—
- श्रद्धा से जीवन में शांति आती है
- धर्म से आत्मा का उत्थान होता है
- समाज में एकता और सद्भाव बढ़ता है
निष्कर्ष
बड़ावदा आदिनाथ पंचाह्निका प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन है जो न केवल जैन समाज बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।1021 वर्ष प्राचीन प्रतिमा की प्रतिष्ठा, आचार्यों का सान्निध्य, और समाज की सहभागिता इस महोत्सव को अविस्मरणीय बना रही है।यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, संस्कृति और आस्था का जीवंत उदाहरण बनेगा।
