सीजफायर के बावजूद लेबनान में इजरायल के हमले, Trump के आदेश की खुली अनदेखी, स्थिति फिर तनावपूर्ण
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump द्वारा घोषित सीजफायर के बावजूद हालात नियंत्रण में नहीं आ सके। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच घोषित अस्थायी संघर्षविराम के कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी लेबनान में भारी बमबारी की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है।
लेबनान में गुरुवार को 10 दिनों के लिए सीजफायर की घोषणा की गई थी। यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ था, जिसका उद्देश्य इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि इजरायल अब लेबनान पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।
Trump के आदेश के बाद भी इजरायल ने किया हमला
सीजफायर की घोषणा के बावजूद कुछ ही घंटों के भीतर स्थिति बदल गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में भारी बमबारी की, जिससे कई गांव प्रभावित हुए। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कई सीमावर्ती क्षेत्रों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है और लोगों में दहशत का माहौल है।
लेबनानी सेना ने बयान जारी कर कहा कि सीजफायर लागू होने के तुरंत बाद ही इजरायली सेना ने कई स्थानों पर हमले शुरू कर दिए थे। इससे स्पष्ट होता है कि संघर्षविराम का उल्लंघन बहुत जल्दी हुआ।
सीमा क्षेत्रों में बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉर्डर के पास स्थित कई कस्बों में, जहां इजरायली सेना का आंशिक नियंत्रण बताया जा रहा है, वहां घरों और बुनियादी ढांचे पर बमबारी की गई। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इजरायल रक्षा बल की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया कि उनकी कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई है और इसका उद्देश्य हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाना है।
हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का दावा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीजफायर के बाद भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन को कमजोर करना और उसके ढांचे को खत्म करना इजरायल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
नेतन्याहू के बयान से यह साफ हो गया है कि संघर्षविराम के बावजूद इजरायल अपनी रणनीति में किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है।
सीजफायर के तुरंत बाद ही हुआ उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के कुछ घंटों बाद ही दक्षिणी लेबनान में विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने लगी थीं। कई गांवों में लोग दहशत में घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजरायली ड्रोन और लड़ाकू विमानों ने कुछ क्षेत्रों में निगरानी के बाद हमले किए। इससे यह संकेत मिलता है कि जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बरकरार है।
अमेरिका की मध्यस्थता पर उठे सवाल
अमेरिका द्वारा घोषित सीजफायर और Trump के बयान के बावजूद स्थिति नियंत्रित नहीं हो पाई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच विश्वास नहीं बनता, तब तक ऐसे संघर्षविराम अस्थायी ही रहेंगे।
संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या मध्यस्थता पर्याप्त प्रभावी साबित हो रही है या नहीं।
हिजबुल्लाह की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक हिजबुल्लाह की ओर से इस ताजा हमले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पहले भी संगठन ने इजरायल के किसी भी हमले का जवाब देने की चेतावनी दी थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।
क्षेत्र में मानवीय संकट की आशंका
लगातार हो रही बमबारी और संघर्ष के चलते दक्षिणी लेबनान में मानवीय संकट की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है। हजारों लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।
निष्कर्ष
लेबनान में घोषित सीजफायर के बावजूद इजरायल द्वारा की गई कार्रवाई ने एक बार फिर मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को झटका दिया है। Trump के आदेश और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष इस संघर्ष को रोकने के लिए कोई स्थायी समाधान निकाल पाते हैं या तनाव और बढ़ता है।
