मध्यप्रदेश में मातृशक्ति के सशक्तिकरण पर बड़ा संदेश,
भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय “नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम–प्रबुद्ध जन सम्मेलन” में CM Yadav ने महिला सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा और दूरगामी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया युग शुरू हुआ है और आने वाले समय में भारत मातृशक्ति की निर्णायक भूमिका का साक्षी बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “हम देश को मातृसत्ता से जोड़ रहे हैं” और यह बदलाव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील और समावेशी भी बनाएगा।
16 अप्रैल 2026 को बताया ‘महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक दिन’
CM Yadav ने कहा कि 16 अप्रैल 2026 का दिन महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से एक ऐतिहासिक और मंगलमय तारीख साबित होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से देश के लोकतांत्रिक ढांचे में बड़ा परिवर्तन आएगा।
उनके अनुसार यह बदलाव ऐसा होगा जैसे देश में एक साथ होली और दीपावली का उत्सव मनाया जा रहा हो, क्योंकि इससे महिलाओं की भागीदारी निर्णायक स्तर तक पहुंचेगी।
मध्यप्रदेश को बताया नारी शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नारी शक्ति वंदन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। राज्य में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 6 महिला सांसद, 27 महिला विधायक और 5 महिला मंत्री सक्रिय रूप से अपने दायित्व निभा रही हैं। यह स्थिति बताती है कि महिलाएं अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन चुकी हैं।
ऐतिहासिक महिलाओं का किया गया उल्लेख
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक महिला हस्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि हमेशा से नारी शक्ति की प्रेरणा रही है।
उन्होंने राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी महिलाओं ने देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
इसके साथ ही उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उनके प्रशासनिक और सांस्कृतिक योगदान को भी याद किया।
नारी शक्ति वंदन अभियान को घर-घर पहुंचाने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आती हैं, तो प्रशासन में संवेदनशीलता, नवाचार और प्रभावशीलता बढ़ती है।
महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बोर्ड परीक्षा में टॉप करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया।
उन्होंने छात्राओं को अंगवस्त्रम, नारियल और पौधा भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की भागीदारी
इस अवसर पर भोपाल के रविंद्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कई मंत्री, सांसद, विधायक, महिला संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, छात्राएं और महिला पत्रकार शामिल हुईं।
कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया ऐतिहासिक कदम
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर देगा और देश की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को “लाभार्थी” से “निर्णायक नेतृत्वकर्ता” की भूमिका में लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
शिक्षा और संस्कारों से सशक्त होती नारी शक्ति
कार्यक्रम में शिक्षाविदों ने भारतीय संस्कृति में नारी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि समाज निर्माण की आधारशिला भी है।
उन्होंने सावित्रीबाई फुले, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि नारी ने हर युग में नेतृत्व किया है।
निष्कर्ष
भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भारत में महिलाओं की भूमिका केवल सामाजिक भागीदारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे नीति निर्माण और नेतृत्व के केंद्र में होंगी।
मध्यप्रदेश इस बदलाव का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है, जहां नारी शक्ति को सम्मान ही नहीं, बल्कि वास्तविक शक्ति और अधिकार भी मिल रहे हैं।
