परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम
इंदौर: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने राज्य सेवा एवं राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
इस नए नियम को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सुरक्षा और अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। आयोग का कहना है कि समय के साथ परीक्षा में तकनीकी और सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसके चलते यह बदलाव किया गया है।
इस नए नियम के लागू होने के बाद अब अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम 90 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य होगा।
पहले 45 मिनट, अब 90 मिनट पहले पहुंचना जरूरी
अब तक MPPSC परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचना आवश्यक होता था, लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार यह समय बढ़ाकर 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे कर दिया गया है।
आयोग का कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा जांच प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है।
अब प्रत्येक अभ्यर्थी को समय से पहले पहुंचकर सभी आवश्यक जांच प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, ताकि परीक्षा के समय किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
MPPSC द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी निगरानी और सुरक्षा जांच को और अधिक मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई थी।
इसके अलावा कई केंद्रों पर प्रवेश के समय भीड़ और अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
तीन चरणों में होगी कड़ी जांच प्रक्रिया
नई गाइडलाइन के अनुसार अब परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को तीन स्तर की सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।
यह पूरी प्रक्रिया इस प्रकार होगी—
1. प्राथमिक जांच (Initial Verification)
परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर सबसे पहले अभ्यर्थी के एडमिट कार्ड की जांच की जाएगी।
इसके साथ ही फोटो पहचान पत्र के माध्यम से उम्मीदवार की पहचान को सत्यापित किया जाएगा।
इस चरण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा में शामिल होने वाला व्यक्ति वही है जिसने आवेदन किया है।
2. फ्रिस्किंग प्रक्रिया (Security Frisking)
दूसरे चरण में अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच की जाएगी।
इसके तहत मेटल डिटेक्टर के माध्यम से जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच या अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं परीक्षा केंद्र में प्रवेश न कर सकें।
इसके बाद मैन्युअल तलाशी भी ली जाएगी ताकि पूरी तरह से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
3. बायोमैट्रिक सत्यापन (Biometric Verification)
तीसरे और अंतिम चरण में अभ्यर्थियों की डिजिटल पहचान की जाएगी।
इसमें फिंगरप्रिंट स्कैनिंग, फेस रिकग्निशन, आंखों की स्कैनिंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य परीक्षा में किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना को पूरी तरह खत्म करना है।
26 अप्रैल 2026 को होगी परीक्षा
MPPSC राज्य सेवा और राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा 26 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी।
इस परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 जनवरी से 9 फरवरी तक चली थी।
इस दौरान लगभग 1 लाख 35 हजार अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो इस परीक्षा की गंभीरता और प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
पदों की संख्या और भर्ती विवरण
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 191 पद निर्धारित किए गए हैं।
इनमें—
- राज्य सेवा परीक्षा के लिए 155 पद
- राज्य वन सेवा के लिए 36 पद शामिल हैं
यह भर्ती मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।
पूरे प्रदेश में 54 जिलों में परीक्षा केंद्र
MPPSC ने परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए पूरे प्रदेश के 54 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए हैं।
इसके लिए 500 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को चयनित किया गया है, जहां परीक्षा आयोजित की जाएगी।
आयोग का कहना है कि सभी केंद्रों पर समान सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भेदभाव की संभावना न रहे।
परीक्षा का समय और पैटर्न
परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाएगी—
पहला पेपर सुबह 10 बजे से 12 बजे तक सामान्य अध्ययन का होगा।
दूसरा पेपर दोपहर 2:15 बजे से 4:15 बजे तक सामान्य अभिरुचि (विषय आधारित) का होगा।
इसके अलावा परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले सभी केंद्रों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे।
प्रवेश नियमों में सख्ती
नई गाइडलाइन के अनुसार परीक्षा केंद्रों में प्रवेश नियम पहले से अधिक सख्त किए गए हैं।
अब अंतिम समय में पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को किसी भी स्थिति में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि समय प्रबंधन अब अभ्यर्थियों की जिम्मेदारी होगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान
परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
हर परीक्षा केंद्र पर पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे।
इसके साथ ही CCTV कैमरों के माध्यम से पूरे परीक्षा केंद्र की निगरानी की जाएगी।
तकनीकी निगरानी का उपयोग
इस बार परीक्षा में तकनीकी निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है।
बायोमैट्रिक सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्डिंग और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग करके हर अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
यह कदम परीक्षा को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया है।
अभ्यर्थियों के लिए जरूरी निर्देश
आयोग ने सभी अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और सभी आवश्यक दस्तावेज अपने साथ रखें।
किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र में ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
नियमों का पालन न करने पर अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
MPPSC 2026 की नई गाइडलाइन परीक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखी जा रही है।
यह बदलाव न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएगा।
अब अभ्यर्थियों को समय प्रबंधन, अनुशासन और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान देना होगा।
यह निर्णय मध्य प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं को आधुनिक तकनीक और सख्त व्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।
