CM डॉ. मोहन यादव ने मोहनखेड़ा महातीर्थ में आदिराज पारणा महोत्सव में की सहभागिता
मोहनखेड़ा महातीर्थ में भव्य आध्यात्मिक आयोजन
आदिराज पारणा महोत्सव का धार्मिक महत्व
आदिराज पारणा महोत्सव जैन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र आध्यात्मिक आयोजन है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की कठोर तपस्या की स्मृति में मनाया जाता है।
जैन परंपरा के अनुसार, भगवान ऋषभदेव ने 400 दिन की कठोर वर्षीतप साधना पूर्ण करने के बाद अक्षय तृतीया के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस कुमार के हाथों गन्ने के रस (इक्षुरस) से पारणा किया था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष अक्षय तृतीया के अवसर पर वर्षीतप करने वाले तपस्वियों का पारणा कराया जाता है।
यह आयोजन आत्मसंयम, त्याग, साधना और मोक्ष मार्ग की प्रेरणा देने वाला माना जाता है। इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से भी भर जाते हैं।
CM डॉ. मोहन यादव का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मानव जीवन अनेक योनियों के पश्चात प्राप्त होता है और यह पंचतत्वों से निर्मित है। उन्होंने कहा कि इस शरीर को संस्कारित करने का सर्वोत्तम माध्यम उपवास और तपस्या है।
उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया का यह पावन अवसर केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। ऐसे आयोजनों में सहभागिता से मानव जीवन धन्य हो जाता है और व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जीवन में पाने से अधिक आनंद देने में है और इसी भावना के साथ सरकार कार्य कर रही है।
गुरुओं और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का महत्व
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे सूर्य संपूर्ण सृष्टि को ऊर्जा प्रदान करता है, वैसे ही गुरुदेव मानव जीवन में प्रकाश और मार्गदर्शन का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक प्रकार के भटकाव आते हैं, लेकिन सही और गलत का अंतर समझाने का कार्य गुरुदेव ही करते हैं। गुरु जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक होते हैं और उनके आशीर्वाद से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य राजेन्द्र सूरी जी महाराज के आशीर्वाद से सरकार केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के संवर्धन के लिए भी कार्य कर रही है।
सरकार की सांस्कृतिक और सामाजिक नीतियाँ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दी गई है।
इसके अलावा दुग्ध उत्पादन, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि किसान, पशुपालक और गरीब वर्ग आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा दे रही है।
जनजातीय क्षेत्रों में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय अंचलों में गुरुदेव के आगमन से नई चेतना का संचार हो रहा है। इससे समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ रही है और लोग अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर वर्ग तक विकास और संस्कृति दोनों का लाभ पहुंचे। इसी उद्देश्य से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
इंदौर चातुर्मास और सरकार का सहयोग
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि गुरुदेव के इंदौर में होने वाले चातुर्मास आगमन पर राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास रहेगा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को हर संभव सहायता मिले ताकि समाज में शांति, सद्भाव और संस्कारों का विस्तार हो सके।
550 से अधिक तपस्वियों का पारणा
इस भव्य आयोजन का मुख्य आकर्षण 550 से अधिक तपस्वियों का पारणा रहा, जो अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ।
तपस्वियों ने वर्षभर की कठोर साधना के बाद पारणा कर अपने तप को पूर्ण किया। इस दौरान पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
हजारों श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया और आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
गच्छाधिपति का आशीर्वाद और संदेश
गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब मानव के मन में धर्म और श्रद्धा का भाव जागृत होता है, तभी वह ऐसे पुण्य आयोजनों का हिस्सा बनता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि वे प्रदेश सेवा के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ें, उनका आशीर्वाद सदैव उनके साथ है।
मंत्री और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अलावा पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया, ट्रस्ट अध्यक्ष सूर्य प्रकाश भंडारी, जैन संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश तांतेड, महेंद्र व्होरा, मुकेश जैन और अन्य गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
आयोजन का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह संस्कार, सेवा और आध्यात्मिकता का संगम भी था। इसमें जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
तप, संयम और आत्मशुद्धि का यह संदेश समाज को यह प्रेरणा देता है कि भौतिक जीवन के साथ आध्यात्मिक संतुलन भी आवश्यक है।
निष्कर्ष: संस्कृति और विकास का संगम
मोहनखेड़ा महातीर्थ में आयोजित यह आदिराज पारणा महोत्सव इस बात का प्रतीक है कि मध्यप्रदेश सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी समान रूप से महत्व दे रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान की। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज में एकता, सेवा और संस्कारों का संदेश भी देता है।
