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मानवता की मिसाल: IHRCT के हस्तक्षेप से 12 वर्षीय बच्ची मां से मिली

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Published On: 13 April 2026
Humanity in Action: IHRCT Intervention Reunites

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12 वर्षीय बच्ची को मां से मिलाया गया, समाज में गया सकारात्मक संदेश

कटनी/सिहोरा। समाज में जब पारिवारिक विवाद गहराते हैं, तब उनका असर केवल पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। ऐसे ही एक संवेदनशील मामले में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (IHRCT) ने हस्तक्षेप करते हुए एक बिछड़ी हुई मां को उसकी 12 वर्षीय बेटी से मिलवाकर मानवता की मिसाल पेश की है। यह पहल न केवल एक परिवार के लिए राहत लेकर आई, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

घटना की पृष्ठभूमि

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तरवला फाटक, निवार (जिला कटनी) निवासी राजेन्द्र प्रसाद रजक एवं गुड्डी बाई की पुत्री पूजा रजक का विवाह दिनेश रजक (निवासी ग्राम धनगवां) के साथ हुआ था। विवाह के बाद दोनों बहादुरगढ़ (जिला हापुड़) में निवास कर रहे थे। प्रारंभिक समय में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।

बताया जाता है कि पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच विवाद और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। आए दिन होने वाले झगड़ों और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर पूजा रजक मानसिक रूप से अत्यंत व्यथित हो गई थीं।

मां का मायके लौटना और बच्ची का अलग होना

करीब 7-8 दिन पूर्व एक गंभीर विवाद के बाद पूजा रजक बिना किसी को सूचना दिए अपने मायके निवार (कटनी) लौट आईं। उनका यह कदम परिस्थितियों से मजबूर होकर उठाया गया था। वहीं दूसरी ओर, पति दिनेश रजक अपनी 12 वर्षीय पुत्री राधिका (मिष्ठी) को अपने साथ ग्राम धनगवां ले गया।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब पिता ने बच्ची को उसकी मां से मिलने नहीं दिया। यहां तक कि ननिहाल पक्ष को भी बच्ची से मिलने से रोका गया। इस घटना से मां और उसके परिजन बेहद चिंतित और दुखी हो गए। एक मासूम बच्ची, जो माता-पिता के विवाद से अनभिज्ञ थी, वह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभावित पक्ष बन गई।

परिजनों की चिंता और ट्रस्ट से संपर्क

जब सभी प्रयास विफल हो गए, तब पूजा रजक के परिजनों ने भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट से संपर्क किया। उन्होंने पूरी घटना की जानकारी देते हुए मदद की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट ने तुरंत कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट, जो समाज में मानवाधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए कार्य करता है, ने इस प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए हस्तक्षेप शुरू किया।

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ट्रस्ट और पुलिस का संयुक्त प्रयास

ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सिहोरा थाना प्रभारी एवं एस.आई. उमलेश तिवारी से संपर्क स्थापित किया। पुलिस प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी दी गई और सहयोग की अपील की गई।

इसके बाद ट्रस्ट और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान पूरी संवेदनशीलता और निष्पक्षता का ध्यान रखा गया, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

संवाद के माध्यम से दोनों पक्षों को स्थिति की गंभीरता समझाई गई और विशेष रूप से बच्ची के हित को सर्वोपरि रखने की बात कही गई।

संवाद और समझाइश से बना समाधान

लगातार प्रयासों और समझाइश के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी। यह स्पष्ट किया गया कि एक मासूम बच्ची को मां के स्नेह से दूर रखना उसके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए उचित नहीं है।

अंततः दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बच्ची राधिका (मिष्ठी) को उसकी मां के पास भेजा जाए। इसके बाद विधिवत कागजी प्रक्रिया पूरी की गई और बच्ची को उसकी मां पूजा रजक के सुपुर्द कर दिया गया।

भावुक पल: मां-बेटी का मिलन

जब बच्ची राधिका अपनी मां से मिली, तो वह क्षण अत्यंत भावुक था। वहां उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। मां और बेटी का यह मिलन केवल एक पारिवारिक घटना नहीं, बल्कि संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाला दृश्य था।

यह पल सभी के लिए सुकून देने वाला था, क्योंकि एक मासूम बच्ची को उसका सबसे बड़ा सहारा—उसकी मां—वापस मिल गया था।

मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरे प्रकरण में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के कटनी जिला अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने धैर्य और समझदारी के साथ दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित किया और समाधान की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया।

इसके अलावा जिला उपाध्यक्ष अभिषेक काछी का भी विशेष योगदान रहा। उनके सहयोग और सक्रियता से यह कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से संपन्न हो सका।

ट्रस्ट का मानवीय दृष्टिकोण

ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने इस अवसर पर कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इसके लिए संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और यह साबित करते हैं कि यदि सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो हर समस्या का समाधान संभव है।

संगठन की सामूहिक प्रतिबद्धता

संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता एवं जीवनलाल जैन सहित अन्य सदस्यों ने भी इस कार्य में अपनी सहभागिता दी।

सभी ने एक स्वर में कहा कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट समाज के हर वर्ग के साथ खड़ा है और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

बच्चों के हित को प्राथमिकता देने की आवश्यकता

यह घटना इस बात को उजागर करती है कि पारिवारिक विवादों में सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होते हैं। ऐसे मामलों में यह आवश्यक है कि माता-पिता अपने मतभेदों को बच्चों से दूर रखें और उनके हित को सर्वोपरि मानें।

बच्चों का मानसिक और भावनात्मक विकास एक सुरक्षित और स्नेहपूर्ण वातावरण में ही संभव है। इसलिए समाज और परिवार दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों के अधिकारों और भावनाओं का सम्मान किया जाए।

समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा किया गया यह कार्य समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह दर्शाता है कि यदि सही समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो टूटते हुए रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है।

संवाद, सहयोग और संवेदनशीलता के माध्यम से न केवल विवादों को सुलझाया जा सकता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन भी लाया जा सकता है।

निष्कर्ष

कटनी जिले के सिहोरा क्षेत्र में घटित यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद का समाधान नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। एक मां को उसकी बेटी से मिलवाना एक ऐसा कार्य है, जो समाज में विश्वास और आशा को मजबूत करता है।

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है और यह समाज के अन्य संगठनों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है। भविष्य में भी ऐसे प्रयास समाज को एकजुट और संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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