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NHAI ने जारी की हीटवेव गाइडलाइन: दोपहर 12 से 4 बजे तक हाईवे निर्माण कार्यों पर रोक, मजदूरों की सुरक्षा को मिली प्राथमिकता

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Published On: 30 April 2026
NHAI

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देशभर में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन के साथ-साथ निर्माण कार्यों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासकर सड़क निर्माण और हाईवे प्रोजेक्ट्स में लगे मजदूरों को लू, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इसी स्थिति को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लेते हुए नई हीटवेव गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

भीषण गर्मी को देखते हुए बड़ा फैसला

भारत के कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। गर्म हवाओं और लू के कारण मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है क्योंकि वे खुले में भारी शारीरिक श्रम करते हैं।

NHAI ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया है कि दिन के सबसे गर्म समय में किसी भी प्रकार के भारी निर्माण कार्यों को रोक दिया जाएगा। यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक काम पूरी तरह बंद

नई गाइडलाइन के अनुसार अब हाईवे निर्माण स्थलों पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सभी भारी शारीरिक श्रम वाले कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे।

इस अवधि में किसी भी तरह का डामर बिछाने, सड़क निर्माण, वेल्डिंग, मशीनों से खुदाई या भारी उपकरणों का संचालन नहीं किया जाएगा।

इस निर्णय का उद्देश्य उस समय को टालना है जब तापमान अपने चरम पर होता है और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक होता है।

सुबह और शाम की शिफ्ट में काम का नया मॉडल

NHAI ने निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों को निर्देश दिया है कि अब कार्यों की योजना इस तरह बनाई जाए कि अधिकतर काम सुबह जल्दी या शाम के समय में किया जाए।

सुबह के ठंडे वातावरण और शाम के अपेक्षाकृत कम तापमान में काम करने से न केवल मजदूर सुरक्षित रहेंगे, बल्कि उत्पादकता भी प्रभावित नहीं होगी।

इस बदलाव को लंबे समय के लिए एक सुरक्षित कार्य मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

हर घंटे कूलिंग ब्रेक अनिवार्य

गाइडलाइन में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक यह है कि यदि किसी परिस्थिति में काम जारी भी रहता है, तो हर घंटे मजदूरों को अनिवार्य रूप से कूलिंग ब्रेक दिया जाएगा।

इस दौरान उन्हें छायादार स्थान पर आराम, पीने के लिए स्वच्छ पानी और ओआरएस उपलब्ध कराया जाएगा।

यह कदम शरीर में पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।

नए मजदूरों के लिए विशेष प्रावधान

नई गाइडलाइन में उन मजदूरों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं जो हाल ही में काम पर जुड़े हैं।

ऐसे श्रमिकों को शुरुआती 3 से 5 दिनों तक केवल हल्का कार्य दिया जाएगा ताकि उनका शरीर मौसम के अनुसार ढल सके।

यह नियम विशेष रूप से उन मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण है जो पहले अत्यधिक गर्म वातावरण में काम करने के आदी नहीं होते।

लू से बचाव के लिए सख्त निर्देश

NHAI ने स्पष्ट किया है कि लू चलने की स्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सभी साइट इंजीनियरों और ठेकेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि मजदूरों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाए और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही प्राथमिक चिकित्सा किट और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं हर साइट पर अनिवार्य रूप से मौजूद हों।

टोल प्लाजा और मशीनरी संचालन पर असर

यह गाइडलाइन केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि टोल प्लाजा और भारी मशीनरी संचालन पर भी लागू होगी।

टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी गर्मी से राहत देने के लिए रोटेशन सिस्टम लागू किया जाएगा ताकि वे लगातार लंबे समय तक गर्मी में काम न करें।

छायादार विश्राम स्थल और पेयजल व्यवस्था अनिवार्य

NHAI ने सभी परियोजना स्थलों पर छायादार विश्राम स्थल बनाने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा शुद्ध पेयजल, ओआरएस पैकेट और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है।

यह कदम मजदूरों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करेगा।

मजदूर संगठनों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

इस फैसले का श्रमिक संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस तरह की गाइडलाइन की जरूरत थी क्योंकि गर्मी में काम करना बेहद जोखिम भरा होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इसे सकारात्मक कदम बताया है और कहा है कि यह हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों को कम करेगा।

निर्माण कंपनियों के लिए नई चुनौती

हालांकि यह निर्णय मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन निर्माण कंपनियों के लिए यह एक नई चुनौती भी है।

काम के घंटे सीमित होने से परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है, लेकिन NHAI ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

लंबी अवधि में लाभकारी निर्णय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति लंबे समय में बेहद लाभकारी साबित होगी।

मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से न केवल कार्यस्थल दुर्घटनाएं कम होंगी, बल्कि कार्यक्षमता और गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

निष्कर्ष

NHAI द्वारा जारी यह नई हीटवेव गाइडलाइन भारत में निर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील सुधार माना जा रहा है।

भीषण गर्मी के इस दौर में मजदूरों की जान और स्वास्थ्य की रक्षा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

दोपहर के समय काम रोकने, कूलिंग ब्रेक अनिवार्य करने और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने जैसे कदम न केवल तत्काल राहत देंगे बल्कि भविष्य में एक सुरक्षित और मानवीय कार्य संस्कृति की नींव भी रखेंगे।

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि विकास की दौड़ में मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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