Bhopal के जेके अस्पताल में दर्दनाक हादसा: निर्माणाधीन लिफ्ट शाफ्ट में गिरने से मरीज की मौत
मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के कोलार क्षेत्र स्थित जेके अस्पताल में एक दर्दनाक और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती एक मरीज की निर्माणाधीन लिफ्ट शाफ्ट में गिरने से मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पाइन मरीज की इलाज के दौरान मौत
मृतक की पहचान नामदेव रामजी के रूप में हुई है, जो सर्वाइकल स्पाइन की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें इलाज के लिए 14 अप्रैल को जेके अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 24 अप्रैल को उनका स्पाइन ऑपरेशन भी किया गया था और वे चौथी मंजिल पर भर्ती थे।
मरीज पहले से ही पैरालिसिस की समस्या से भी पीड़ित थे, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बनी हुई थी।
निर्माणाधीन लिफ्ट शाफ्ट बना हादसे की वजह
शनिवार शाम करीब चार बजे मरीज अस्पताल के चौथी मंजिल पर मौजूद निर्माणाधीन लिफ्ट क्षेत्र के पास पहुंच गए। बताया जा रहा है कि वहां लिफ्ट का निर्माण कार्य चल रहा था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।
इसी दौरान वे अनजाने में लिफ्ट शाफ्ट में गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सुरक्षा इंतजामों की कमी पर सवाल
स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि निर्माणाधीन क्षेत्र को ठीक से बंद नहीं किया गया था। वहां केवल अस्थायी और संकरी रास्ते बने हुए थे, जिनका उपयोग मजदूर करते थे।
सबसे बड़ी लापरवाही यह बताई जा रही है कि मरीज आसानी से उस खतरनाक क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां कोई सुरक्षा बैरिकेड या चेतावनी संकेत पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं थे।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शनिवार को डॉक्टर मरीज को देखने नहीं आए थे और दर्द की दवाइयां भी बंद कर दी गई थीं।
परिजनों के अनुसार, इसी वजह से मरीज की हालत बिगड़ी और वे मानसिक रूप से परेशान होकर वार्ड से बाहर निकल गए।
परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
निर्माण स्थल पर नहीं थे सीसीटीवी कैमरे
Bhopal पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माणाधीन लिफ्ट क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। इससे घटना की स्पष्ट रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो सकी है।
पुलिस अधिकारी एसआई कमल सिंह के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि यह दुर्घटना थी या किसी अन्य कारण से मरीज वहां पहुंचे थे। इसलिए पुलिस मामले की जांच दोनों पहलुओं—दुर्घटना और अन्य संभावनाओं—से कर रही है।
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मरीज, जो पहले से गंभीर हालत में था, उसका निर्माणाधीन क्षेत्र तक पहुंच जाना अस्पताल प्रबंधन की बड़ी चूक मानी जा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा बैरिकेड और निगरानी सही तरीके से की गई होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
इलाज के दौरान बिगड़ी स्थिति
मरीज नामदेव रामजी मूल रूप से छिंदवाड़ा जिले के रहने वाले थे और पेशे से सैलून चलाते थे। स्पाइन समस्या के कारण उन्हें इलाज के लिए भोपाल लाया गया था।
ऑपरेशन के बाद भी उनकी हालत पूरी तरह स्थिर नहीं थी और वे चौथी मंजिल पर भर्ती थे। बताया जा रहा है कि उनकी हालत में सुधार की प्रक्रिया चल रही थी।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन, निर्माण कार्य और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जांच की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह पूरी तरह दुर्घटना थी या किसी अन्य कारण की भूमिका भी इसमें रही।
निष्कर्ष
Bhopal के जेके अस्पताल में हुआ यह हादसा न केवल एक मरीज की दुखद मौत है, बल्कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी को भी उजागर करता है। निर्माण कार्य वाले क्षेत्रों में उचित सुरक्षा उपायों की कमी ने इस दर्दनाक घटना को जन्म दिया। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
