Ratlam के सैलाना में 20 हजार की रिश्वत लेते पटवारी गिरफ्तार,
Ratlam जिले के सैलाना तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उज्जैन लोकायुक्त टीम ने एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्रवाई बुधवार को उस समय की गई जब आरोपी पटवारी कैलाश वडख्या ने एक किसान से 20 हजार रुपये की रिश्वत ली। इस पूरे मामले ने तहसील कार्यालय में हड़कंप मचा दिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए।
कृषि भूमि सीमांकन के बदले मांगी गई थी रिश्वत
मामले की शुरुआत तब हुई जब ग्राम अडवानिया निवासी जितेंद्र पाटीदार ने अपनी कृषि भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। उनके पिता के नाम पर सैलाना और बागरियों की खेड़ी में लगभग 5 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। भूमि का सीमांकन कराने के लिए 22 जनवरी को लोकसेवा केंद्र के माध्यम से विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
नियम के अनुसार सीमांकन का कार्य राजस्व विभाग द्वारा तय समय में किया जाना चाहिए था, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण आवेदक को बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े।
पटवारी से संपर्क करने पर शुरू हुई अवैध मांग
लंबे इंतजार के बाद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 9 मार्च को आवेदक जितेंद्र पाटीदार स्वयं तहसील कार्यालय पहुंचे और संबंधित हल्का पटवारी कैलाश वडख्या से मुलाकात की। यहीं से पूरा मामला संदिग्ध दिशा में बढ़ने लगा।
आरोप है कि पटवारी ने सीमांकन का कार्य करने के बदले रिश्वत की मांग की। शुरुआत में उसने बिना किसी आधिकारिक कारण के काम को आगे बढ़ाने के लिए पैसे की मांग रख दी, जिससे आवेदक हैरान रह गया।
पहले 30 हजार रुपये की मांग, बाद में सौदेबाजी
पीड़ित पक्ष के अनुसार, पटवारी ने पहले 30 हजार रुपये की मांग की थी। यह राशि सुनकर आवेदक ने विरोध किया और बताया कि यह एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसमें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता।
लेकिन पटवारी ने अपनी मांग कम नहीं की और लगातार दबाव बनाता रहा। बाद में बातचीत के दौरान उसने यह राशि घटाकर 25 हजार रुपये कर दी। इस दौरान स्पष्ट रूप से यह संकेत दिया गया कि बिना पैसे दिए सीमांकन का कार्य आगे नहीं बढ़ेगा।
पहले भी ली गई थी 3 हजार रुपये की राशि
शिकायत के अनुसार, सौदेबाजी के दौरान पटवारी ने 10 अप्रैल को पहले ही 3 हजार रुपये ले लिए थे। यह राशि एडवांस के रूप में ली गई थी, ताकि काम को आगे बढ़ाया जा सके।
इसके बाद शेष 20 हजार रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में देने की सहमति बनी। इस पूरी प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह मामला केवल प्रशासनिक देरी का नहीं, बल्कि सुनियोजित रिश्वतखोरी का था।
लोकायुक्त में दर्ज कराई गई शिकायत
लगातार परेशान होने के बाद आवेदक जितेंद्र पाटीदार ने 10 अप्रैल को उज्जैन स्थित लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने एसपी आनंद कुमार यादव को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और न्याय की मांग की।
लोकायुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक जांच शुरू की। जांच के दौरान पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई, जिसके बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
गोपनीय योजना के तहत जाल बिछाया गया
लोकायुक्त टीम ने शिकायत की पुष्टि होने के बाद एक गोपनीय योजना तैयार की। योजना के तहत तय किया गया कि आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा जाएगा।
16 अप्रैल को टीम ने सैलाना तहसील कार्यालय के नायब नाजिर कक्ष में पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया। आवेदक को रिश्वत की राशि लेकर आरोपी के पास भेजा गया ताकि उसे मौके पर पकड़ा जा सके।
रिश्वत लेते ही मौके पर गिरफ्तार
जैसे ही पटवारी कैलाश वडख्या ने आवेदक से 20 हजार रुपये की राशि ली, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे तुरंत घेर लिया। टीम ने मौके पर ही उसे पकड़कर पैसे बरामद कर लिए।
अचानक हुई इस कार्रवाई से तहसील कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी भी हैरान रह गए। किसी को इस कार्रवाई की भनक तक नहीं लगी थी।
लोकायुक्त टीम की त्वरित कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई में लोकायुक्त निरीक्षक राजेंद्र वर्मा के नेतृत्व में टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ प्रधान आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक विशाल रेशमिया, उमेश और श्याम शर्मा भी शामिल रहे।
टीम ने बेहद गोपनीयता के साथ योजना को अंजाम दिया और बिना किसी बाधा के आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। अब आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी और विस्तृत जांच भी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनी रहे और आम जनता को न्याय मिल सके।
तहसील कार्यालय में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद सैलाना तहसील कार्यालय में पूरे दिन हलचल का माहौल रहा। कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय यही रहा कि कैसे एक सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा गया।
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत मांगी जाती है, जिससे आम नागरिक परेशान रहते हैं।
ग्रामीणों में नाराजगी और राहत दोनों
ग्राम अडवानिया और आसपास के क्षेत्रों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक ओर लोग इस बात से खुश थे कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर यह चिंता भी जताई गई कि ऐसे मामले आम हो चुके हैं।
किसानों का कहना है कि भूमि सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व कार्यों में अक्सर देरी और अनावश्यक बाधाएं आती हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमांकन जैसे सरल कार्य के लिए रिश्वत की मांग यह दर्शाती है कि निचले स्तर पर निगरानी की कमी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर कार्य होते रहें तो ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है।
लोकायुक्त की सख्ती जारी
लोकायुक्त संगठन लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। पिछले कुछ समय में कई जिलों में पटवारी, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है ताकि जनता को राहत मिल सके।
निष्कर्ष
रतलाम के सैलाना में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है। एक ओर जहां किसान अपने वैध कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर रिश्वतखोरी की घटनाएं सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में लाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
