Datia मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी: फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर 8.10 लाख रुपये ऐंठे,
मुरैना। मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। Datia मेडिकल कॉलेज में लेखपाल की नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक युवक और उसके परिवार से कुल 8.10 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने न सिर्फ पैसे ऐंठे, बल्कि फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर पीड़ित को लंबे समय तक भ्रम में भी रखा। मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
नौकरी का झांसा देकर शुरू हुआ खेल
मामला मुरैना जिले के अंबाह क्षेत्र की मधुपुरी कॉलोनी का है। यहां रहने वाले कृष्ण नारायण श्रीवास्तव ने पुलिस को शिकायत दी है कि उनके बेटे आकाश श्रीवास्तव को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा गया है।
शिकायत के अनुसार 15 दिसंबर 2024 को महुआ थाना क्षेत्र के सारूपुरा गांव का रहने वाला शिवप्रताप सखबार उनके घर आया था। उसने एक अखबार में छपी विज्ञप्ति दिखाते हुए दावा किया कि दतिया मेडिकल कॉलेज में लेखपाल और अन्य पदों पर भर्ती निकली है और वह आसानी से नौकरी लगवा सकता है।
10 लाख की डील, 8.10 लाख में तय हुआ सौदा
आरोपी ने परिवार को बताया कि उसकी पहुंच बड़े अफसरों और मंत्रियों तक है, इसलिए नौकरी लगना कोई मुश्किल काम नहीं है। शुरुआत में उसने 10 लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में 8 लाख रुपये में सौदा तय हो गया।
परिवार ने भरोसा करके पैसे देना शुरू कर दिया। आरोप है कि शुरुआत में 5 लाख रुपये नकद लिए गए और बाकी रकम बाद में अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर करवाई गई।
Datia मेडिकल कॉलेज की “फर्जी विजिट” और झूठा भरोसा
पीड़ित परिवार के अनुसार पैसे लेने के बाद आरोपी शिवप्रताप ने आकाश को दतिया मेडिकल कॉलेज ले जाकर वहां का भ्रमण कराया। उसने कुछ लोगों से मिलवाने का नाटक भी किया, जिससे परिवार को विश्वास हो जाए कि नौकरी पक्की है।
इसी दौरान आरोपी ने पीड़ित को एक होटल में ठहराया और कहा कि प्रक्रिया पूरी हो रही है। यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि परिवार को किसी तरह का शक न हो।
फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर बढ़ाया भरोसा
कुछ दिनों बाद आरोपी ने पीड़ित परिवार को एक जॉइनिंग लेटर दिया और दावा किया कि नौकरी कंफर्म हो चुकी है। उसने कहा कि आकाश की जॉइनिंग 15 अप्रैल 2025 को होगी और इसके लिए बाकी 3.10 लाख रुपये जल्द देने होंगे।
आरोपी के झांसे में आकर परिवार ने फिर 3.10 लाख रुपये उसके बताए गए सात अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल रकम 8.10 लाख रुपये तक पहुंच गई।
जब मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो खुला राज
15 अप्रैल 2025 को जब आकाश श्रीवास्तव जॉइनिंग के लिए दतिया मेडिकल कॉलेज पहुंचा, तो वहां उसे बड़ा झटका लगा। कॉलेज प्रशासन ने साफ कर दिया कि उसके नाम से कोई नियुक्ति नहीं हुई है और जो जॉइनिंग लेटर दिया गया है, वह पूरी तरह फर्जी है।
इसके बाद पीड़ित परिवार को समझ आया कि उनके साथ ठगी हुई है। परिवार ने तुरंत आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह लगातार टालमटोल करता रहा और बाद में फरार हो गया।
एक साल तक देता रहा झूठे आश्वासन
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी ने एक साल तक उन्हें झूठे आश्वासन देकर भ्रम में रखा। वह कभी पैसे लौटाने की बात करता, तो कभी नौकरी लगवाने का वादा दोहराता।
इस दौरान परिवार बार-बार उसके संपर्क में रहा, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। आखिरकार आरोपी ने घर छोड़ दिया और संपर्क से गायब हो गया।
पुलिस में मामला दर्ज, जांच शुरू
जब पीड़ित परिवार को पूरी तरह ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और संभावित ठिकानों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस ठगी में कोई और व्यक्ति भी शामिल था या यह अकेले आरोपी की साजिश थी।
सरकारी नौकरी के नाम पर बढ़ते ठगी के मामले
मध्यप्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग अक्सर बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को निशाना बनाते हैं और उन्हें बड़े पदों पर नौकरी दिलाने का लालच देते हैं।
ये गिरोह फर्जी दस्तावेज, नकली जॉइनिंग लेटर और अधिकारियों से संपर्क होने का दावा करके लोगों को विश्वास में लेते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों को चेतावनी देते रहे हैं कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया पर ही भरोसा करें। किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंट को पैसे देना या निजी आश्वासन पर भरोसा करना भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष
दतिया मेडिकल कॉलेज में लेखपाल की नौकरी दिलाने के नाम पर हुई 8.10 लाख रुपये की यह ठगी एक बार फिर यह साबित करती है कि बेरोजगारी का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हैं। पीड़ित परिवार अब न्याय की उम्मीद में पुलिस कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
पुलिस की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आरोपी अकेला था या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा। फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों में इस तरह की ठगी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
