उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन का भूमि पूजन 19 अप्रैल को। डिजाइन बदलने से 450 करोड़ बचेंगे। सिंहस्थ 2028 के लिए वरदान, जानें किसानों को मुआवजा और नई डेडलाइन।
उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन का भूमि पूजन 19 अप्रैल को, डिजाइन बदलकर 450 करोड़ बचाने की कोशिश
नईदुनिया, उज्जैन। मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना को आखिरकार जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ गया है। यह लंबे समय से भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के विवादों में अटकी हुई थी। अब 19 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस 98.41 किमी लंबे मार्ग का भूमि पूजन करेंगे।
सिंहस्थ 2028 के लिए वरदान
प्रशासन के अनुसार, यह उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि सिंहस्थ 2028 के लिए लाइफलाइन होगी। इससे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मजबूत होगी और श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी।
डिजाइन बदलकर 450 करोड़ की बचत
सबसे अहम बदलाव डिजाइन में किया गया है। किसानों के विरोध और तकनीकी पुनर्मूल्यांकन के बाद हाईवे के एलिवेशन (ऊंचाई) को कम किया गया है। अब सड़क सतही स्तर पर बनेगी, जिससे लागत घटकर 1950 करोड़ रुपये रह जाएगी, जबकि पहले यह 2400 करोड़ थी। इस तरह प्रशासन ने 450 करोड़ रुपये बचाने की कोशिश की है।
मुआवजा विवाद और प्रभावित गांव
संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने सख्त निर्देश दिए हैं कि भूमि मुआवजे में देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
- प्रभावित गांव: उज्जैन के 49 और रतलाम के 12 गांव।
- भूमि अधिग्रहण: 430 हेक्टेयर।
- विवाद: किसानों का आरोप है कि 6-8 लाख प्रति बीघा का प्रस्ताद दिया जा रहा है, जबकि बाजार भाव 25-50 लाख है। प्रशासन ने पारदर्शी मुआवजे का आश्वासन दिया है।
डेडलाइन और नई समयसीमा (Timeline)
यह प्रोजेक्ट पहले से ही काफी विलंबित है।
| मील का पत्थर | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| प्रशासकीय स्वीकृति | 7 मार्च 2024 | पूर्ण |
| टेंडर प्रक्रिया पूर्ण | 28 अगस्त 2025 | पूर्ण |
| कार्य शुरू करने की पुरानी डेडलाइन | 1 अप्रैल 2026 | ❌ विफल |
| भूमि पूजन | 19 अप्रैल 2026 | ✅ प्रस्तावित |
| पूर्ण होने की लक्ष्य तिथि | 30 नवंबर 2027 | लक्ष्य |
यह मार्ग क्यों है खास?
- दूरी कम होगी: उज्जैन से जावरा का सफर तेज होगा।
- कनेक्टिविटी: दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर और महू-नीमच मार्ग से जोड़ा जाएगा।
- किसानों के लिए राहत: डिजाइन बदलने से खेतों तक पहुंच और सिंचाई पर प्रभाव कम होगा।
अधिकारियों का बयान
संभागायुक्त आशीष सिंह ने स्पष्ट किया, “भूमि मुआवजा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी अब स्वीकार नहीं होगी। हम साप्ताहिक मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि प्रोजेक्ट 2027 तक तैयार हो जाए।
निष्कर्ष
लंबे इंतजार के बाद उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन का भूमि पूजन होना मालवा के लिए स्वागत योग्य खबर है। हालांकि, किसानों के मुआवजे का मुद्दा अभी भी सिरदर्द बना हुआ है। अगर सब कुछ योजना अनुसार रहा, तो सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को देश के बड़े शहरों से जोड़ने वाली यह सुपरफास्ट हाईवे तैयार हो जाएगी।
