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Bhopal से छोड़ा गया गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, 7 दिनों में 1274 किलोमीटर की लंबी उड़ान ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

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Published On: 13 April 2026
bhopal
— भोपाल के हलाली डैम से छोड़ा गया गिद्ध 7 दिनों में 1274 किलोमीटर की लंबी उड़ान भरते हुए पाकिस्तान पहुंच गया।

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Bhopal से छोड़ा गया गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, 7 दिनों में 1274 किलोमीटर की लंबी उड़ान ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

Bhopal (मध्यप्रदेश): सीमाओं से परे उड़ान भरता गिद्ध

मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal से जुड़ा एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक गिद्ध ने लगभग 1274 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए पाकिस्तान तक का सफर तय कर लिया। यह गिद्ध पहले भोपाल के हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में इसने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर ली। इस घटना ने वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों को भी चौंका दिया है।

हलाली डैम से शुरू हुई यात्रा

जानकारी के अनुसार, यह गिद्ध 30 मार्च 2026 को भोपाल और रायसेन जिले की सीमा के पास स्थित हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया था। इससे पहले यह गिद्ध घायल अवस्था में मिला था, जिसके बाद उसका इलाज वन विहार नेशनल पार्क में किया गया। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ दिया गया था ताकि वह अपने प्राकृतिक जीवन को फिर से शुरू कर सके।

जीपीएस ट्रैकिंग से हो रहा था निगरानी

इस गिद्ध पर वन विभाग और वन विहार नेशनल पार्क की टीम द्वारा विशेष जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया था, जिससे उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। यह प्रोजेक्ट वन्यजीवों के प्रवास और उनके व्यवहार को समझने के उद्देश्य से चलाया जा रहा था।

शुरुआत में गिद्ध की गतिविधियां सामान्य थीं, लेकिन बाद में उसने तेजी से दिशा बदलते हुए लंबी दूरी की उड़ान शुरू कर दी।

अचानक बंद हुआ ट्रैकिंग सिग्नल

7 अप्रैल 2026 को इस गिद्ध का जीपीएस ट्रैकिंग सिग्नल अचानक बंद हो गया, जिससे वन विभाग और वैज्ञानिकों में चिंता बढ़ गई। जब तक सिग्नल सक्रिय था, तब तक उसकी लोकेशन राजस्थान के रास्ते आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रही थी।

अंतिम प्राप्त डेटा के अनुसार, गिद्ध पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर चुका था। इसके बाद इसकी वास्तविक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रही।

राजस्थान के रास्ते पाकिस्तान पहुंचा गिद्ध

ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह गिद्ध Bhopal से उड़ान भरते हुए राजस्थान के विभिन्न इलाकों से गुजरता हुआ पाकिस्तान की ओर बढ़ा। अनुमान है कि यह पक्षी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हुए पाकिस्तान के खानेवाल जिले तक पहुंच गया।

खानेवाल की दूरी भोपाल से लगभग 1274 किलोमीटर बताई जा रही है, जो इस पक्षी की असाधारण उड़ान क्षमता को दर्शाती है।

WWF-India और पाकिस्तान वन विभाग की भूमिका

जैसे ही ट्रैकिंग सिग्नल बंद हुआ, वन विहार नेशनल पार्क के अधिकारियों ने तत्काल वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF-India) को सूचना दी। इसके बाद पाकिस्तान स्थित WWF और स्थानीय वन विभाग से संपर्क स्थापित किया गया।

सूचना मिलने पर पाकिस्तान की वन्यजीव रेस्क्यू टीम ने गिद्ध को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया और उसे रेस्क्यू सेंटर में भेजा गया। वर्तमान में वहां इस गिद्ध का इलाज और देखभाल की जा रही है।

रेस्क्यू और उपचार जारी

पाकिस्तान के रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञों की टीम इस गिद्ध की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, उसे कुछ शारीरिक थकान और कमजोरी है, जिसका इलाज किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की उड़ान और अनुकूल परिस्थितियों की कमी के कारण वह कमजोर हो गया होगा।

वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण मामला

यह घटना वन्यजीव विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों से पक्षियों के प्रवास, दिशा पहचान और उनके प्राकृतिक व्यवहार को समझने में मदद मिलती है।

गिद्धों की प्रजातियां आमतौर पर बड़े क्षेत्र में भोजन और आवास की तलाश में लंबी दूरी तय करती हैं, लेकिन इस तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करना एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है।

परिंदों के लिए सीमाएं नहीं होतीं

इस घटना ने एक बार फिर उस कहावत को सच साबित कर दिया है कि “परिंदों के लिए कोई सरहद नहीं होती।” गिद्ध की यह यात्रा न केवल प्राकृतिक प्रवास का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वन्यजीव मानव द्वारा बनाई गई सीमाओं से प्रभावित नहीं होते।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि गिद्ध की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी, लेकिन उसकी इतनी लंबी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा अप्रत्याशित थी। विभाग अब इस डेटा का अध्ययन कर रहा है ताकि भविष्य में वन्यजीव संरक्षण और ट्रैकिंग तकनीक को और बेहतर बनाया जा सके।

निष्कर्ष

Bhopal से शुरू होकर पाकिस्तान तक पहुंची इस गिद्ध की यात्रा वन्यजीव जगत के लिए एक अनोखी और महत्वपूर्ण घटना बन गई है। यह घटना न केवल पक्षियों की अद्भुत उड़ान क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रकृति की दुनिया में सीमाओं का कोई अस्तित्व नहीं होता। आने वाले समय में इस तरह के अध्ययन वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान में नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।

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