Khargone में बायपास निर्माण के नाम पर बड़ा मुरम घोटाला, 25 करोड़ से अधिक का जुर्माना
मध्य प्रदेश के Khargone जिले में बायपास निर्माण कार्य के दौरान एक बड़ा अवैध खनन घोटाला सामने आया है। निर्माण कंपनी द्वारा बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर मुरम का अवैध उत्खनन किए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले ने प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, जिसके बाद कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माण कंपनी को नोटिस जारी किया है।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
यह मामला उस समय सामने आया जब स्थानीय लोगों द्वारा लगातार अवैध खनन की शिकायतें की जा रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद 15 दिसंबर को खनिज विभाग द्वारा गठित जांच दल ने गोगावां तहसील के ग्राम मेहरजा और डाबरिया की शासकीय भूमि का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बायपास निर्माण कार्य में लगी कंपनी ने बिना किसी अनुमति के सरकारी भूमि से बड़े पैमाने पर मुरम का उत्खनन किया है। इस मुरम का उपयोग सीधे तौर पर सड़क निर्माण कार्य में किया गया, जो पूरी तरह से अवैध पाया गया।
भोपाल की कंपनी पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में जिस कंपनी का नाम सामने आया है, वह भोपाल स्थित एके शिवहरे इंफ्रास्ट्रक्चर है। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनी ने मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियम 2022 का उल्लंघन किया है।
कंपनी पर आरोप है कि उसने सरकारी भूमि से बिना अनुमति के मुरम निकालकर निर्माण कार्य में उपयोग किया, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
25 करोड़ से अधिक का जुर्माना तय
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया है। कंपनी पर रॉयल्टी का 15 गुना दंड और उतनी ही राशि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में तय की गई है।
इस प्रकार कुल मिलाकर 25 करोड़ 66 लाख 77 हजार रुपये की वसूली निर्धारित की गई है। इसके अलावा 1000 रुपये का प्रशमन शुल्क भी लगाया गया है।
यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाईयों में से एक मानी जा रही है, जिसने जिले में अवैध खनन के खिलाफ सख्त संदेश दिया है।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर की गई है। लंबे समय से स्थानीय स्तर पर अवैध खनन को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद प्रशासन ने गंभीरता से जांच शुरू की।
जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर यह बड़ा जुर्माना लगाया गया और कंपनी को नोटिस जारी किया गया।
15 दिन में जवाब और भुगतान का आदेश
जिला खनिज अधिकारी सावन चौहान ने बताया कि कंपनी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब देने और निर्धारित राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कंपनी तय समय सीमा में आदेश का पालन नहीं करती है, तो जुर्माना राशि को नियमों के तहत दोगुना कर दिया जाएगा।
अवैध खनन पर प्रशासन का सख्त रुख
इस कार्रवाई के बाद जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर प्रशासन का रुख और अधिक सख्त हो गया है। अधिकारियों ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में भी इस तरह की किसी भी अवैध गतिविधि पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी स्तर की कंपनी या ठेकेदार क्यों न हो।
प्रशासन का मानना है कि सरकारी भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की भूमिका भी अहम
इस पूरे मामले में स्थानीय लोगों की शिकायतों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर ही प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ा घोटाला सामने आ सका।
लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में भारी मशीनों द्वारा मुरम का अवैध उत्खनन किया जा रहा था, जिससे पर्यावरण और स्थानीय जमीन दोनों को नुकसान पहुंच रहा था।
निष्कर्ष
खरगोन में सामने आया यह मुरम घोटाला न केवल अवैध खनन का बड़ा मामला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह निर्माण कार्यों की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
प्रशासन द्वारा की गई सख्त कार्रवाई से यह संदेश स्पष्ट है कि अब अवैध खनन को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इस आदेश का पालन करती है या नहीं और आगे इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
