क्या आपको पता है युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला कितना खतरनाक है? यहां जानें महज 10 मिनट में जान बचाने वाला CPR का सही तरीका और बनें हीरो। तुरंत पढ़ें।
युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला… महज 10 मिनट में बचा सकते हैं जान, सीखें CPR का सही तरीका
युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला… महज 10 मिनट में बचा सकते हैं जान, सीखें CPR का सही तरीका – यह सिर्फ एक हेडलाइन नहीं, बल्कि आज की सबसे बड़ी मेडिकल इमरजेंसी है। जिम, स्कूल या घर में कहीं भी, यह जानकारी आपको किसी की जान बचाने वाला हीरो बना सकती है।
हाल के वर्षों में जिम, डांस फ्लोर या चलते-फिरते अचानक गिरकर मौत के वीडियोज ने सबको डरा दिया है। युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला अब कोई बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट में मरीज को अस्पताल ले जाने तक का समय भी नहीं मिलता, इसलिए मौके पर मौजूद लोगों का ‘फर्स्ट रिस्पॉन्स’ ही सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। यदि आप CPR का सही तरीका जानते हैं, तो आप महज 10 मिनट में किसी की जान बचा सकते हैं।
हार्ट अटैक और: उलझन दूर करें
अक्सर लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनमें तकनीकी अंतर है। इसे समझना कार्डियक अरेस्ट में CPR का सही तरीका अपनाने से पहले जरूरी है।
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हार्ट अटैक (प्लंबिंग समस्या): नसों में ब्लॉकेज के कारण दिल के हिस्से तक खून नहीं पहुंचता, लेकिन दिल धड़कता रहता है। मरीज को पसीना, सीने में भारीपन और दर्द होता है।
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कार्डियक अरेस्ट (इलेक्ट्रिकल समस्या): दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक फेल हो जाता है और धड़कन रुक जाती है। यह ज्यादा घातक है क्योंकि इसमें दिमाग को ऑक्सीजन मिलना तुरंत बंद हो जाता है। मरीज तुरंत बेहोश होकर गिर जाता है और सांस लेना बंद कर देता है।
कार्डियक अरेस्ट के 5 शुरुआती संकेत
युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला अचानक होता है, लेकिन इससे 30-60 सेकंड पहले कुछ लक्षण दिखते हैं। पहचानें:
- अचानक बेहोश होना और पुकारने पर जवाब न देना।
- नब्ज (Pulse) और सांस का पूरी तरह रुक जाना।
- गिरने से ठीक पहले तेज घबराहट या चक्कर आना।
- आंखों की पुतलियों का फैल जाना।
- शरीर का नीला पड़ना (सायनोसिस)।
जान बचाने वाला मंत्र: CPR का सही तरीका (स्टेप-बाय-स्टेप)
अगर आपके सामने कोई अचानक गिर जाए, तो घबराने के बजाय CPR का सही तरीका अपनाते हुए इन 4 स्टेप्स को फॉलो करें:
स्टेप 1 (चेक और कॉल):
मरीज को हिलाकर देखें और जोर से पूछें “आप ठीक हैं?”। अगर प्रतिक्रिया न मिले और सांस न दिखे, तो तुरंत एम्बुलेंस (102/108) को कॉल करें।
स्टेप 2 (पोजीशन और हैंड प्लेसमेंट):
मरीज को सख्त जमीन पर पीठ के बल लिटाएं। उसके बगल में घुटने टेकें।
- अपनी एक हथेली की एड़ी (पाम हील) को मरीज की छाती के बीचों-बीच (निपल्स के बीच) रखें।
- दूसरी हथेली को पहले के ऊपर रखकर उंगलियां आपस में लॉक कर लें।
स्टेप 3 (चेस्ट कंप्रेशन – सबसे जरूरी):
- अपनी कोहनियों को सीधा रखते हुए पूरे शरीर का वजन ऊपर से डालें।
- रफ्तार: 1 मिनट में 100 से 120 बार दबाएं। (बीच गीत “रुक जा ना” की ताल पर दबा सकते हैं)।
- गहराई: छाती कम से कम 2 से 2.5 इंच (5-6 सेमी) नीचे दबनी चाहिए।
- छाती को पूरी तरह ऊपर उठने दें, लेकिन हाथ हटाएं नहीं।
स्टेप 4 (रेस्क्यू ब्रीद – वैकल्पिक):
यदि आप ट्रेनिंग लिए हैं, तो हर 30 कंप्रेशन के बाद 2 बार मुंह से सांस दें (नाक बंद करके, मुंह से मुंह लगाकर)।
नोट: यदि आप ‘माउथ-टू-माउथ’ सांस देने में सहज नहीं हैं, तो केवल ‘Hands-Only CPR’ (लगातार छाती दबाना) जारी रखें। CPR का सही तरीका यही है कि बिना रुके छाती दबाते रहें जब तक एम्बुलेंस न आ जाए।
हैंड्स-ओनली CPR क्या है?
कोरोना महामारी के बाद से डॉक्टर्स ‘हैंड्स-ओनली सीपीआर’ पर जोर दे रहे हैं। इसमें आपको मुंह से सांस नहीं देनी है। युवाओं के दिल पर कार्डियक अरेस्ट का हमला होने पर सिर्फ 100-120 की रफ्तार से छाती दबाते रहें। यह उतना ही प्रभावी है और इसे कोई भी सीख सकता है।
AED मशीन का उपयोग कैसे करें?
यदि आस-पास AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) मशीन (मॉल, एयरपोर्ट या जिम में उपलब्ध) हो, तो CPR का सही तरीका अपनाने के साथ इसका उपयोग करें। यह मशीन बोलकर निर्देश देती है:
- मशीन ऑन करें।
- पैड्स को मरीज की नंगी छाती पर लगाएं (एक दाईं तरफ ऊपर, एक बाईं तरफ नीचे)।
- मशीन हार्ट रिदम चेक करेगी और ‘शॉक’ का बटन देगी।
- शॉक देते समय सुनिश्चित करें कि कोई मरीज को छू न रहा हो।
युवाओं में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के कारण
आखिर क्यों बढ़ रहा युवाओं के दिल पर ‘कार्डियक अरेस्ट’ का हमला? डॉक्टर्स के अनुसार 5 मुख्य कारण:
- अत्यधिक स्ट्रेस और नींद की कमी: रात 2 बजे तक जागना और फिर सुबह जिम जाना।
- अनसुप्लीमेंटेड प्रोटीन और स्टेरॉयड: बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेना।
- स्मोकिंग और वेपिंग: वेपिंग से दिल की नसें सिकुड़ जाती हैं।
- एनर्जी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन: ये दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को गड़बड़ करते हैं।
- हेड फोन में तेज आवाज (वेगस नर्व स्टिमुलेशन): हाल के रिसर्च में यह भी एक कारण बताया गया है।
डॉक्टर की सलाह: क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)
CPR का सही तरीका अपनाते समय ये बातें याद रखें:
| क्या करें (Do’s) | क्या न करें (Don’ts) |
|---|---|
| मरीज को सख्त सतह पर लिटाएं। | मरीज को गद्दे या सोफे पर सीपीआर न दें। |
| 100-120 की रफ्तार से दबाएं। | बीच-बीच में हाथ हटाकर नब्ज न चेक करें। |
| एम्बुलेंस आने तक रुकें नहीं। | मरीज के मुंह में पानी या दवा न डालें। |
| हाथों को छाती के बीच में ही रखें। | कोहनियां मोड़ें नहीं, पूरी ताकत लगाएं। |
