इंदौर एयरपोर्ट के Terminal-1 से उड़ान संचालन का रास्ता साफ, बीसीएएस ने दी सुरक्षा अनुमति
देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट के Terminal-1 से उड़ानों के संचालन का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने लंबे इंतजार के बाद इस टर्मिनल को सुरक्षा मंजूरी दे दी है। इस अनुमति के बाद अब एयरपोर्ट से नए टर्मिनल को जोड़कर उड़ान संचालन शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
हालांकि कुछ स्थानीय स्तर की औपचारिक अनुमतियां अभी बाकी हैं, लेकिन अधिकारियों के अनुसार ये भी जल्द पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद टर्मिनल-1 से नियमित उड़ानों का संचालन शुरू हो सकेगा।
अब CISF तैनाती के बाद शुरू होगा संचालन
टर्मिनल-1 से फ्लाइट संचालन शुरू होने के लिए अब केवल केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती शेष रह गई है। जैसे ही गृह मंत्रालय से मैनपावर रिलीज की प्रक्रिया पूरी होती है, सुरक्षा व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा और इसके बाद उड़ानें शुरू कर दी जाएंगी।
एयरपोर्ट अधिकारियों का मानना है कि सभी प्रक्रियाएं आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरी हो सकती हैं, जिसके बाद यात्रियों को नए टर्मिनल की सुविधा मिलने लगेगी।
लोकार्पण के बावजूद अटका था संचालन
गौरतलब है कि टर्मिनल-1 का लोकार्पण लगभग 12 दिन पहले केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री द्वारा किया गया था। राम मोहन नायडू ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन इसके बावजूद संचालन शुरू नहीं हो पाया था।
इसका मुख्य कारण BCAS की अंतिम सुरक्षा अनुमति का लंबित रहना था। सुरक्षा मंजूरी के बिना किसी भी नए टर्मिनल से उड़ान संचालन शुरू करना संभव नहीं होता।
BCAS की मंजूरी बनी निर्णायक कदम
BCAS ने बीते महीने टर्मिनल का विस्तृत निरीक्षण पूरा किया था। सुरक्षा मानकों की जांच, आपातकालीन व्यवस्थाओं, यात्री सुरक्षा प्रबंधन और एयरसाइड सिस्टम की समीक्षा के बाद अब अंतिम अनुमति जारी कर दी गई है।
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, यह मंजूरी टर्मिनल-1 के संचालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण था। इसके बिना सभी तैयारियां अधूरी थीं।
एयरपोर्ट पीआरओ रामस्वरूप यादव ने बताया कि BCAS की अनुमति मिल चुकी है और बाकी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। जल्द ही टर्मिनल-1 से उड़ान संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
फायर NOC और प्रदूषण अनुमति भी अंतिम चरण में
टर्मिनल-1 को संचालन योग्य बनाने के लिए फायर सेफ्टी एनओसी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति भी आवश्यक है। जानकारी के अनुसार फायर एनओसी लगभग प्राप्त हो चुकी है, जबकि प्रदूषण अनुमति भी जल्द जारी होने की संभावना है।
इन सभी अनुमतियों के मिलते ही टर्मिनल पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा।
सुरक्षा मानकों पर कड़ी जांच के बाद मंजूरी
किसी भी नए टर्मिनल या एयरपोर्ट सुविधा को शुरू करने से पहले कई सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होता है। BCAS की टीम द्वारा हर पहलू की जांच की जाती है, जिसमें यात्री सुरक्षा, बैगेज स्कैनिंग, अग्निशमन व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम शामिल होता है।
इन सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सुरक्षा मंजूरी जारी की जाती है। इसी प्रक्रिया के कारण टर्मिनल-1 तैयार होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं हो पाया था।
10 लाख यात्रियों की सालाना क्षमता
टर्मिनल-1 को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है और इसकी सालाना यात्री क्षमता लगभग 10 लाख निर्धारित की गई है। वहीं मौजूदा टर्मिनल-2 की क्षमता 40 लाख यात्रियों की है।
दोनों टर्मिनलों के शुरू होने के बाद एयरपोर्ट की कुल क्षमता 50 लाख यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जिससे इंदौर देश के तेजी से विकसित होते हवाई अड्डों में और मजबूत स्थिति में आ जाएगा।
50 करोड़ की लागत से हुआ विकास
टर्मिनल-1 का निर्माण और नवीनीकरण लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह टर्मिनल लगभग 6000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे आधुनिक एयरपोर्ट सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया गया है।
यहां यात्रियों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था, आधुनिक चेक-इन काउंटर और बेहतर सुरक्षा प्रणाली तैयार की गई है।
400 यात्रियों की बैठने की सुविधा और पार्किंग व्यवस्था
नए टर्मिनल में एक साथ लगभग 400 यात्रियों के बैठने की क्षमता विकसित की गई है। इसके अलावा 150 कारों की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
टर्मिनल के सामने 100 मीटर क्षेत्र को वाहन प्रतिबंधित जोन घोषित किया गया है, जिससे सुरक्षा और भी मजबूत होगी। केवल अधिकृत वाहनों को ही निर्धारित सीमा तक प्रवेश की अनुमति होगी।
पैदल यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था
टर्मिनल क्षेत्र में केनोपी सिस्टम के तहत पैदल यात्रियों के लिए अलग से मार्ग बनाया गया है। यात्री आसानी से पैदल आवागमन कर सकेंगे, जबकि पिक एंड ड्रॉप सुविधा केनोपी के बाहर निर्धारित की गई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण और यातायात को सुचारू बनाना है।
प्रतिदिन 16 छोटे विमानों का संचालन प्रस्तावित
टर्मिनल-1 से प्रतिदिन लगभग 16 छोटे विमानों के संचालन की योजना है। इससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क और अधिक मजबूत होगा और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
इससे न केवल हवाई यातायात बढ़ेगा बल्कि इंदौर क्षेत्र की आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
BCAS की सुरक्षा अनुमति मिलने के बाद अब देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 से उड़ान संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब केवल अंतिम औपचारिकताओं और CISF तैनाती के बाद यहां से नियमित उड़ानें शुरू होने की संभावना है।
यह विकास इंदौर के विमानन ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर हवाई सेवाएं मिलेंगी।
