ASSOCHAM रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में जमा सोना दुनिया के टॉप-10 बैंकों से भी ज्यादा है। जानिए ₹830 लाख करोड़ की यह संपत्ति 2047 तक भारत को कैसे बना सकती है महाशक्ति।
भारतीय घरों में जमा सोना: ₹830 लाख करोड़ का खजाना जो दुनिया के टॉप-10 बैंकों को भी पछाड़ देता है
नई दिल्ली: भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी निजी संपत्ति का आधार बन गया है। एसोचैम (ASSOCHAM) की हालिया रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जिसके अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में जमा सोना की मात्रा इतनी विशाल है कि यह दुनिया के टॉप-10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार को भी पीछे छोड़ देती है।
दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भारी भारतीय ‘स्वर्ण’
हाल ही में जारी एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों और मंदिरों में कुल मिलाकर करीब 50,000 टन सोना जमा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मौजूदा बढ़ती कीमतों (आज दिनांक 11 अप्रैल 2026) के अनुसार, इस विशाल भंडार की कीमत करीब 10 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹830 लाख करोड़) आंकी गई है ।यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों (जिनमें अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस शामिल हैं) के कुल सोने के भंडार से भी कहीं अधिक है ।
GDP से तुलना: भारत के पास इतना सोना है कि इसकी कुल वैल्यू अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की सालाना जीडीपी (GDP) से कहीं अधिक है ।
जीडीपी का 125%: कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच सोने की कीमतों में हुई ऐतिहासिक वृद्धि ने भारतीय घरों की वेल्थ को जबरदस्त मजबूती दी है। वर्तमान में घरों में रखा सोना भारत की कुल जीडीपी का लगभग 125% है ।
सरकारी खजाना (RBI) बनाम प्राइवेट स्टॉक
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के डेटा के अनुसार, जहाँ भारतीय घरों में सोने का अंबार लगा है, वहीं भारत के सरकारी खजाने (RBI) में केवल 880.3 टन सोना सुरक्षित है। सरकारी गोल्ड रिजर्व के मामले में भारत दुनिया में 8वें स्थान पर है ।
| विवरण | मात्रा (अनुमानित) | वैश्विक रैंक/तुलना |
|---|---|---|
| भारतीय घरों में सोना | 50,000 टन | टॉप-10 बैंकों के रिजर्व से भी अधिक |
| अमेरिका (सरकारी रिजर्व) | 8,133 टन | विश्व में प्रथम |
| RBI (सरकारी रिजर्व) | 880 टन | विश्व में 8वां |
| कुल मूल्य (भारतीय घर) | ~₹830 लाख करोड़ | विश्व GDP (USA, China को छोड़कर) से अधिक |
हालांकि, जब बात प्राइवेट स्टॉक या ‘भारतीय घरों में जमा सोना‘ की आती है, तो भारत का कोई मुकाबला नहीं है। यह पीला धातु अब देश की सबसे बड़ी आर्थिक ढाल बन चुका है।
2047 तक ‘विकसित भारत’ का रोडमैप: सोने को काम पर लगाने की तैयारी
एसोचैम का मानना है कि यदि घरों में रखे इस सोने को ‘डेड इन्वेस्टमेंट’ (निष्क्रिय निवेश) के बजाय बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा बना लिया जाए, तो भारत की तरक्की की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है।
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मल्टीप्लायर इफेक्ट: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि हर साल घरों में रखे सोने का मात्र 2% हिस्सा भी ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ या वित्तीय एसेट्स में बदल दिया जाए, तो साल 2047 तक भारत की जीडीपी में अतिरिक्त $7.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹615 लाख करोड़) जुड़ सकते हैं ।
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लक्ष्य $41.5 ट्रिलियन: रिपोर्ट के अनुसार, 2047 तक भारत की अनुमानित $34 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, सोने के सही इस्तेमाल से $41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है ।
गोल्ड लोन का बढ़ता बाजार: ₹24 लाख करोड़ के पार
अब भारतीयों का नजरिया बदल रहा है। सोने को तिजोरी में बंद रखने के बजाय लोग अब इसे अपनी जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिटेल क्रेडिट में उछाल: नवंबर 2025 तक देश में गोल्ड लोन का आंकड़ा ₹24.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह वृद्धि 42% सालाना की दर से हुई है, जो दर्शाता है कि लोग सोने को बैंक में गिरवी रखकर व्यापार और खेती के लिए पूंजी जुटा रहे हैं ।
मजबूरी नहीं, रणनीति: अब गोल्ड लोन केवल किसी आपात स्थिति का सौदा नहीं रह गया है, बल्कि यह मिड-साइज बिजनेस और बुनियादी ढांचे के विकास का एक मुख्य साधन बनता जा रहा है ।
निष्कर्ष: भारतीय घरों में जमा यह ‘पीला सोना’ देश की सबसे बड़ी आर्थिक ढाल है। यदि सही नीतियों के माध्यम से इसे मुख्यधारा के वित्तीय तंत्र में लाया गया, तो भारत को दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक सकता।
