महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज, CM मोहन यादव का कांग्रेस पर हमला
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पास न हो पाने के बाद देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर Mohan Yadav ने कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है और इसे महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता बताया है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।
कांग्रेस पर “महिला विरोधी मानसिकता” का आरोप
Mohan Yadav ने अपने बयान में कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से उसकी “महिला विरोधी मानसिकता” उजागर हो गई है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण से जुड़े इतने अहम विधेयक को संसद में गिरने देना निंदनीय है। उनके अनुसार, यह देश की माताओं और बहनों के सम्मान के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों जैसे गंभीर विषय पर राजनीतिक स्वार्थ हावी होना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
“जनता सब देख रही है”
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि जनता इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णय देती है और ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी है, जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।
लोकसभा में क्यों नहीं पास हो पाया विधेयक
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।
Om Birla ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि मतदान के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।
संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन विधेयक को पास करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है—यानी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई समर्थन।
इस शर्त के पूरी न होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
अन्य विधेयकों पर भी रुकी कार्यवाही
महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद संसद में अन्य विधेयकों पर भी असर पड़ा।
Kiren Rijiju ने बताया कि इस बिल के बाद दो अन्य विधेयकों पर आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी।
बताया गया कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर भी मतदान कराया गया, लेकिन उसमें भी सरकार पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर सकी।
अमित शाह का विपक्ष पर तीखा प्रहार
इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी विपक्ष पर जमकर हमला बोला।
उन्होंने लोकसभा में कहा कि विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन, महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है।
Amit Shah ने आरोप लगाया कि विपक्ष की रणनीति ऐसी थी कि महिला आरक्षण 2029 से पहले लागू ही न हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष बिल के समर्थन में वोट नहीं देता, तो यह साफ है कि वह महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में नहीं है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी अनुपस्थिति में पार्टी ने जो रुख अपनाया, वह एक “राजनीतिक जाल” जैसा प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं यह देख रही हैं कि उनके अधिकारों के रास्ते में कौन बाधा बन रहा है।
सियासी घमासान के बीच महिला सशक्तिकरण पर बहस
महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद देश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की विफलता और साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि वह पर्याप्त समर्थन जुटाने में असफल रही।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक दल महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कितने गंभीर हैं।
महिलाओं की निगाहें अब संसद और राजनीति पर
इस मुद्दे ने अब संसद से निकलकर आम जनता, खासकर महिला मतदाताओं के बीच बड़ी चर्चा का रूप ले लिया है।
महिलाएं यह देख रही हैं कि उनके प्रतिनिधित्व और अधिकारों को लेकर कौन सा राजनीतिक दल वास्तव में प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष
महिला आरक्षण बिल का पास न होना भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। Mohan Yadav समेत कई नेताओं के बयान से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और भी बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।
अब यह देखना अहम होगा कि भविष्य में इस विधेयक को लेकर क्या रणनीति बनती है और क्या राजनीतिक दल महिलाओं के सशक्तिकरण पर सहमति बना पाते हैं या नहीं।
