राजेश जैन दद्दू, इंदौर
तीर्थ संरक्षिणी महासभा के द्वारा इंदौर सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष में Jain धरोहर दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर विगत 2–3 दिनों से इंदौर शहर के विभिन्न मंदिरों में यह कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। जैन समाज की आस्था, परंपरा और धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से यह आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जा रहा है।
श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का ससंघ सान्निध्य
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि इसी तारतम्य में मंगलवार को महासभा के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारी श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज, श्रुत प्रिय अप्रमित सागर जी, सहजानंदी सहज सागर जी महाराज एवं छुल्लक श्री श्रेयस सागर महाराज ससंघ के चरणों में उपस्थित हुए।
इस अवसर पर पदाधिकारियों द्वारा श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। मुनि श्री ने महासभा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
निर्ग्रन्थ सेंटर ऑफ आर्कियोलॉजी की भूमिका और जानकारी
उक्त जानकारी देते हुए निर्ग्रन्थ सेंटर ऑफ आर्कियोलॉजी इंदौर के पुरातत्व संयोजक ओम पाटोदी ने बताया कि प्रातः महासभा के पदाधिकारी श्री चंद्रप्रभु मांगलिक भवन, अंजनी नगर पहुंचे और मुनि श्री से विस्तृत चर्चा की।
इसके पश्चात मुनि श्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। प्रवचन के प्रारंभ में महासभा के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया, जिससे कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
Jain धरोहर दिवस की महत्ता पर प्रकाश
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री टी.के. वैद ने मुनि श्री के प्रवचन से पूर्व महासभा की संक्षिप्त जानकारी दी और जैन धरोहर दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिवस जैन संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं जागरूकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस आयोजन का उद्देश्य समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना और आने वाली पीढ़ी को जैन धरोहरों के महत्व से अवगत कराना है।
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का प्रेरक प्रवचन
मुनि श्री ने अपने प्रवचन के दौरान जीवन के गूढ़ सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में आनंद मन की शांति से आता है। उन्होंने समझाया कि मन की शांति के लिए स्थान परिवर्तन अथवा माहौल परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि केवल मनोभावों को परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि जब मन के विचार सकारात्मक हो जाते हैं, तब व्यक्ति जहां है और जैसा है, वहीं से उसके जीवन में आनंद की अनुभूति होने लगती है। जीवन में सुख बाहर नहीं, बल्कि भीतर की स्थिति में छिपा होता है।
ईर्ष्या से बचाव और सामाजिक एकता का संदेश
मुनि श्री ने आगे कहा कि नीतिकारों के अनुसार किसी भी संघ, संस्था, समाज, समुदाय अथवा परिवार के टूटने और बिखरने में ईर्ष्या की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने समझाया कि यदि हम अपने जीवन, परिवार और समाज को टूटने से बचाना चाहते हैं तो हमें ईर्ष्या को अपने जीवन से दूर रखना होगा। ईर्ष्या न केवल संबंधों को कमजोर करती है, बल्कि समाज की एकता को भी प्रभावित करती है।
उन्होंने सभी को प्रेरित किया कि हम सहयोग, प्रेम और समर्पण की भावना को अपनाएं, जिससे समाज मजबूत और संगठित बना रहे।
श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया आशीर्वाद
कार्यक्रम में देश-प्रदेश से आए अनेक समाजजनों ने मुनि श्री के दर्शन किए और श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं में इस अवसर को लेकर विशेष उत्साह और भक्ति भाव देखने को मिला।
मुनि श्री के सान्निध्य में उपस्थित सभी भक्तों ने उनके प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके बताए गए जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
गोकुल नगर मंदिर में विशेष कार्यक्रम
जैन धरोहर दिवस के अंतर्गत महासभा के पदाधिकारी श्री दिगम्बर जैन मंदिर, गोकुल नगर भी पहुंचे। वहां उन्होंने समाजजनों को जैन धरोहर दिवस के महत्व और उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
मंदिर कार्यक्रम का संयोजन मंदिर ट्रस्ट के नीरज जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर समाजजनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता दिखाई।
कार्यक्रम में प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति
इस अवसर पर अनेक प्रमुख पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सेठी, कैलाश लुहाड़िया, तल्लिन बड़जात्या, राकेश पाटनी एवं निर्ग्रन्थ सेंटर ऑफ आर्कियोलॉजी के पुरातत्व संयोजक ओम पाटोदी शामिल थे।
इसके अलावा इंदौर संभाग प्रभारी पवन पाटोदी, सह संयोजक मंयक जैन, संतोष जैन, प्रदीप बिलाला एवं अन्य सदस्यगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
समापन एवं संदेश
जैन धरोहर दिवस के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम जैन समाज की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के प्रवचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन में शांति, संयम और सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जीवन में आनंद बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और सकारात्मक भावनाओं में निहित है। साथ ही समाज में एकता बनाए रखने के लिए ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भावों से दूर रहना आवश्यक है।
यह आयोजन जैन समाज के लिए एक प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव साबित हुआ, जिसने सभी को अपने मूल्यों और परंपराओं के प्रति और अधिक जागरूक किया।
