गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत भव्य रैली और ज्ञापन सौंपा गया
Indore में 27 अप्रैल 2026 को गो सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत एक भव्य और व्यापक जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गोमाता के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता दिलाना रहा। इस अवसर पर संतों, गौसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों द्वारा संयुक्त रूप से एक विशाल रैली निकाली गई तथा देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन एसडीएम श्री अजय भूषण शुक्ला के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया।
गो सम्मान आह्वान अभियान का उद्देश्य
गो सम्मान आह्वान अभियान का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति में गोमाता के महत्व को पुनः स्थापित करना और उसके संरक्षण के लिए ठोस एवं प्रभावी कानूनों की मांग करना है। अभियान से जुड़े संतों और गौसेवकों का मानना है कि गोमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।
इस अभियान के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जा रहा है कि गोसंरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
इस अवसर पर सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- देशभर में गोमाता के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ठोस और प्रभावी कानून बनाया जाए
- गौहत्या पर पूर्ण और सख्त प्रतिबंध लगाया जाए
- गौशालाओं के सुदृढ़ संचालन हेतु पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए
- गोसंवर्धन एवं गौपालन के लिए विशेष राष्ट्रीय योजनाएं लागू की जाएं
- किसानों को गौ आधारित प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए
संतों ने कहा कि इन मांगों का उद्देश्य केवल गोमाता की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि देश की कृषि प्रणाली को अधिक टिकाऊ और प्राकृतिक बनाना भी है।

गोमाता का सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
संतों एवं गौसेवकों ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गोमाता का स्थान अत्यंत पूजनीय है। प्राचीन काल से ही गाय को समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन का आधार माना गया है।
उन्होंने कहा कि गोमाता केवल धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह कृषि व्यवस्था की आत्मा है। गोबर और गोमूत्र आधारित कृषि से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
इसके साथ ही गोमाता पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
संतों और गौसेवकों का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने सरकार से आग्रह किया कि गोसंवर्धन को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि देश में गोमाता का संरक्षण मजबूत होता है तो कृषि, पर्यावरण और स्वास्थ्य तीनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार संभव है।
संतों ने यह भी कहा कि समाज को भी आगे आकर गौसेवा और गोसंरक्षण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने जनजागरण अभियान को और अधिक व्यापक बनाने का आह्वान किया।
विशाल रैली का आयोजन
इस अवसर पर धोबी घाट से एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जो कलेक्ट्रेट तक पहुंची। रैली में हजारों की संख्या में संत, माताएं, बहनें, गौसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए।
रैली का दृश्य अत्यंत भव्य और आकर्षक था। इसमें साफा पहने हुए नंदी, सजाए गए गाड़ी बैल, प्रतीकात्मक हाथी, संत मंडल और बड़ी संख्या में लोग हाथों में झंडे और बैनर लेकर चल रहे थे।
रैली के दौरान “गोमाता की जय”, “गोसंरक्षण हमारा धर्म है” और “गौहत्या बंद करो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
जनभागीदारी और उत्साह
रैली में महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने भी इस अभियान में सक्रिय भाग लिया और गोमाता के संरक्षण के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।
सभी प्रतिभागियों में उत्साह और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। लोगों ने इसे केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण के रूप में देखा।

एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया
रैली के समापन पर सभी प्रतिनिधिमंडल एसडीएम श्री अजय भूषण शुक्ला के पास पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन को आगे देश के सर्वोच्च पदाधिकारियों तक पहुंचाने का आग्रह किया गया।
एसडीएम द्वारा ज्ञापन स्वीकार किया गया और इसे उचित माध्यम से अग्रेषित करने का आश्वासन दिया गया।
प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि पर जोर
अभियान में शामिल वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए गो आधारित कृषि प्रणाली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि गोमूत्र और गोबर आधारित जैविक उत्पाद न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकते हैं।
आंदोलन को और व्यापक बनाने का संकल्प
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक निरंतर चलने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस अभियान को और अधिक गांवों, कस्बों और शहरों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प लिया ताकि गोसंरक्षण का संदेश हर घर तक पहुंच सके।
सामाजिक और धार्मिक एकता का संदेश
इस पूरे आयोजन में सामाजिक और धार्मिक एकता का भी संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला। विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ आकर गोमाता के संरक्षण के लिए एक मंच पर एकत्र हुए।
इससे यह संदेश गया कि गोसंरक्षण केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा हुआ व्यापक मुद्दा है।
निष्कर्ष
इंदौर में आयोजित गो सम्मान आह्वान अभियान का यह कार्यक्रम केवल एक ज्ञापन या रैली तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
संतों, गौसेवकों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से की गई मांगें यदि स्वीकार की जाती हैं तो यह निश्चित रूप से देश में गोसंरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
