रिलायंस रिटेल ने बेची अपनी सब्सिडियरी RPPMSL, जयपुर एन्क्लेव ने 274 करोड़ में खरीदी कंपनी
देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़ी एक अहम कॉरपोरेट डील सामने आई है। कंपनी की रिटेल इकाई रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड ने अपनी एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस प्रोजेक्ट्स एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (RPPMSL) में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है। यह सौदा जयपुर एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया है।
इस ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू 274 करोड़ रुपये बताई गई है। डील पूरी होने के बाद RPPMSL अब रिलायंस ग्रुप की सहायक कंपनी नहीं रह गई है। कंपनी ने इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी शेयर बाजार और नियामकीय संस्थाओं को दी है।
कौन है नया खरीदार?
रिपोर्ट्स के अनुसार, RPPMSL को खरीदने वाली कंपनी जयपुर एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड है। यह कंपनी रिलायंस के प्रमोटर ग्रुप या किसी भी संबंधित समूह से जुड़ी नहीं है। यानी यह एक स्वतंत्र खरीदार है जिसने इस पूरी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है।
डील पूरी होने के बाद अब RPPMSL का स्वामित्व पूरी तरह नए मालिक के पास चला गया है और वह स्वतंत्र रूप से अपने संचालन की दिशा तय करेगी।
क्या करती थी RPPMSL कंपनी?
RPPMSL की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। इस कंपनी का पुराना नाम रिलायंस डिजिटल प्लेटफॉर्म एंड प्रोजेक्ट सर्विसेज लिमिटेड था। बाद में इसका नाम बदलकर वर्तमान रूप दिया गया।
यह कंपनी मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों में काम करती थी—
- आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट
- प्रोजेक्ट मैनेजमेंट
- प्रॉपर्टी मैनेजमेंट
- मैनपावर सपोर्ट
- रिटेल और डिजिटल प्रोजेक्ट्स में बैकएंड सेवाएं
यह रिलायंस रिटेल और डिजिटल बिजनेस को सपोर्ट करने वाली एक टेक्निकल और मैनेजमेंट सर्विस यूनिट थी।
कंपनी का वित्तीय योगदान कितना था?
वित्त वर्ष 31 मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार RPPMSL का योगदान रिलायंस समूह के कुल कारोबार में बहुत सीमित था।
- कंपनी का टर्नओवर: ₹6,412.60 करोड़
- नेटवर्थ: ₹342.45 करोड़
- रिलायंस के कुल कारोबार में योगदान: लगभग 0.06%
- नेटवर्थ में योगदान: लगभग 0.04%
इन आंकड़ों से साफ है कि यह कंपनी रिलायंस के बड़े रेवेन्यू का केवल एक छोटा हिस्सा ही थी।
क्यों बेची गई कंपनी?
हालांकि रिलायंस ग्रुप की ओर से इस डील के पीछे कोई विस्तृत रणनीतिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कॉरपोरेट विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले आमतौर पर बिजनेस री-स्ट्रक्चरिंग और नॉन-कोर एसेट्स को अलग करने के लिए लिए जाते हैं।
रिलायंस समूह समय-समय पर अपने विभिन्न बिजनेस वर्टिकल्स को ऑप्टिमाइज़ करता रहता है, ताकि मुख्य क्षेत्रों जैसे रिटेल, टेलीकॉम और एनर्जी पर फोकस बढ़ाया जा सके।
शेयर बाजार पर संभावित असर
चूंकि यह खबर कारोबारी संरचना से जुड़ी है, इसलिए इसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी का वित्तीय योगदान बहुत बड़ा नहीं था, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा प्रभाव शेयर पर सीमित रहेगा।
बाजार में पहले से ही रिलायंस के शेयर में हल्की उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। पिछले कुछ समय में इसमें कुछ गिरावट और रिकवरी दोनों देखी गई है। निवेशकों की नजर अब कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी है, जो भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
रिलायंस ग्रुप की मौजूदा स्थिति
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी और सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से एक है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। कंपनी के प्रमुख सेक्टर में रिटेल, टेलीकॉम, डिजिटल सर्विसेज और एनर्जी शामिल हैं।
रिलायंस रिटेल, कंपनी की सबसे तेजी से बढ़ती यूनिट्स में से एक है, जो भारत के खुदरा बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती है। ईशा अंबानी के नेतृत्व में इस सेक्टर का विस्तार लगातार जारी है।
निष्कर्ष
RPPMSL की बिक्री रिलायंस ग्रुप के बड़े बिजनेस पोर्टफोलियो में एक छोटा लेकिन रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। 274 करोड़ रुपये की यह डील कंपनी के लिए कोई बड़ा वित्तीय झटका नहीं है, बल्कि इसे कॉरपोरेट री-स्ट्रक्चरिंग के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में रिलायंस अपने किन नए क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाता है और यह बदलाव उसके बिजनेस मॉडल को किस तरह प्रभावित करता है।
