Indore : वीआईपी कल्चर पर हाईकोर्ट की सख्ती, “कोई भी नेता ट्रैफिक रोकने लायक नहीं बदहाल यातायात पर गहरी नाराज़गी
Indore में बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि शहर में ऐसा कोई भी नेता या व्यक्ति नहीं है, जिसके लिए पूरे ट्रैफिक को रोका जाए।
यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब Indore के ट्रैफिक प्रभारी डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट के सामने वीआईपी मूवमेंट और ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंदौर में “जीरो ट्रैफिक प्रोटोकॉल” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। केवल कुछ समय के लिए वीआईपी काफिले के गुजरने पर ट्रैफिक रोका जाता है और बाद में तुरंत सामान्य कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल Z+ सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाती है।
हाईकोर्ट का तीखा रुख: “घर जाते वक्त भी डर लगता है”
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि खुद जज भी शहर की अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था से परेशान हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब वे घर लौटते हैं तो यू-टर्न लेने में भी डर लगता है कि कहीं किसी दोपहिया वाहन से टक्कर न हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगहों पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति से स्थिति और भी खराब हो जाती है।
237 पद खाली, व्यवस्था पर सवाल
Indore हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह विभाग) को निर्देश दिया कि शहर में ट्रैफिक पुलिस के 237 रिक्त पदों को भरने पर गंभीरता से विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस बल की कमी भी ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ने का एक बड़ा कारण है।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी और उससे पहले सभी संबंधित विभागों को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
पुराने आदेशों का पालन नहीं होने पर नाराजगी
याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कोर्ट को बताया कि पहले दिए गए कई आदेशों का पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में कोर्ट ने आदेश दिया था कि शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, लेकिन यह निर्देश पूरी तरह लागू नहीं हुआ। इसके अलावा कोर्ट ने सभी प्रमुख सिग्नलों को 24 घंटे चालू रखने का आदेश दिया था, लेकिन कई जगह सिग्नल या तो बंद हैं या ठीक से काम नहीं कर रहे।
वीआईपी मूवमेंट पर जनता की परेशानी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि कई बार पूरे-पूरे रास्तों पर ट्रैफिक रोक दिया जाता है, जिससे लोग घंटों जाम में फंस जाते हैं।
इस पर ट्रैफिक डीसीपी ने सफाई देते हुए कहा कि जैसे ही वीआईपी काफिला निकल जाता है, ट्रैफिक को सामान्य कर दिया जाता है। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि अक्सर पुलिसकर्मी वहां से हट जाते हैं, लेकिन जाम की स्थिति बनी रहती है और जनता को काफी देर तक परेशान होना पड़ता है।
सिग्नल और चौराहों की स्थिति पर सवाल
कोर्ट को यह भी बताया गया कि कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल या तो बंद हैं या ठीक से काम नहीं कर रहे। इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शहर की सड़क व्यवस्था में सुधार जरूरी है और यह सुनिश्चित किया जाए कि सड़क के हर हिस्से का सही उपयोग हो सके। कोर्ट ने निगमायुक्त और कलेक्टर को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट में मौजूद
सुनवाई के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और डीसीपी ट्रैफिक राजेश कुमार त्रिपाठी कोर्ट में उपस्थित रहे। कोर्ट ने सभी अधिकारियों से कहा कि वे मिलकर एक प्रभावी योजना बनाएं जिससे ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर किया जा सके।
निष्कर्ष: व्यवस्था सुधार पर जोर
Indore हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वीआईपी संस्कृति के नाम पर आम जनता की परेशानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सभी की नजरें 7 मई की अगली सुनवाई पर हैं, जिसमें यह देखा जाएगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाता है और कोर्ट के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है।
