MP के नमकीन उद्योग पर संकट: लागत बढ़ी, 80 देशों में एक्सपोर्ट प्रभावित, कीमतें 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ीं
MP देश की नमकीन राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला Indore का मशहूर नमकीन उद्योग इस समय गंभीर आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय संकट की दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर उत्पादन लागत में तेज बढ़ोतरी ने घरेलू बाजार को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निर्यात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
उद्योग से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, बीते कुछ महीनों में नमकीन की उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके कारण बाजार में इसके दाम 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों दोनों पर पड़ रहा है।
लागत बढ़ने से महंगा हुआ नमकीन उत्पादन
नमकीन उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मूंगफली, बेसन, तेल, मसाले और पैकेजिंग सामग्री के दाम पहले की तुलना में काफी बढ़ चुके हैं। इसके अलावा बिजली, ट्रांसपोर्ट और लेबर कॉस्ट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इन सभी कारणों से उत्पादन लागत पर भारी दबाव बना है, और उद्योग को मजबूरी में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।
व्यापारियों का कहना है कि पहले जिस नमकीन की थोक कीमत स्थिर रहती थी, अब उसमें लगातार बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा हो रही है।
पश्चिम एशिया का तनाव बना बड़ी समस्या
MP Indore का नमकीन उद्योग सिर्फ घरेलू बाजार पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी काफी निर्भर है। करीब 80 से अधिक देशों में इंदौर का नमकीन निर्यात किया जाता है। इनमें गल्फ देश भी प्रमुख हैं।
हाल ही में ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य पूर्व क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसका सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ा है।
कई देशों में शिपमेंट समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, और कुछ जगहों पर सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है। इससे एक्सपोर्ट ऑर्डर अटक गए हैं और कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
80 देशों में फैला था बाजार, अब संकट में सप्लाई चेन
Indore का नमकीन उद्योग वर्षों से वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देश और एशिया के कई देशों में इसकी बड़ी मांग है।
लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है। शिपिंग कंपनियां जोखिम के कारण कई रूट्स पर माल भेजने से बच रही हैं। इससे समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है और ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है।
निर्यातकों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले महीनों में ऑर्डर कैंसिल होने की संभावना भी बढ़ सकती है।
छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर
नमकीन उद्योग में हजारों छोटे और मध्यम स्तर के निर्माता जुड़े हुए हैं। बढ़ती लागत और एक्सपोर्ट में गिरावट का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ रहा है।
कई छोटे कारोबारी पहले ही उत्पादन घटाने को मजबूर हो गए हैं। कुछ ने नए ऑर्डर लेना भी सीमित कर दिया है क्योंकि लागत और लाभ के बीच संतुलन बिगड़ गया है।
व्यापारियों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें और बढ़ीं तो कई छोटे यूनिट्स बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
उपभोक्ताओं पर भी बढ़ा बोझ
घरेलू बाजार में नमकीन की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ा है। जो पैकेट पहले 100 रुपये में मिलता था, अब उसकी कीमत 120 से 140 रुपये तक पहुंच गई है।
दुकानदारों का कहना है कि वे भी बढ़ी हुई कीमतों को ग्राहक तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि थोक में ही दाम बढ़ चुके हैं।
उद्योग में चिंता, लेकिन उम्मीद भी कायम
हालांकि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण हैं, फिर भी उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने के बाद एक्सपोर्ट फिर से पटरी पर लौट आएगा।
इसके अलावा सरकार से भी राहत पैकेज और निर्यात प्रोत्साहन की मांग की जा रही है, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को बचाया जा सके।
निष्कर्ष
Indore का नमकीन उद्योग इस समय दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ बढ़ती उत्पादन लागत और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर न सिर्फ स्थानीय कारोबार पर, बल्कि भारत के फूड एक्सपोर्ट सेक्टर पर भी देखने को मिल सकता है।
