Javra में जीवदया पर भव्य सामाजिक-धार्मिक आयोजन
Javra (निप्र)। जीवदया को जैन धर्म और भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में देखा जाता है। सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा, दया और सेवा भाव को ही जीवदया कहा गया है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है जो मनुष्य को अहिंसा, परोपकार और आत्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।
इसी भावना को साकार रूप देते हुए जावरा में जैन सोश्यल ग्रुप इंटरनेशनल फेडरेशन नेचरोथेरेपी कमेटी के तत्वावधान में एक भव्य जीवदया एवं गौसेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सेवा, समर्पण और करुणा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जीवदया का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
जीवदया का अर्थ केवल पशु-पक्षियों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक जीव के प्रति संवेदनशीलता और करुणा रखने का संदेश देती है। जैन धर्म में इसे “अहिंसा परमो धर्मः” के सिद्धांत से जोड़ा गया है, जो बताता है कि किसी भी जीव को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है।
इस सिद्धांत के अनुसार, भूखे को भोजन देना, प्यासे को पानी पिलाना और असहाय पशु-पक्षियों की सेवा करना ही सच्चा धर्म है। जीवदया मनुष्य के भीतर दया, सहानुभूति और करुणा जैसे गुणों का विकास करती है, जिससे समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बनता है।
जीवदया से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवदया का पालन करने वाला व्यक्ति न केवल इस जीवन में बल्कि परलोक में भी पुण्य का भागी बनता है। यह कार्य आत्मा की शुद्धि का माध्यम माना जाता है।
जीवदया व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठाकर निःस्वार्थ सेवा की भावना से जोड़ती है। यह जीवन को अधिक संतुलित, शांत और सार्थक बनाती है। संतों और धर्माचार्यों के अनुसार जीवदया ही सच्चे मानव धर्म की पहचान है।
जैन सोश्यल ग्रुप का “सेवा सर्वोपरि” संकल्प
कार्यक्रम के दौरान जैन सोश्यल ग्रुप इंटरनेशनल फेडरेशन नेचरोथेरेपी कमेटी के चेयरमैन संदीप रांका ने जीवदया के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवदया केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि मानव जीवन का सर्वोच्च दायित्व है।
ग्रुप के अध्यक्ष संदीप श्रीमाल, सचिव संदीप जैन एवं प्रचार सचिव मनीष मेहता ने बताया कि सत्र 2026-2027 की शुरुआत “सेवा सर्वोपरि” के उद्देश्य को लेकर जीवदया प्रकल्प के साथ की गई है। इसका उद्देश्य समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देना और पशु सेवा को एक जन आंदोलन का रूप देना है।
गौसेवा और स्वामीवात्सल्य कार्यक्रम का आयोजन
इस अवसर पर जैन सोश्यल ग्रुप जावरा मैत्री परिवार द्वारा स्थानीय जीवदया सोसाइटी, खाचरौद रोड पर गौसेवा कार्यक्रम एवं स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में गौमाता के लिए विशेष रूप से लापसी, तरबूज, ककड़ी, गिलकी सहित पौष्टिक आहार की व्यवस्था की गई। गौसेवा को धार्मिक कर्तव्य मानते हुए श्रद्धालुओं ने पूरे समर्पण के साथ इसमें भाग लिया।
गौसेवा के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्ति और सेवा भाव से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं ने कहा कि गौमाता की सेवा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

साध्वीवृंद का मंगल सान्निध्य और आशीर्वचन
इस पावन अवसर पर पुण्य सम्राट जयंतसेन सूरीजी महाराज की आज्ञानुवर्ती साध्वीवृंद—चारित्रकला श्रीजी म.सा., आर्जवकला श्रीजी म.सा., वंदननिधि श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 3 का मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ।
साध्वीवृंद ने गौमाता को नमन करते हुए उपस्थित सभी दंपतियों एवं मैत्री परिवार को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि “स्व कल्याण के साथ पर कल्याण ही सच्चा धर्म है।”
उनके प्रवचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन में सेवा का महत्व समझाया।
सामाजिक एवं पारिवारिक उत्सव का संगम
कार्यक्रम के दौरान अनेक सामाजिक और पारिवारिक अवसर भी मनाए गए। इस अवसर पर सचिव संदीप जैन एवं संगीता जैन एडवोकेट, कोषाध्यक्ष शरद एवं प्रियंका डुंगरवाल तथा पूर्व कोषाध्यक्ष संदीप जया दसेडा की विवाह वर्षगांठ भी मनाई गई।
इस अवसर ने कार्यक्रम को और अधिक पारिवारिक और भावनात्मक स्वरूप प्रदान किया।
नए सदस्यों का स्वागत और संगठन विस्तार
इस आयोजन में संगठन के नए सदस्यों का स्वागत भी किया गया। राहुल जैन, रोहित ओरा और सौरभ मेहता को औपचारिक रूप से सदस्यता प्रदान की गई।
सभी नए सदस्यों ने जीवदया और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया। यह कदम संगठन के विस्तार और सामाजिक सेवा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जैन सोश्यल ग्रुप के सदस्यों की सक्रिय भूमिका
इस भव्य आयोजन में जैन सोश्यल ग्रुप के अनेक सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें अध्यक्ष संदीप श्रीमाल, संस्थापक सदस्य अनिल धारीवाल, पूर्व अध्यक्षगण गुरु संदीप रांका, पंकज कांठेड, आशीष पोखरना, राजीव लुक्कड़, आलोक बरैया, राजेश पोखरना सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त दीपक मेहता, अजय पटवा, मनीष मेहता, शशांक मेहता, अर्पल कोचट्टा, तरुण टुकड़िया, वैभव ओस्तवाल, यश मेहता, राहुल छाजेड, पवन ओस्तवाल, राजेश हिंगड़, संजय भंडारी, गौरव धोका, हितेश मेहता, पंकज मेहता, अभय छजलानी, अजय कांठेड सहित अनेक सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने न केवल आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग दिया, बल्कि गौसेवा और प्रसाद वितरण में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक अनुशासित, सुव्यवस्थित और सेवा भावपूर्ण बनाया।
कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्था
पूरे आयोजन का संचालन जैन सोश्यल ग्रुप के अनुभवी सदस्यों द्वारा किया गया। भोजन, गौसेवा, स्वागत और धार्मिक अनुष्ठानों की सभी व्यवस्थाएँ अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं।
स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और सेवा भावना का परिचय दिया, जिससे यह आयोजन अत्यंत सफल और प्रभावी बन सका।
निष्कर्ष: जीवदया ही मानव जीवन का सार
यह पूरा आयोजन इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि जीवदया केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता का मूल आधार है। सभी जीवों के प्रति करुणा और सेवा भाव अपनाकर ही समाज में सच्ची शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है।
जीवदया व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठाकर निःस्वार्थ सेवा की ओर प्रेरित करती है, जो मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता को दर्शाती है।
इस प्रकार जावरा में आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बनकर यादगार बन गया।
