—Advertisement—

Indore–Khandwa रेल लाइन 2029 से पहले पूरी नहीं, रेलवे ने माना देरी; सिंहस्थ से पहले योजना अधर में

Author Picture
Published On: 17 April 2026
Indore–Khandwa रेल लाइन परियोजना
— Indore–Khandwa रेल लाइन परियोजना

—Advertisement—

Indore–Khandwa रेल लाइन परियोजना में देरी, 2029 से पहले पूरा होना मुश्किल

Indore–Khandwa तक प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित रेल लाइन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रेलवे ने स्वयं स्वीकार किया है कि इंदौर-खंडवा रेल लाइन गेज परिवर्तन परियोजना का काम वर्ष 2029 से पहले पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है। इस घोषणा के बाद उन यात्रियों और श्रद्धालुओं की उम्मीदों को झटका लगा है, जो लंबे समय से इस रूट पर सीधी रेल सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे थे।

यह परियोजना विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके पूरा होने पर मध्यप्रदेश के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों—महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग—के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित हो सकेगा। साथ ही, सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले इस रूट के पूरा होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अब यह संभावना कमजोर पड़ गई है।

Indore–Khandwa रेलवे का आधिकारिक आकलन: 2029 तक ही आंशिक काम संभव

रेलवे के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। वर्तमान योजना के तहत दिसंबर 2029 तक केवल कुछ हिस्सों में ही ट्रैक बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरी लाइन को चालू होने में अभी और समय लग सकता है।

सूत्रों के मुताबिक दिसंबर 2029 तक केवल कुलथाना-राजपुरा सेक्शन तक ट्रैक बिछाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका मतलब यह है कि परियोजना का एक बड़ा हिस्सा उस समय तक भी अधूरा रहेगा और यात्रियों के लिए सीधी रेल सेवा शुरू नहीं हो पाएगी।

कई हिस्सों में बंटी परियोजना, अलग-अलग समय सीमा तय

यह रेल लाइन परियोजना कई चरणों में विभाजित है, और प्रत्येक हिस्से के लिए अलग-अलग समय सीमा तय की गई है।

  • पातालपानी से बड़िया सेक्शन का लक्ष्य नवंबर 2027 रखा गया है
  • राजपुरा से चोरल सेक्शन दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
  • बड़िया से कुलथाना-राजपुरा सेक्शन दिसंबर 2029 तक पूरा करने की योजना

इन अलग-अलग डेडलाइन से यह स्पष्ट होता है कि पूरी परियोजना को पूरा होने में लंबा समय लगेगा और किसी भी स्थिति में यह निकट भविष्य में पूरी तरह से चालू नहीं हो पाएगी।

वर्षों से चल रही है परियोजना, लेकिन गति धीमी

इंदौर से खंडवा होते हुए अकोला तक गेज परिवर्तन की यह परियोजना कई वर्षों से निर्माणाधीन है। इसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जाता है।

हालांकि, परियोजना में लगातार देरी होती रही है। सबसे बड़ी बाधा लंबे समय तक वन विभाग से अनुमति न मिलना रही, जिससे काम काफी समय तक रुका रहा। अनुमति मिलने के बाद भी कई हिस्सों में कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।

बजट में 1500 करोड़ का प्रावधान, फिर भी धीमी रफ्तार

इस वर्ष के रेल बजट में इस परियोजना के लिए लगभग 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद जमीन पर काम की गति उम्मीद के अनुसार नहीं दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि आवंटित होने के बावजूद परियोजना का समय पर पूरा न होना प्रशासनिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चुनौतियों को दर्शाता है। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के कारण समयसीमा लगातार आगे बढ़ती जा रही है।

श्रद्धालुओं और यात्रियों की उम्मीदों को झटका

इस परियोजना के पूरा होने पर श्रद्धालुओं को सीधा रेल संपर्क मिलने की उम्मीद थी, जिससे उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाता।

लेकिन अब 2029 तक भी परियोजना का पूरा होना सुनिश्चित नहीं होने से यात्रियों की योजनाओं पर असर पड़ेगा। विशेषकर सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले इस सुविधा के शुरू होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।

क्षेत्रीय विकास पर संभावित असर

यह रेल लाइन केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ी हुई है। इसके पूरा होने से इंदौर, खंडवा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद थी।

परंतु देरी के कारण इन संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों को अभी और लंबा इंतजार करना होगा।

निष्कर्ष: लंबा इंतजार जारी रहेगा

इंदौर-खंडवा रेल लाइन परियोजना की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह एक दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसे पूरा होने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।

रेलवे की आधिकारिक स्वीकारोक्ति के बाद यह तय हो गया है कि 2029 से पहले इस रूट पर पूरी तरह से ट्रेन संचालन संभव नहीं होगा। ऐसे में यात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को अभी और धैर्य रखना होगा।

यह परियोजना एक बार पूरी होने के बाद निश्चित रूप से क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, लेकिन फिलहाल इसके लिए लंबा इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp