सभी संभागों में गेहूँ का उपार्जन शुरू: खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत
भोपाल। MP में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत गेहूँ उपार्जन कार्य अब पूरे प्रदेश के सभी संभागों में औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है। राज्य सरकार ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ खरीदी की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ की हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर भुगतान, बेहतर सुविधाएँ और निर्बाध उपार्जन व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसी दिशा में सभी संभागों में उपार्जन केंद्र सक्रिय कर दिए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक अमला लगातार निगरानी कर रहा है।
अब तक 42 हजार से अधिक किसानों से खरीदी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रदेश में कुल 42,689 किसानों से गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत कुल 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूँ की खरीदी हुई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उपार्जन कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और किसान बड़ी संख्या में सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज लेकर पहुँच रहे हैं।
इसके बदले किसानों को अब तक लगभग 28 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि उनके बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है। सरकार द्वारा भुगतान की यह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली सुनिश्चित करती है कि किसानों को बिना किसी मध्यस्थ के उनकी फसल का पूरा मूल्य समय पर प्राप्त हो।
स्लॉट बुकिंग में किसानों की भारी भागीदारी
इस वर्ष गेहूँ उपार्जन को व्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत किसान अपनी सुविधा के अनुसार उपार्जन केंद्र और समय का चयन कर सकते हैं।
अब तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों ने अपनी स्लॉट बुकिंग पूरी कर ली है। इन किसानों द्वारा कुल 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूँ बिक्री के लिए पंजीकृत किया गया है।
मंत्री ने बताया कि किसान 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुकिंग कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य उपार्जन केंद्रों पर भीड़ नियंत्रण करना और किसानों को बिना प्रतीक्षा के अपनी उपज बेचने की सुविधा देना है।
3171 उपार्जन केंद्रों पर सुचारू खरीदी व्यवस्था
प्रदेश भर में गेहूँ उपार्जन के लिए कुल 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में किसानों की पहुंच को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
इन केंद्रों पर तौल, गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण और भुगतान से संबंधित सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का प्रयास है कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या परेशानी का सामना न करना पड़े।
उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए व्यापक सुविधाएं
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- छायादार बैठने की व्यवस्था
- स्वच्छ पेयजल की सुविधा
- बारदाना (बोरी) की उपलब्धता
- इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे
- सिलाई मशीन
- कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा
- उपज की गुणवत्ता जांच उपकरण
- साफ-सफाई के लिए पंखे और छननी व्यवस्था
इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और वे आरामदायक वातावरण में अपनी फसल का विक्रय कर सकें।
समर्थन मूल्य और बोनस सहित आकर्षक दर
इस वर्ष सरकार द्वारा गेहूँ का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा किसानों को 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है।
इस प्रकार किसानों को कुल मिलाकर 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी मानी जा रही है और इससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और उचित मूल्य दिलाना है, जिससे कृषि क्षेत्र को और मजबूती मिल सके।
भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था
उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए सरकार ने व्यापक व्यवस्था की है। इसके अंतर्गत जूट बारदानों के साथ-साथ पीपी (PP) और एचडीपी (HDP) बैग का उपयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा जूट के मजबूत भर्ती बारदाने भी उपलब्ध कराए गए हैं ताकि अनाज को सुरक्षित रखा जा सके और किसी प्रकार की क्षति न हो।
अब तक प्रदेश में उपार्जित गेहूँ में से 8 लाख 65 हजार 600 क्विंटल गेहूँ का सफलतापूर्वक परिवहन किया जा चुका है। यह कार्य निरंतर जारी है और भंडारण केंद्रों तक गेहूँ पहुँचाने की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
रिकॉर्ड पंजीयन से बढ़ा किसानों का भरोसा
इस वर्ष गेहूँ उपार्जन के लिए प्रदेश में रिकॉर्ड संख्या में किसानों ने पंजीयन कराया है। कुल 19 लाख 4 हजार किसानों ने अपनी फसल बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है।
यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि किसानों का सरकारी उपार्जन प्रणाली पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। पारदर्शी प्रक्रिया, समय पर भुगतान और बेहतर सुविधाओं के कारण किसान अब बड़ी संख्या में सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं।
78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस वर्ष किसानों के हित में एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का उद्देश्य 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन करना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।
मंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद सरकार किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह लक्ष्य कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पारदर्शिता और तकनीक आधारित व्यवस्था
इस वर्ष उपार्जन प्रक्रिया में तकनीक का अधिकतम उपयोग किया गया है। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, डिजिटल भुगतान प्रणाली और कंप्यूटराइज्ड तौल व्यवस्था ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया है।
सरकार का प्रयास है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता की संभावना न रहे। इसके लिए नियमित निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली भी लागू की गई है।
MP किसानों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी से बचाना है।
उन्होंने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों के हितों की रक्षा में कोई लापरवाही न हो।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में गेहूँ उपार्जन अभियान इस वर्ष व्यापक स्तर पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। सभी संभागों में शुरू हुई खरीदी प्रक्रिया, लाखों किसानों की भागीदारी, समय पर भुगतान और आधुनिक सुविधाओं ने इस व्यवस्था को मजबूत बनाया है।
सरकार द्वारा निर्धारित 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य और बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रदेश में कृषि उपार्जन प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है।
यह पूरा अभियान किसानों की आय बढ़ाने, कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
