प्रदेश में Urban Development और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इसी उद्देश्य के तहत दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन आज से किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय करेंगे। यह कार्यक्रम भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन मैनेजमेंट (SPNIUM) में आयोजित किया जाएगा।
Urban Development को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना और शहरी विकास की गति को तेज करना है। इसके तहत राजस्व संवर्धन, शहरी सुधार और सतत वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती शहरी आबादी और विकास की जरूरतों को देखते हुए नगर निकायों को मजबूत आर्थिक आधार देना अब समय की आवश्यकता बन गया है।
मंत्री विजयवर्गीय करेंगे शुभारंभ
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा किया जाएगा। उनके साथ अपर मुख्य सचिव संजय दुबे भी कार्यशाला में मौजूद रहेंगे और विभागीय सुधारों पर मार्गदर्शन देंगे।
इस अवसर पर शहरी प्रशासन और विकास से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे, जो विभिन्न नीतिगत और प्रशासनिक पहलुओं पर अपने विचार साझा करेंगे।
देशभर के विशेषज्ञ और अधिकारी होंगे शामिल
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी शहरी विकास के विशेषज्ञ और अनुभवी अधिकारी शामिल होंगे।
ये विशेषज्ञ अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए नवाचार और सफल प्रयोगों को साझा करेंगे, जिससे अन्य निकायों को भी लाभ मिलेगा।
शहरी सुधारों पर तकनीकी सत्र
कार्यशाला के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शहरी विकास से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा होगी।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- नगर निकायों की खाली भूमि का आर्थिक उपयोग (Land Monetisation)
- शोधित जल (Treated Water) के पुनः उपयोग की संभावनाएं
- संपत्ति कर (Property Tax) संग्रहण में सुधार
- लीज रेंट प्रणाली का बेहतर क्रियान्वयन
इन विषयों पर विशेषज्ञ विस्तार से जानकारी देंगे, जिससे निकायों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकें।
डिजिटल सिस्टम और पारदर्शिता पर जोर
कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सिस्टम के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो जैसे डिजिटल टूल्स के प्रभावी उपयोग पर प्रशिक्षण और चर्चा की जाएगी।
इन तकनीकों का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाना है।
बेस्ट प्रैक्टिस का होगा आदान-प्रदान
इस कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न नगर निकायों द्वारा अपनाई गई सफल कार्यप्रणालियों (Best Practices) का साझा किया जाना है।
इससे अन्य निकायों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे सीमित संसाधनों में भी बेहतर वित्तीय प्रबंधन और विकास कार्य किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अनुभव साझा करने से शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और राजस्व बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे।
बड़े निकायों के अधिकारी होंगे शामिल
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मध्यप्रदेश के उन सभी नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है।
इसके अलावा नव नियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा होंगे, ताकि वे अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही आधुनिक शहरी प्रबंधन प्रणाली को समझ सकें।
‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ की दिशा में कदम
यह कार्यशाला प्रदेश के शहरी विकास को नई दिशा देने और ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि मजबूत नगर निकाय ही बेहतर नागरिक सेवाएं और सतत विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।
