ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर भक्ति का महासैलाब,
मध्य प्रदेश का पवित्र तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना के महासंगम का केंद्र बन गया है। नर्मदा तट पर स्थित मांधाता पर्वत पर शुक्रवार से पांच दिवसीय भव्य “Shankaracharya Prakatotsav” का शुभारंभ हुआ, जहां देशभर से श्रद्धालु, संत-महात्मा और विद्वान बड़ी संख्या में पहुंचे।
इस आयोजन का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एकात्म धाम परिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ किया। जैसे ही यज्ञ वेदी पर मंत्रोच्चार शुरू हुआ, पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिकता में डूब गया।
पंचांग पूजन और वैदिक विधि से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पंचांग पूजन और यज्ञ वेदी पूजन के साथ की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और इसके बाद पांच दिवसीय प्रकटोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कई संत और आध्यात्मिक विद्वान उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से सदानंद सरस्वती, स्वामी शारदानंद सरस्वती तथा निवेदिता भिड़े शामिल रहीं। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
मांधाता पर्वत बना भक्ति का केंद्र
मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। नर्मदा के किनारे स्थित यह क्षेत्र पहले से ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन इस आयोजन ने इसे वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और अधिक पहचान दिलाई है।
भक्तों ने यज्ञ, आरती और भजन-कीर्तन में भाग लेकर वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
अद्वैत वेदांत पर होगा गहन मंथन
यह पांच दिवसीय आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अद्वैत वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करना है।
इस दौरान “अद्वैत और Gen-Z”, “आधुनिक विज्ञान और अध्यात्म” तथा “वैश्विक शांति और भारतीय दर्शन” जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय दर्शन से जोड़ना और उसे सरल भाषा में समझाना है।
विद्वानों और संतों की मौजूदगी
इस आयोजन में देशभर के कई प्रख्यात विद्वान और संत भाग ले रहे हैं। प्रमुख वक्ताओं में स्वामी ब्रह्मा प्रज्ञानंद सरस्वती, शतावधानी ललित द्वितीय और विशाल चौरसिया जैसे नाम शामिल हैं।
ये सभी विद्वान अद्वैत दर्शन की व्याख्या आधुनिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे युवाओं और सामान्य श्रद्धालुओं को इसे समझने में आसानी हो रही है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा आयोजन
इस पांच दिवसीय महोत्सव में केवल धार्मिक प्रवचन ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
ओडिसी नृत्य, शास्त्रीय गायन और भजन प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की है। विशेष रूप से जय तीर्थ मेवुडी द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय गायन और ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्टैचू ऑफ वननेस बना आकर्षण का केंद्र
एकात्म धाम परिसर में स्थापित 108 फीट ऊंची Statue of Oneness इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है। यह भव्य प्रतिमा आदि शंकराचार्य के 12 वर्षीय बाल स्वरूप को दर्शाती है।
इस प्रतिमा का अनावरण 21 सितंबर 2023 को किया गया था और तब से यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
अद्वैत लोक संग्रहालय और वैश्विक केंद्र
इस क्षेत्र में विकसित किया गया अद्वैत लोक संग्रहालय भारतीय संस्कृति और शंकराचार्य के जीवन दर्शन को विस्तार से प्रस्तुत करता है। यहां अद्वैत वेदांत के अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र भी स्थापित किया गया है।
यह पहल भारत की आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2195 करोड़ की परियोजना को मंजूरी
मध्य प्रदेश सरकार ने इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के विस्तार के लिए मई 2025 में एक बड़ी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय के निर्माण के लिए 2,195 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई।
इस परियोजना का उद्देश्य ओंकारेश्वर को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
मुख्यमंत्री का संदेश: एकात्मता और शांति का मार्ग
शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आचार्य शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दृष्टि है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और एकात्म भाव को विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास है। उनके अनुसार, अद्वैत का संदेश यह सिखाता है कि पूरी सृष्टि एक ही चेतना से जुड़ी हुई है और यही भावना मानवता को एकता के सूत्र में बांध सकती है।
युवाओं को जोड़ने की विशेष पहल
इस आयोजन की एक खास विशेषता यह है कि इसमें युवाओं को विशेष रूप से जोड़ा जा रहा है। “एकात्म पर्व” के माध्यम से अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को सरल और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
युवाओं के लिए विशेष संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे भारतीय दर्शन को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में भी समझ और अपनाएं।
आधुनिकता और अध्यात्म का संगम
इस आयोजन में आधुनिक विषयों को भी शामिल किया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति जैसे विषयों को अद्वैत दर्शन के दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
इससे यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बौद्धिक और सामाजिक विमर्श का भी मंच बन गया है।
समापन में होगा युवा दीक्षा समारोह
कार्यक्रम के अंतिम दिन नर्मदा तट पर एक विशेष दीक्षा समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें सैकड़ों युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में जुड़ेंगे और अद्वैत दर्शन के प्रचार-प्रसार का संकल्प लेंगे।
इसके साथ ही उन लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा जिन्होंने इस दर्शन के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
निष्कर्ष
ओंकारेश्वर का मांधाता पर्वत इस समय भक्ति, आस्था और भारतीय दर्शन के अद्भुत संगम का साक्षी बन गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम भी है।
भक्ति और ज्ञान के इस महासंगम ने ओंकारेश्वर को एक बार फिर वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है।

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