भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर के महिला पदाधिकारियों ने पक्षियों के लिए सकोरे लगाए और नर्मदा परिक्रमावासियों का सम्मान किया। जानें सेवा, संवेदना और संस्कृति के ये दो अनूठे कार्यक्रम।
सेवा और संस्कृति का अनोखा संगम
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर के तत्वाधान में कल एक साथ दो सराहनीय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में सेवा, संवेदना एवं संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। ट्रस्ट की महिला पदाधिकारियों ने न केवल बेजुबान पक्षियों के लिए जल पात्र लगाए, बल्कि नर्मदा मैया की लंबी परिक्रमा पूर्ण कर लौटे दो साहसी परिक्रमावासियों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर अभिनंदन भी किया।
यह आयोजन मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हुआ, जो नर्मदा नदी के तट पर बसा एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर ने यह सिद्ध कर दिया कि मानव अधिकार केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं होते, बल्कि प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और सम्मान का भाव भी इसमें शामिल है।
प्रथम कार्यक्रम – बेजुबान पक्षियों के लिए सकोरे
कार्यक्रम के पहले चरण में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर की महिलाओं ने शहर के मध्य स्थित सदर मड़िया एवं नगर पालिका चौक मंदिर प्रांगण में बेजुबान पक्षियों के लिए सकोरे (जल पात्र) लगाए। यह पहल गर्मी के मौसम को देखते हुए अत्यंत प्रासंगिक थी, क्योंकि तपती धूप में पक्षियों को पानी की कमी हो जाती है।
इस पहल की मुख्य विशेषताएं:
- स्थान: सदर मड़िया और नगर पालिका चौक मंदिर प्रांगण, नरसिंहपुर
- सामग्री: मिट्टी और सीमेंट के जल पात्र (सकोरे)
- उद्देश्य: गर्मी में पक्षियों को प्यास बुझाने हेतु स्वच्छ जल उपलब्ध कराना
- अपील: शहरवासियों से अपने घरों की छतों, बालकनियों और आसपास पानी एवं दाना रखने का आग्रह
उपस्थित महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि “यह कार्य न केवल सेवा है, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं के प्रति करुणा, संवेदनशीलता एवं मानवता का सशक्त संदेश भी देता है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु में प्रतिदिन हजारों पक्षी पानी की कमी से मर जाते हैं। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर की यह पहल पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के प्रति जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
द्वितीय कार्यक्रम – नर्मदा परिक्रमावासियों का भव्य स्वागत
दूसरा कार्यक्रम भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर द्वारा मां नर्मदा मैया की परिक्रमा पूर्ण कर लौटे दो परिक्रमावासियों के सम्मान में आयोजित किया गया।
परिक्रमावासी:
- श्री संतोष कुमार ठाकुर
- श्री बलराम कश्यप (निवासी तिदन्नी रोड, नरसिंहपुर)
इन दोनों साहसी यात्रियों ने लगभग 5000 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा की। नर्मदा परिक्रमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है – मान्यता है कि नर्मदा मैया की परिक्रमा करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने परिक्रमावासियों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। दोनों परिक्रमावासियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने रास्ते में विभिन्न संकटों का सामना किया, लेकिन नर्मदा मैया की कृपा से उनकी यात्रा सफल रही। उनके प्रेरणादायक संस्मरणों ने उपस्थित सभी जनों को आध्यात्मिक एवं सामाजिक रूप से प्रेरित किया।
“नर्मदा परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और समर्पण का महाकुंभ है।”
उपस्थित गणमान्य पदाधिकारी एवं सदस्य
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर के इस ऐतिहासिक आयोजन में निम्नलिखित पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे:
| क्रम | नाम | पद |
|---|---|---|
| 1 | श्रीमती सविता अग्रवाल | जिला अध्यक्ष |
| 2 | श्रीमती स्वाति जायसवाल | जिला महासचिव |
| 3 | सुनीता शर्मा | जिला मंत्री |
| 4 | श्रीमती बबीता जाट | जिला उपाध्यक्ष |
| 5 | श्रीमती अंजलि नितिन नेमा | जिला उपाध्यक्ष |
| 6 | शिवम तिवारी | कार्यकर्ता |
| 7 | कृष्णा यादव | कार्यकर्ता |
| 8 | डॉ. प्रेम कुमार वैद्य | वरिष्ठ सदस्य |
| 9 | रामवेश सिंह राजावत | सदस्य |
| 10 | युवराज सिंह राठौर | सदस्य |
| 11 | मनीष गुप्ता | सदस्य |
| 12 | जीवनलाल जैन (चाय वाले) | विशेष अतिथि |
इन सभी ने मिलकर कार्यक्रमों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर की जिला टीम ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सेवा और सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव का संदेश
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने इस अवसर पर कहा:
“मानव अधिकार केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक जीव के प्रति हमारी जिम्मेदारी बनती है। पक्षियों के लिए पानी एवं दाना रखना हमारी संस्कृति और संवेदनशीलता का परिचायक है। साथ ही, नर्मदा परिक्रमा जैसे आध्यात्मिक कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से समाज को नई दिशा मिलती है।”
श्री यादव ने भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर की महिला टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह ट्रस्ट की सबसे सक्रिय जिला इकाइयों में से एक है।
अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के विचार
संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता एवं जीवनलाल जैन (चाय वाले) ने संयुक्त रूप से कहा:
“इस प्रकार के सेवा एवं सम्मान के कार्यक्रम समाज में मानवता, संस्कार एवं आपसी सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर द्वारा किए जा रहे ऐसे प्रयास निश्चित ही समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़कर मानव सेवा के कार्यों में भाग लेना चाहिए।”
जीवनलाल जैन, जिन्हें ‘चाय वाले’ के नाम से जाना जाता है, ने बताया कि वे प्रतिदिन अपनी चाय की दुकान पर पक्षियों के लिए पानी रखते हैं और यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि ट्रस्ट ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाया।
सामाजिक प्रभाव और निष्कर्ष
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट नरसिंहपुर के इन दो कार्यक्रमों का सामाजिक प्रभाव अत्यंत सकारात्मक रहा:
- पर्यावरण जागरूकता: पक्षियों के लिए सकोरे लगाने से नागरिकों में प्रकृति प्रेम का संचार हुआ।
- आध्यात्मिक उत्थान: नर्मदा परिक्रमावासियों के सम्मान से स्थानीय लोगों में धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव की भावना जागृत हुई।
- महिला सशक्तिकरण: ये दोनों कार्यक्रम पूर्णतः महिलाओं के नेतृत्व में संपन्न हुए, जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिला।
- सामुदायिक सहयोग: चाय वाले जीवनलाल जैन जैसे साधारण व्यक्ति का भी इस आयोजन में सम्मिलित होना सामुदायिक एकता का प्रतीक है।

