मध्यप्रदेश के CM Mohan Yadav ने 22 अप्रैल को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के किसानों और विकास परियोजनाओं को लेकर कई बड़े फैसले और घोषणाएं कीं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे अहम घोषणा किसानों से जुड़ी रही, जिसमें सरकार ने भूमि अधिग्रहण (भू-अर्जन) के बदले किसानों को अब गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया है।
इस फैसले को राज्य सरकार का एक “ऐतिहासिक और किसान हितैषी कदम” माना जा रहा है, जिसका सीधा असर लाखों किसानों और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी परियोजनाओं पर पड़ेगा।
किसानों को 4 गुना मुआवजे का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि अब मध्यप्रदेश सरकार किसी भी किसान की जमीन अधिग्रहण करने पर उसे गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना भुगतान करेगी।
उन्होंने बताया कि पहले भू-अर्जन में किसानों को अपेक्षाकृत कम मुआवजा मिलता था, जिससे उन्हें नुकसान की भावना रहती थी। अब सरकार ने फैक्टर 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया है, जिससे कुल मिलाकर किसानों को 4 गुना मुआवजा मिलेगा।
इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि का उचित और सम्मानजनक मूल्य प्रदान करना है, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें और विकास परियोजनाओं में भी तेजी आए।
विकास परियोजनाओं को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जैसे सड़क, रेलवे, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य भूमि अधिग्रहण के कारण अक्सर देरी का शिकार हो जाते हैं।
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कई बार जमीन विवाद और मुआवजे को लेकर काम रुक जाता है, जिससे विकास की गति धीमी हो जाती है।
नए फैसले के बाद उम्मीद है कि:
- भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान होगी
- किसानों को समय पर उचित मुआवजा मिलेगा
- परियोजनाएं तेजी से पूरी होंगी
- राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा
गेहूं खरीदी को लेकर स्थिति स्पष्ट
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दोगुना हुआ है।
उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत का परिणाम है कि इस बार उत्पादन बहुत अधिक है, लेकिन इसके साथ ही कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, जैसे भंडारण और खरीद व्यवस्था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गेहूं खरीद का कोटा 78 लाख मीट्रिक टन तय किया गया है, जबकि उत्पादन इससे कहीं अधिक है।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार केंद्र से कोटा बढ़ाने का अनुरोध कर रही है, ताकि सभी किसानों का गेहूं खरीदा जा सके और उन्हें किसी प्रकार का नुकसान न हो।
किसानों को आश्वासन
मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी पूरी फसल खरीदेगी और किसी भी किसान को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में हर संभव कदम उठा रही है और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
गेहूं के दाम पर सरकार की नीति
मुख्यमंत्री ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और राज्य सरकार की अतिरिक्त समर्थन नीति पर भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में यह स्पष्ट किया गया था कि गेहूं का मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचाया जाएगा।
वर्तमान में सरकार 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि:
- आने वाले तीन वर्षों में धीरे-धीरे दाम बढ़ाकर 2700 रुपये किया जाएगा
- किसानों को बेहतर मूल्य देने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है
- यह नीति किसानों की आय को स्थिर और मजबूत बनाएगी
लाड़ली बहना योजना पर बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए लाड़ली बहना योजना का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय विपक्ष ने यह दावा किया था कि सरकार बनने के बाद यह योजना बंद कर दी जाएगी, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- लाड़ली बहना योजना अभी भी जारी है
- अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है
- यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बनी है
विपक्ष पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें विपक्ष के सभी आरोपों की जानकारी नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि विपक्ष कई महत्वपूर्ण योजनाओं का विरोध करता रहा है।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे बड़े फैसलों का भी विरोध किया गया था, जबकि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
राज्य की आर्थिक प्रगति
मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति और बजट में हुई वृद्धि पर भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब मध्यप्रदेश का बजट लगभग 3.14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 4.38 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमाण है और यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
नीति आयोग की सराहना
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि नीति आयोग ने मध्यप्रदेश की प्रगति की सराहना की है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं और विकास कार्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और हर क्षेत्र में सुधार दिखाई दे रहा है।
किसानों और विकास के बीच संतुलन
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाना है।
उन्होंने कहा कि:
- किसानों को उचित मुआवजा मिले
- विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हों
- किसी भी पक्ष को नुकसान न हो
- राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति तेज हो
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह निर्णय मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजे का फैसला न केवल किसानों के हित में है, बल्कि यह राज्य के विकास मॉडल को भी मजबूत करता है।
इसके साथ ही गेहूं खरीदी, लाड़ली बहना योजना और आर्थिक प्रगति पर दिए गए बयान यह दर्शाते हैं कि सरकार एक व्यापक विकास दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है।
यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में इन नीतियों का असर राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।
