एमपी में डेढ़ महीने में सड़कों पर दौड़ने लगेंगी 150 नई बसें। 40 बसें इंदौर पहुंची, 32 रूट तय, प्रधानमंत्री ई-सेवा योजना के तहत उज्जैन-भोपाल समेत कई शहरों को होगा फायदा।
एमपी में डेढ़ माह में सड़कों पर दौड़ेंगी 150 नई बसें, इंदौर सहित 12 जिलों को बड़ी राहत
इंदौर। मध्य प्रदेश के लाखों बस यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। प्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था को हाईटेक और हरित ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एमपी में डेढ़ महीने में सड़कों पर दौड़ने लगेंगी 150 नई बसें, जिससे यात्रियों को न सिर्फ बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रदूषण मुक्त यात्रा भी संभव होगी। प्रधानमंत्री ई-सेवा योजना के तहत मिलने वाली इन इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) का संचालन इंदौर, उज्जैन, भोपाल, खरगोन सहित प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में किया जाएगा।
विशेष रूप से, इंदौर शहर के लिए यह सौगात और भी खास है क्योंकि कुल 150 बसों में से 40 बसें पहले ही इंदौर पहुंच चुकी हैं। हालांकि, इन बसों के संचालन में अभी कुछ तकनीकी बाधाएं हैं, लेकिन प्रशासन ने दावा किया है कि डेढ़ माह के भीतर ये बसें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।
प्रधानमंत्री ई-सेवा के तहत मिलेंगी 150 ई-बसें
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत मध्य प्रदेश को कुल 150 नई इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। ये बसें पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल हैं और डीजल बसों की तुलना में न सिर्फ शांत हैं, बल्कि इनके रखरखाव का खर्च भी कम है। एआइसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड) इन बसों के संचालन की कमान संभालेगी।ये बसें सिर्फ इंदौर शहर के अंदर ही नहीं चलेंगी, बल्कि आसपास के प्रमुख शहरों के लिए भी इनका रूट निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस बसों में बैठने का मौका मिलेगा।
40 बसें इंदौर पहुंची, डिपो अधूरे क्यों?
हालांकि 40 ई-बसें पहले ही इंदौर पहुंच चुकी हैं, लेकिन अभी तक इन्हें सड़कों पर नहीं उतारा जा सका है। इसका सबसे बड़ा कारण डिपो का अधूरा होना है। एमपी में डेढ़ महीने में सड़कों पर दौड़ने लगेंगी 150 नई बसें, लेकिन इसके लिए दो प्रमुख डिपो को तैयार करना जरूरी है।
एआइसीटीएसएल नायता मुंडला ISBT के पास और देवास नाका पर दो डिपो का निर्माण कर रहा है, जहां पर हाई-कैपेसिटी चार्जिंग स्टेशन भी लगाए जा रहे हैं। ये चार्जिंग स्टेशन ही इन बसों की लाइफलाइन हैं। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और उम्मीद है कि डेढ़ माह के अंदर ये डिपो पूरी तरह चालू हो जाएंगे।
32 रूटों पर होगा संचालन: जानिए किन शहरों को होगा फायदा?
नई ई-बसों का संचालन प्रदेश के 32 प्रमुख रूटों पर किया जाएगा। इन रूटों का चयन सर्वे के बाद किया गया है, ताकि जहां सबसे अधिक बसों की कमी है और यात्री संख्या सर्वाधिक है, वहां इनका उपयोग हो सके।
मुख्य रूट इस प्रकार होंगे:
- इंदौर से उज्जैन
- इंदौर से भोपाल
- इंदौर से खंडवा
- इंदौर से खरगोन
- इंदौर से बुरहानपुर
- इंदौर से सेंधवा
- इंदौर से धार
- इंदौर से मांडव
- इंदौर से महेश्वर
इसके अलावा, इंदौर के अंदर शहरी रूटों पर भी इन बसों को चलाने की योजना है, जिससे शहर के आंतरिक यातायात को भी राहत मिलेगी।
टिकट कलेक्शन और संचालन को लेकर नई व्यवस्था
इन नई ई-बसों के लिए टिकट संग्रहण (फेयर कलेक्शन) को लेकर भी एक नई प्रणाली लागू की जा रही है। वर्तमान में, एआइसीटीएसएल की जो बसें चल रही हैं, उनमें टिकट कलेक्शन का काम ऑपरेटर की टीम करती है। लेकिन नई बसों में यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटिक होगी।कंपनी के कार्यकारी निदेशक अर्थ जैन ने बताया कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन एजेंसी का चयन अगले एक महीने में कर लिया जाएगा। इस एजेंसी के तय होने के बाद ही बसों का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। प्रयास यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इन बसों का लोकार्पण कराया जाए।
मध्य प्रदेश के लिए ई-बसों का महत्व और भविष्य
मध्य प्रदेश में लोक परिवहन की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में सुधरी है, लेकिन अभी भी कई जिले ऐसे हैं जहां आधुनिक बसों की कमी है। एमपी में डेढ़ महीने में सड़कों पर दौड़ने लगेंगी 150 नई बसें, यह सिर्फ एक शुरुआत है। यह कदम राज्य सरकार के हरित परिवहन के लक्ष्य को भी पूरा करता है।एक अन्य खबर के अनुसार, प्रदेश में करीब 899 पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली बसों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। हाईकोर्ट ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है। ऐसे में ई-बसों का आना एक बेहतर विकल्प साबित होगा।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश के यात्रियों के लिए यह राहत भरी खबर है कि अब उन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी आधुनिक, एसी और प्रदूषण मुक्त बसें मिलेंगी। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, खरगोन और बुरहानपुर जैसे शहर इस योजना के मुख्य केंद्र बिंदु हैं। हालांकि डिपो निर्माण में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन अधिकारियों ने पूरा भरोसा जताया है कि डेढ़ माह के भीतर ये बसें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।
