CM डॉ. मोहन यादव ने कहा—बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है राज्य सरकार
सिरसोदिया में भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन
धार जिले के ग्राम सिरसोदिया में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर CM कन्यादान योजना के तहत भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में कुल 400 जोड़े वैदिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे।
पूरा आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्साह से भरपूर रहा। आयोजन स्थल पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों, वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रस्मों के बीच विवाह समारोह सम्पन्न हुआ।
मुख्यमंत्री के आगमन पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया। नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
CM ने किया नवविवाहित जोड़ों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी 400 नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा कर उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने मंच पर उपस्थित होकर दुल्हा-दुल्हन को शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का क्षण है कि उन्हें इतने बड़े पैमाने पर आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ।
उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को संबोधित करते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और परंपराओं का संगम है।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार बेटियों के सशक्तिकरण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना है, ताकि वे अपनी बेटियों के विवाह को सम्मानपूर्वक और बिना आर्थिक बोझ के संपन्न कर सकें।
इस योजना के तहत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को 49 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे विवाह से जुड़े खर्चों में बड़ी राहत मिलती है।
सामूहिक विवाह सम्मेलन: सामाजिक सहयोग का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदना का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में समानता, सहयोग और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह योजना एक बड़े संबल के रूप में कार्य कर रही है, जिससे उनकी चिंताएं कम हुई हैं और वे अपनी बेटियों के विवाह को सम्मानपूर्वक सम्पन्न कर पा रहे हैं।
धार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने धार जिले के सांस्कृतिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा हुआ है, जो इस आयोजन को और अधिक पवित्र और महत्वपूर्ण बनाता है।
उन्होंने कहा कि इस पावन भूमि पर इस प्रकार के मांगलिक आयोजन होना समाज के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार है, जो जीवन को दिशा और स्थिरता प्रदान करता है।
16 संस्कारों में विवाह का महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है और उनमें विवाह संस्कार सबसे प्रमुख माना जाता है, जिसे पाणिग्रहण संस्कार कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि विवाह जीवन का एक ऐसा पड़ाव है जो व्यक्ति को जिम्मेदारियों, रिश्तों और संस्कारों से जोड़ता है।
उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे अपने जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण को बनाए रखें।
सरकार का बेटियों के प्रति दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सरकार उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि वरदान के रूप में देखा जाना चाहिए और इस सोच को बदलने में सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गरीब परिवारों के लिए बेटियों की शादी एक बड़ा आर्थिक बोझ होती थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ने इस चिंता को काफी हद तक दूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि अब परिवार अपनी बेटियों की शादी को एक उत्सव के रूप में मना रहे हैं, न कि बोझ के रूप में देख रहे हैं।
इस योजना ने हजारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने निभाई अभिभावक की भूमिका
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं अभिभावक की भूमिका निभाई और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव है, क्योंकि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिलती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी है।
सामाजिक एकता और समरसता का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज में एकता, समरसता और समानता का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज एक साथ मिलकर ऐसे आयोजनों में भाग लेता है, तो सामाजिक दूरी कम होती है और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिले।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक कालुसिंह ठाकुर, प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
स्थानीय प्रशासन ने पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा, व्यवस्था और समन्वय के सभी पहलुओं को सुचारू रूप से संभाला गया।
आयोजन में उत्सव जैसा माहौल
पूरे कार्यक्रम स्थल पर उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला। पारंपरिक गीत-संगीत, ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह समारोह सम्पन्न हुआ।
नवविवाहित जोड़ों के परिजनों में खुशी का माहौल था और उन्होंने इस पहल के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष: सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक धार्मिक या सामाजिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह समाज में बदलाव और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और अधिक गरिमा प्रदान की। उनकी बातों से स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह आयोजन इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब हर वर्ग को समान अवसर, सम्मान और सहयोग मिले।
