Vedanta पावर प्लांट हादसा: झुलसे एक और श्रमिक की मौत, मृतकों की संख्या बढ़कर 22
Vedanta पावर प्लांट से जुड़ा भीषण हादसा लगातार गंभीर होता जा रहा है। सिंघीतराई स्थित इस प्लांट में हुए विस्फोट के बाद झुलसे एक और श्रमिक की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इसके साथ ही इस दर्दनाक दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
Vedanta पावर प्लांट हादसे में इलाज के दौरान दो और श्रमिकों की मौत
ताजा जानकारी के अनुसार, सिंगरौली (मध्य प्रदेश) निवासी किस्मत अली ने रायपुर में इलाज के दौरान गुरुवार शाम करीब 5 बजे दम तोड़ दिया। वहीं, वेस्ट बंगाल निवासी सुब्रोतो जेना की रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई।
इन दोनों श्रमिकों के निधन के बाद हादसे में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे यह औद्योगिक दुर्घटनाओं में एक बेहद गंभीर घटना बन गई है।
कई श्रमिकों की हालत गंभीर
हादसे में घायल हुए कई श्रमिकों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, उपेंद्र साहू नामक श्रमिक की स्थिति सबसे गंभीर है, जिनका शरीर लगभग 90 प्रतिशत तक झुलस चुका है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
कुल 35 श्रमिक इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे थे, जिनमें से कई अभी भी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
कैसे हुआ था हादसा
यह दर्दनाक घटना 14 अप्रैल 2026 को दोपहर में हुई थी। जानकारी के अनुसार, प्लांट के बॉयलर-1 में अचानक ट्यूब फटने के कारण जोरदार विस्फोट हुआ।
विस्फोट इतना भीषण था कि:
- बॉयलर की संरचना पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई
- आसपास काम कर रहे श्रमिक चपेट में आ गए
- कई श्रमिक मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गए
इस हादसे में शुरुआती तौर पर 4 श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बाकी घायल अस्पतालों में भर्ती कराए गए थे।
शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि प्लांट में लंबे समय से तकनीकी खामियां मौजूद थीं। इसके बावजूद संचालन जारी रखा गया, जो इस बड़े हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि सुरक्षा मानकों को लेकर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई, जिससे यह भीषण दुर्घटना हुई।
मुआवजे का ऐलान और मजदूरों की मांग
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से मुआवजे की घोषणा की गई है। वेदांता समूह ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और गंभीर घायलों को 15 लाख रुपये तक की सहायता देने का ऐलान किया है।
इसके साथ ही, एक सदस्य को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया है।
हालांकि, मजदूर संगठनों ने इस मुआवजे को नाकाफी बताया है। उनका कहना है कि:
- मृतकों के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए
- प्रत्येक परिवार को स्थायी नौकरी मिले
- सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र जांच कराई जाए
प्रशासन और जांच प्रक्रिया
राज्य प्रशासन और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम इस पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसे के कारणों, तकनीकी खामियों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में शोक और आक्रोश
लगातार हो रही मौतों के बाद स्थानीय क्षेत्र और मजदूर समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश है। परिजन अपने प्रियजनों को खोने के दर्द में हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
निष्कर्ष
वेदांता पावर प्लांट हादसा अब राज्य के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक बन गया है। लगातार बढ़ रही मौतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जहां एक ओर प्रशासन जांच में जुटा है, वहीं दूसरी ओर मजदूर संगठन न्याय और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच से क्या नए तथ्य सामने आते हैं और पीड़ित परिवारों को कितना न्याय मिल पाता है।
