Indore नगर निगम में वाहन घोटाले के आरोप, निजी गाड़ियों के कमर्शियल उपयोग पर उठे सवाल
Indore नगर निगम में वाहनों के आवंटन और उनके उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि नगर निगम के कई एमआईसी सदस्य और अधिकारी निजी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें अलग-अलग वाहनों के रूप में दिखाकर टैक्सी बिल वसूले जा रहे हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी गाड़ियों का कमर्शियल उपयोग, नियमों का उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में लंबे समय से यह व्यवस्था चल रही है कि एमआईसी सदस्य और अधिकारी निजी वाहनों का उपयोग करते हैं, लेकिन निगम के रिकॉर्ड में उन्हें अलग-अलग टैक्सी या इनोवा जैसी गाड़ियों के रूप में दर्ज कर दिया जाता है।
नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग तभी किया जा सकता है जब उसे कमर्शियल श्रेणी में आरटीओ से पंजीकृत किया गया हो, टैक्स जमा किया गया हो और सभी आवश्यक परमिट लिए गए हों। लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
रिकॉर्ड और वास्तविकता में बड़ा अंतर
जांच में सामने आया है कि कई वाहनों के रिकॉर्ड और आरटीओ दस्तावेजों में भारी अंतर पाया गया है।
उदाहरण के तौर पर:
- नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे को आवंटित वाहन निगम रिकॉर्ड में इनोवा बताया गया है, जबकि वास्तविक उपयोग में यह फॉर्च्यूनर है।
- वाहन MP-09-DG-8811 आरटीओ रिकॉर्ड में माधवी चौकसे के नाम पर दर्ज है, जबकि निगम रिकॉर्ड में इसे अलग श्रेणी में दिखाया गया है।
- वाहन MP09CY2813 के मालिक के नाम में भी निगम और आरटीओ रिकॉर्ड में अंतर पाया गया है।
इस तरह कई अन्य वाहनों जैसे MP09DU9199, MP09TB7161, MP09TB6661 आदि के रिकॉर्ड में भी असमानता सामने आई है।
लाखों रुपये के टैक्सी बिल का खेल
सूत्रों के अनुसार, इन वाहनों के नाम पर हर महीने लाखों रुपये के टैक्सी बिल नगर निगम से वसूले जा रहे हैं। यह भी आरोप है कि इन वाहनों को अलग-अलग श्रेणियों में दिखाकर वित्तीय अनियमितता की जा रही है।
नगर निगम के वित्त विभाग में दर्ज कुछ वाहनों को स्कॉर्पियो बताया गया है, जबकि वास्तविक रिकॉर्ड में वे इनोवा या अन्य निजी वाहन पाए गए हैं।
आरटीओ नियमों का उल्लंघन
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, किसी भी निजी वाहन को व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए उसकी श्रेणी बदलना अनिवार्य है। इसके साथ ही टैक्स, फिटनेस और परमिट प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
आरटीओ अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बिना श्रेणी बदले निजी वाहनों का कमर्शियल उपयोग नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई संभव है।
कई एमआईसी सदस्यों और अधिकारियों पर आरोप
इस पूरे मामले में नगर निगम के कई एमआईसी सदस्य और अधिकारी जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें सभापति मुन्नालाल यादव, नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि इन सभी को आवंटित वाहनों के रिकॉर्ड और वास्तविक मालिकों की जानकारी में अंतर है, जिससे वित्तीय गड़बड़ी की आशंका और बढ़ गई है।
वाहन मालिकों की जानकारी में भी गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया है कि कई वाहनों के असली मालिक और निगम रिकॉर्ड में दर्ज नाम अलग-अलग हैं।
कुछ मामलों में वाहन किसी व्यक्ति के नाम पर आरटीओ में दर्ज है, जबकि निगम रिकॉर्ड में किसी कंपनी या अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया है। यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
टैक्स चोरी के आरोप
इस मामले में टैक्स चोरी की आशंका भी जताई जा रही है। यदि निजी वाहनों का उपयोग कमर्शियल रूप में किया गया है लेकिन टैक्स नहीं चुकाया गया, तो यह सीधा वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है।
प्रशासनिक जवाब का इंतजार
अब तक नगर निगम या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
निष्कर्ष
इंदौर नगर निगम में वाहन आवंटन और उपयोग को लेकर सामने आए ये आरोप गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन का उदाहरण बन सकता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद क्या सच्चाई सामने आती है।
